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पालिताना मन्दिर
Palitana Mandir


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पालिताना जैन मन्दिर |Palitana Jain Mandir






पालिताना जैन मन्दिर गुजरात के भावनगर से 51 कि0मी0 की दूरी पर शतरूंजया पहाड़ पर स्थित है। शतरूंजया की पहाड़ी श्रंखलाओं पर 900 से अधिक प्राचीन एवं खूबसूरत मंदिर स्थित है, इन मंदिरों की बहुत ही बारीकी से बनाया गया है यह मंदिर उत्तर भारतीय वास्तुकला का शानदार नमूना है। यह पवित्र मंदिर 24 तीर्थंकर भगवान को समर्पित है। इन मंदिरों को दो भागों में 11वीं तथा 12वीं सदी में बनाया गया है। पालिताना जैन मंदिरों को टक्स कहा जाता है।

शतरूंजया पहाड़ पर स्थित जैन मंदिर पहले तीर्थंकर श्री ऋषभनाथ जी जिन्हें आदिनाथ भी कहा जाता है को अर्पित है। कहते है कि सभी जैन तीर्थंकरों ने यहीं पर निर्वाण प्राप्त किया था। निर्वाण प्राप्त करने के बाद उन्हें सिद्धक्षेत्र भी कहा जाता है। इस जगह का महत्व महाभारत काल से चला आ रहा है मान्यता है कि तीन पाण्डव भाइयों युधिष्ठिर, भीम तथा अर्जुन ने भी यहां पर निर्वाण प्राप्त किया था। जैन धर्म में मान्यता है कि संध्या के बाद न तो भोजन खाया जाता है और ना ही उसे लिया जा सकता है इसीलिये संध्या होने से पहले सभी श्रद्धालुओं को पहाड़ से नीचे उतरना पड़ता है जैन धर्म के अनुसार रात्रि में सभी देवता विश्राम करते है अतः सभी मन्दिरों के कपाट रात्रि में बन्द कर दिये जाते है।

पहाड़ के ऊपर अंगद पीर नामक एक सिद्ध स्थान है, यहाँ पर निसन्तान लोग बच्चों के लिये दुआ करते है तथा लोगों का मानना है कि पीर साहब के आशीर्वाद से जल्दी ही सभी निसन्तानों की गोद भर जाती है। यहाँ पर प्रमुख जैन मन्दिरों में आदिनाथ विमलशाह, समप्रतिराजा कुमारपाल, चौमुख आदि का नाम उल्लेखनीय है। पालिताना जैन मंदिर जैनियों के लिये एक प्रमुख तीर्थ का दर्जा रखता है अतः जैन धर्म को मानने वाले यहाँ अवश्य ही आते है।


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