Memory Alexa Hindi

होलाष्टक, होलाष्टक में क्यों वर्जित है शुभ काम

holashtak
Ad space on memory museum

Kalash One Image होलाष्टक 2018, Holashtak 2018 Kalash One Image


holashtak

Kalash One Image होलाष्टक में क्यों वर्जित है शुभ काम Kalash One Image

Kalash One Image Holastak Me Kyun Varjit Hain Shubh Kaam Kalash One Image


Kalash One Image फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका का पर्व Holika Ka Parv मनाया जाता है एवं इसकी सूचना होलाष्टक Holashtak से प्राप्त होती है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर होलिका दहन Holika Dahan तक के समय को धर्मशास्त्रों में होलाष्टक Holashtak का नाम दिया गया है।

Kalash One Image ज्योतिष एवं धर्म शास्त्रो के ‘होलाष्टक’ Holashtak के आठ दिन समस्त मांगलिक कार्यों निषिद्ध माने गए हैं। इस वर्ष होली 2 मार्च 2018 को मनाई जाएगी। होलाष्टक 23 फरवरी को लगेगा जो होलिका दहन अर्थात 1 मार्च तक रहेगा।, होलाष्टक Holashtak को ज्योतिष की दृष्टि से एक दोष माना जाता है, मान्यता है कि होलाष्टक Holashtak के दौरान शुभ कार्य करने पर अपशकुन होता है अतः इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करने चाहिए ।

Kalash One Image "होलाष्टक" Holashtak के शाब्दिक अर्थ है, होला + अष्टक अर्थात होली से पूर्व के आठ दिन, होलाष्टक कहलाते है। दरअसल होली एक दिन का पर्व नहीं वरन पूरे नौ दिनों का पर्व है जो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा जिसे दुलहंडी कहा जाता है, के दिन रंग और गुलाल खेलने के साथ समाप्त होता है।

Kalash One Image होलाष्ठक Holashtak के दौरान हिंदू धर्म शास्त्रों में बताए गए 16 संस्कारों जैसे गर्भाधान, विवाह, पुंसवन, नामकरण, चूड़ाकरन, विद्यारम्भ, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, गृह शांति, हवन यज्ञ कर्म, आदि को नहीं किया जाता है।

Kalash One Image मान्यता है कि होलाष्टक Holashtak के दौरान किए गए कार्यों से कष्ट प्राप्त होता है। इस दौरान हुए विवाह आदि संबंध टूट जाते हैं और घर में दुःख और क्लेश की स्थिति बनती है। होलाष्टक आरंभ होते ही दो डंडों को स्थापित किया जाता है। इसमें एक होलिका का प्रतीक है और दूसरे का सम्बन्ध विष्णु भक्त प्रह्लाद से है।

Kalash One Image होलाष्टक Holashtak से होली के आने की दस्तक मिलती है, साथ ही फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की भी तैयारियां जोर शोर से शुरु हो जाती है।

Kalash One Image सबसे पहले होलाष्टक Holashtak शुरु होने वाले अष्टमी के दिन होलिका दहन के स्थान ( होलिका सामन्यतया चौराहे पर जलाई जाती है ) पर गंगा जल छिड़क कर, वहाँ पर उसमें सूखे उपले, सूखी घास और होलिका दहन Holika Dahan के लिये लकडियां लगानी शुरू की जाती है, सूखी लकडियां विशेष कर ऎसी लकडियां जो सूखने के कारण पेडों से टूट्कर गिर गई हों, उन्हें एकत्र किया जाता है।

Kalash One Image होलाष्टक Holashtak के दिन से होलिका दहन Holika Dahan तक प्रतिदिन इसमें कुछ ना कुछ लकडियां डाली जाती है, जिससे होलिका दहन Holika Dahan के दिन तक वहाँ पर लकडियों का ढेर लग जाता है। जिस दिन यह कार्य किया जाता है, उस दिन को होलाष्टक Holashtak प्रारम्भ का दिन भी कहा जाता है। उसी दिन से होलिका दहन Holika Dahan होने तक कोई शुभ कार्य संपन्न नहीं किया जाता है।

Kalash One Image होलाष्टक Holashtak के दिन से होली की शुरुआत भी हो जाती है बच्चे, बडे सभी इस दिन से गुलाल से हल्की फुलकी होली खेलनी प्रारम्भ कर देते है। इसके अंतर्गत 06 मार्च को बरसाना में लट्ठमार होली तथा 07 मार्च को नंदगाँव में लट्ठमार होली खेली जायेगी।

Kalash One Image होलाष्टक Holashtak के दौरान शुभ कार्य वर्जित रहने की धार्मिक मान्यताओं के अलावा ज्योतिषीय मान्यता भी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार
Kalash One Image अष्टमी को चंद्रमा,
Kalash One Image नवमी को सूर्य,
Kalash One Image दशमी को शनि,
Kalash One Image एकादशी को शुक्र,
Kalash One Image द्वादशी को गुरु,
Kalash One Image त्रयोदशी को बुध,
Kalash One Image चतुर्दशी को मंगल तथा
Kalash One Image पूर्णिमा को राहु उग्र रुप लिए हुए रहते हैं।

Kalash One Image इससे पूर्णिमा से आठ दिन पूर्व से ही मनुष्य का दिल-दिमाग अनेक प्रकार की आशंकाओं से ग्रसित हो जाता है, जिसके कारण चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को इन अष्ट ग्रहों की नकारात्मक शक्ति के क्षीण हो जाने पर सभी लोग रंग, गुलाल आदि खेलकर संतोष और प्रसन्नता प्रदर्शित करते है।

Kalash One Image इन्ही सब कारणों से होलाष्टक Holashtak की अवधि में हिंदू संस्कृति के बहुत से संस्कार और शुभ कार्यों की शुरुआत वर्जित है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार जिस क्षेत्र में होलिका दहन के लिए डंडा स्थापित हो जाता है, उस क्षेत्र में होलाष्टक Holastak के आठ दिनों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता, अन्यथा अशुभ फल मिलते हैं। लेकिन इस समय में जन्म और मृत्यु के पश्चात किए जाने वाले कृत्यों की मनाही नहीं की गई है ।

pandit-ji

पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

Published By : Memory Museum
Updated On : 2018-02-19 03:15:55 PM


Loading...
Ad space on memory museum