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Kalash One Image पुष्य नक्षत्र Kalash One Image
Kalash One Image Pushya nakshatra Kalash One Image


   माँ सरस्वती


पुष्य नक्षत्र का महत्व
pushya nakshatra ka mahtv


ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र माने गए हैं। इनमें 8 वे स्थान पर पुष्य नक्षत्र (pushya nakshatra) आता है। ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र का महत्व Pushya nakshatra ka mahtv बहुत ही ज्यादा बताया गया है । पुष्य नक्षत्र pushya nakshatra बहुत ही शुभ नक्षत्र माना जाता है। हमारे शास्त्रों के अनुसार चूँकि पुष्य नक्षत्र Pushya nakshatra स्थायी होता है और इसीलिए इस नक्षत्र में खरीदी गई कोई भी वस्तु स्थायी तौर पर सुख समृद्धि देती है ,
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Kalash One Image 'पाणिनी संहिता' में "पुष्य सिद्धौ नक्षत्रे" के बारे में यह लिखा है-

सिध्यन्ति अस्मिन् सर्वाणि कार्याणि सिध्यः |
पुष्यन्ति अस्मिन् सर्वाणि कार्याणि इति पुष्य ||

Kalash One Image अर्थात पुष्य नक्षत्र pushya nakshatra में शुरू किये गए सभी कार्य पुष्टिदायक, सर्वथा सिद्ध होते ही हैं, निश्चय ही फलीभूत होते हैं |

Kalash One Image 7 दिसम्बर 2017 को प्रातःकाल से ही अति शुभ गुरुपुष्य संयोग शुरू हो जायेगा जो की रात 7 बजकर 53 मिनट तक उपस्थित रहेगा यह शुभ कार्यों, नए कार्यों में श्रेष्ठ सफलता देने वाला होगा। इस बार 2017 के अंतिम बन रहे पुष्य नक्षत्र जो की गुरुपुष्य नक्षत्र है में यह बात बहुत ही विशेष है कि प्रातः काल से लेकर रात तक अर्थात पूरे दिन गुरुपुष्य योग उपस्थित रहेगा।

Kalash One Image(pushya nakshatra ke upay) पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रो का राजा भी कहते है । माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र की साक्षी से किये गये कार्य सर्वथा सफल होते हैं।
पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनिदेव व अधिष्ठाता बृहस्पति देव हैं। पुष्य शनि में शनि के प्रभाव के कारण खरीदी हुई वस्तु स्थाई रूप बनी रहती है और बृहस्पति देव के कारण वह समृद्धिदायी होती है। गुरुवार व रविवार को होने वाले पुष्य नक्षत्र विशेष रूप से फलदायक होता है उसदिन पुष्यामृत योग बनता है।

Kalash One Imageऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र को मंगल कर्ता, वृद्धि कर्ता और सुख समृद्धि दाता कहा गया है।

Kalash One Image लेकिन यह भी ध्यान दें कि पुष्य नक्षत्र भी अशुभ योगों से ग्रसित तथा अभिशापित होता है। शुक्रवार को पुष्य नक्षत्र में किया गया कार्य सर्वथा असफल ही नहीं, उत्पातकारी भी होता है। अतः पुष्य नक्षत्र में शुक्रवार के दिन को तो सर्वथा त्याग ही दें। बुधवार को भी पुष्य नक्षत्र नपुंसक होता है। अतः इसमें किया गया कार्य भी असफलता देता है।
लेकिन पुष्य नक्षत्र शुक्र तथा बुध के अतिरिक्त सामान्यतया श्रेष्ठ होता है। रवि पुष्य योग (Ravi Pushy Yog) तथा गुरु पुष्य योग (Guru Pushy Yog) सर्वार्थ सिद्धिकारक माना गया है।

Kalash One Image एक बात का और विशेष ध्यान दें कि विवाह में पुष्य नक्षत्र सर्वथा वर्जित तथा अभिशापित है। अतः पुष्य नक्षत्र में विवाह कभी भी नहीं करना चाहिए।

Kalash One Image इस नए वर्ष में भूमि, भवन, वाहन व ज्वेलरी आदि की खरीद फरोख्त व अन्य शुभ, महत्वपूर्ण कार्यो के लिए श्रेष्ठ माना जाने वाला पुष्य नक्षत्र बारह होंगे जो कुल 25 दिन रहेंगे क्योंकि इनमें प्रत्येक कि अवधि डेढ़ से दो दिन तक रहेगी। इसके अतिरिक्त इस पूरे वर्ष में 96 दिन सर्वार्थ सिद्धि योग व 26 दिन अमृत सिद्धि योग रहेंगे, जिनमें भी कोई भी शुभ कार्य किए जा सकेंगे।

 





krishn-kumar-shastri

ज्योतिष एवं कर्म-काण्ड ज्ञाता
पण्डित कृष्ण लाल शास्त्री जी



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पुष्य नक्षत्र(pushya nakshatra) का महत्व

Pushp Nakshatra Ka Mahatwa

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