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हरिद्वार
Haridwar


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हरिद्वार धाम
Haridwar Dham






हरिद्वार अर्थात हरि (ईश्वर) का द्वार यह पवित्र एवं मोक्षदायनी नगर भारत के उत्तराखण्ड राज्य में स्थित है। इस नगर को आदिकाल से ही बहुत पवित्र माना गया है। हिन्दुओं के वेदों, पुराणों, उपनिशदों आदि सभी धर्मशास्त्रों में इसका पूर्ण आदर के साथ कई बार उल्लेख हुआ है।, इसके तमाम धार्मिक एवं पौराणिक कारण भी है।

अपने स्त्रोत गोमुख से निकलने के बाद गंगा नदी हरिद्वार से ही पहली बार मैदानी क्षेत्र में पहुँचती है अतः हरिद्वार को गंगाद्वार भी कहते है। समुद्र मंथन के बाद अमृत के घड़े से कुछ बूंदे हरिद्वार में गिरी थी अतः यहाँ पर कुंभ के मेले का आयोजन किया जाता है जिन अन्य स्थानों पर अमृत की बूँदे गिरी थी और कुंभ के मेले का आयोजन होता है वह है उज्जैन, नासिक एवं प्रयाग। इनमें उज्जैन, नासिक एवं हरिद्वार में हर 3 वर्ष के अन्तराल में तथा इलाहाबाद (उ0प्र0) में 12वें वर्ष महाकुम्भ का आयोजन किया जाता है। गंगाद्वार हरिद्वार में आयोजित इस कुंभ मेले का बहुत ही धार्मिक महत्व बताया गया है कहते है कुंभ में स्नान करने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। अमृत की बूँदे हरिद्वार में जिस स्थान पर गिरी थी वह स्थान हर की पौड़ी में ब्रह्य कुण्ड कहलाता है कहते है ब्रह्य कुण्ड में अदभुत शक्ति है यहाँ नहाने से सभी शारीरिक रोगों में लाभ मिलता है। इस पवित्र जल में स्नान करने से श्रद्धालुओं को यहीं धरती पर ही स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है।

हरिद्वार या हरिद्वार का अर्थ हैः- हर (शिव) हरि (विष्णू) क्योंकि यह चार धाम यात्रा का प्रवेशद्वार है उत्तराखण्ड में 4 पवित्र धाम माने गये है बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री। इन धामों की यात्रा गर्मी के महीने में ही हो पाती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहाँ पर जाते है। हरिद्वार में हर की पौड़ी का विशेष महत्व है हर की पौड़ी अर्थात प्रभु के चरण, कहते है भगवान विष्णू ने यहीं पर अपने चरण चिन्ह एक पत्थर पर छोड़े थे जहाँ पर हर समय गंगा जी इन्हे छूती रहती है। हर की पौड़ी में संध्या के समय होने वाली गंगा आरती को देखना और उसमें शामिल होना एक अदभुत अनुभव देता है। हरिद्वार में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु किसी भी सूरत में इस गंगा आरती में जरूर शामिल होता है, इस आरती में भक्तगण अपने पूर्वजों की आत्मा की शान्ति के लिये गंगा नदी में दिये बहाते है यह दृश्य बहुत ही मनोरम होता है।

यहाँ पर कपिल मुनि का आश्रम भी है पुराणों के अनुसार राजा भगीरथ ने (जो भगवान श्री राम के पूर्वज थे) सतयुग में वर्षों की तपस्या के बाद अपने 60000 पूर्वजों की कपिल मुनि के श्राप से मुक्ति कराने के लिये गंगा नदी को पृथ्वी पर लाये थे जिसके बाद ही उनके पूर्वजों को श्राप से मुक्ति मिली थी, इसी कारण आज भी करोड़ो हिन्दु अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिये उनकी चिता की राख, उनकी अस्थियां यहीं पर गंगा नदी पर विसर्जित करते है।

हरिद्वार में ब्रह्य कुण्ड तथा हर की पौड़ी के चारों ओर अनेकों प्राचीन भगवान शिव, विष्णू, दुर्गाजी एवं गंगा माँ के खूबसूरत मंदिर है अधिकांश मंदिर संगमरमर के बने है जिन पर बहुत ही सुन्दर नक्काशी है।

हरिद्वार के पण्डों ने हिन्दु परिवारों को कई पीढ़ियों की विस्तृत वंशावली अपने पास संजों कर रखी है, जो कि गाँवों, नगरों, जिलों के आधार पर विशिष्ट पण्डों के पास उपलब्ध होती है। हिन्दु धर्म के मानने वाले तीर्थयात्रा शवदाह, अस्थियों या चिता की राख के विसर्जन के बाद इन वंशावली धारक पण्डों के पास जाकर अपने परिवार में जन्म, विवाह एवं मृत्यु आदि सभी जानकारियां अपनी वंशावली में अंकित कराते है समान्यतः किसी भी हिन्दु का जिसका जन्म भारत में हुआ है या पाकिस्तान में यहाँ पर अपने वंश के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकती है इतनी प्राचीन, इतनी बृहद जानकारियों का रिकार्ड रखना सचमुच आश्चर्य में डाल देता है।

हरिद्वार में चंडा देवी मंदिर, माया देवी मंदिर, मनसा देवी मंदिर आदि परम श्रद्धा के स्थान है।



 


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