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रक्षाबंधन
RakshaBandhan


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रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त
Raksha Bandhan Ka Shubh Muhurt


हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan ) का पर्व बहन-भाई के पवित्र प्रेम के लिए मनाया जाता है । इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र / राखी बांधकर उनके कल्याण, उन्नति की कामना करती है और भाई हर हाल में आजीवन अपनी बहन की रक्षा , उसके सुख-सौभाग्य के लिए वचन देते है
मान्यता है कि यह रक्षासूत्र भाइयों को इतनी शक्ति देता है कि वह हर परिस्तिथि का मुकाबला करके विजय प्राप्त कर सके, जानिए 2017 का रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurat ।

शास्त्रों के अनुसार बहनो को अपने भाइयों को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में राखी बाँधनी चाहिए लेकिन इस बार रक्षाबन्धन ( raksha bandhan ) के दिन सोमवार 7 अगस्त 2017 को खंडग्रास चंद्रग्रहण का योग बन रहा है।
इसलिए रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण और भद्रा का योग बनने के कारण यह जानना अति आवश्यक है कि किस शुभ मुहूर्त में राखी कब बांधी जाए।

hand-logo पूर्णिमा तिथि 6 अगस्त 2017 को रात में 22:28 से प्रारम्भ होगी जिसमें भद्रा व्याप्त रहेगी अर्थात भद्रा 6 अगस्त को रात 10.28 बजे से शुरू हो जाएगी जो 7 अगस्त को दोपहर 11.29 बजे तक रहेगी ।

hand-logo 2017 में सावन पूर्णिमा के दिन 12 साल बाद ऐसा संयोग बना है जब रक्षाबन्धन के दिन ग्रहण लग रहा है, ग्रहण के कारण रक्षाबन्धन ( raksha bandhan ) के दिन सूतक भी होगा। चंद्र ग्रहण के प्रभाव के चलते सभी मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। इस दौरान पूजा-पाठ नहीं होगा।
शास्त्रों के अनुसार जब सूतक आरंभ होता है इस दौरान किसी भी तरह का शुभ काम नहीं होता है केवल मंत्रों का जाप ही किया जाता है।

hand-logo शास्त्रों के अनुसार भद्रा की समाप्ति और चंद्र ग्रहण का सूतक लगने के बीच के समय अंतराल में बहनो द्वारा अपने भाइयों को राखी बाँधना शुभ रहेगा।

hand-logo ज्योतिषियों के अनुसार चंद्र ग्रहण 7 अगस्त की रात्रि 10 बजकर 40 मिनट पर शुरू होगा। इसका मध्य काल रात्रि 11 बजकर 39 मिनट पर एवं मोक्ष मध्यरात्रि 12 बजकर 35 मिनट पर होगा। इस प्रकार से चन्द्र ग्रहण कुल 1 घंटा 55 मिनट तक रहेगा।

hand-logo लेकिन ग्रहण का सूतक काल चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले अर्थात 7 अगस्त अपराह्न 1 बजकर 40 मिनट से प्रारंभ हो जाएगा। दूसरी ओर जैसा पहले भी लिखा जा चूका है कि भद्रा 6 अगस्त को रात 10.28 बजे से शुरू हो जाएगी जो 7 अगस्त को दोपहर 11.09 बजे तक रहेगी।
इसलिए रक्षाबंधन का पर्व 7 अगस्त को दिन में 11.29 से 1.39 के मध्य संपन्न करना श्रेष्ठ रहेगा ।

hand-logo किसी व्यक्ति को किसी परिस्थितिवश भद्रा-काल में ही रक्षा बंधन का कार्य करना हों, तो भद्रा के मुख को छोड्कर भद्रा के पुच्छ काल में रक्षा - बंधन का कार्य किया जा सकता है ।
शास्त्रों के अनुसार में भद्रा के पुच्छ काल में कार्य करने से कोई भी हानि नहीं होती है कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है, परन्तु भद्रा के पुच्छ काल समय का प्रयोग शुभ कार्यों के लिये विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।

kalash आखिर क्यों नहीं बाँधी जाती है भद्रा में राखी :-

hand-logo शास्त्रों में भद्रा को अति उत्पाती माना गया है, भद्रा का स्वभाव उग्र कहा गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही परम पिता भगवान ब्रह्मा ने उन्हें पंचाग के एक प्रमुख अंग विष्टी करण में स्थान दिया है।
शास्त्रों के अनुसार जब भद्रा किसी पर्व काल में स्पर्श करती है तो जब तक वह रहती है उसे श्रद्धावास माना जाता है। और उस काल में बुद्दिमान व्यक्ति कोई भी शुभ कार्य नहीं करते है ।

hand-logo रावण बहुत ज्ञानी था लेकिन उससे भी एक ग़लती हो गयी थी कहते है कि रावण की बहन स्रूपनखा ने अपने भाई रावण को भद्रा काल में राखी बांधी थी, जिसके कारण परम शक्तिशाली होने पर भी रावण का वंश सहित विनाश हो गया था । इस कारण भद्रा के समय में राखी बांधने को मना किया जाता है।

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