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तीर्थराज पुष्कर
Tirthraj Pushkar




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श्री ब्रह्म पुष्कर तीर्थ को सब तीर्थों का गुरू माना जाता है तथा सब तीर्थों की यात्रा का फल पुष्कर स्नान व दर्शन से ही मिलता है। अतः पुष्कर को तीर्थराज पुष्कर कहा जाता है। यह स्थान विश्व में भगवान ब्रह्म जी के एकमात्र प्रतिष्ठित मन्दिर के कारण भी विख्यात है।

तीर्थराज पुष्कर अजमेर से 13 किमी0 की दूरी पर स्थित है। पुष्कर तीर्थ तीन ओर से अरावली श्रंखला की अति प्राचीन पहाड़ियों से घिरा है तथा एक ओर स्वर्णिम बालू मट्टी के टीले है जहाँ पर विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला लगता है।

पुष्कर सरोवर में यात्रियों के स्नानार्थ 52 घट बने हुये है। इनमें गऊ घाट, ब्रह्मघाट एवं वाराह घाट प्रमुख है। यहाँ पर प्रातः एवं सांयकाल पुष्करराज की आरती श्रंगार, स्तुति, भजन आदि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहते है।

गऊ घाट में सिक्खों के गुरू गोविन्द सिंह जी ने सम्वत 1762 ई0 में गुरू ग्रन्थ साहब का पाठ कराया था। जार्ज पन्चम की पत्नी क्वीन मेरी ने भी यहाँ पर जनाना घाट बनवाया था। हमारे देश के कई प्रमुख राजनेताओं, महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी आदि की अस्थियां यही गऊ घाट पर ही विसर्जित की गयी है।

ब्रह्मघाट यहा का प्रमुख घाट है यहाँ आदि शंकराचार्य एवं महामण्डलेश्वरों ने स्नान पूजा की थी तथा जयेन्द्र सरस्वती जी ने ब्रह्मघाट पर आदि शंकराचार्य का मंदिर बनवाया था।

पुष्कर जैनियों का पद्मावती तीर्थ कहलाता है। यहाँ पर खुदाई में जैन मन्दिर के तमाम अवशेष प्राप्त हुये हैं। यहाँ पर दिगम्बर तथा श्रावेतम्बर नये जैन मन्दिर भी अति दर्शनीय है।

हमारे देश के अनेक महान ऋषि मुनियों ने पुष्कर तीर्थ में अनेकों वर्षों तक कठिन तपस्या कर इच्छित वरदान प्राप्त किया है। इस पवित्र यज्ञस्थल पर इन ऋषि मुनियों के अनेक दर्शनीय स्थल है :- अत्रि जी, वसिष्ठ जी, कश्यप ऋषि, गौतम ऋषि, भारद्वाज ऋषि, विष्वामित्र जी, जमदग्नि जी ये सप्त ऋषि है, इसके अतिरिक्त अनेकों ऋषि मुनियों के तप एवं यज्ञ के कारण यह स्थान अत्यन्त पवित्र माना गया है।

पुष्कर आदि अनादि तीर्थ है यह अत्यन्त पवित्र, पुण्य तपोभूमि क्षेत्र है इस तीर्थ में लाखों लोग पूरे विश्व से दान-पुण्य धर्म-कर्म स्नान दर्शन करके अपने पापों से मुक्ति एवं मोक्ष प्राप्ति की इच्छा से आते है। इस अति पवित्र तीर्थ स्थल में सतयुग से ही जंगली जानवारों के शिकार, माँस, मछली, अण्डा, मदिरा तथा अन्य किसी भी प्रकार के नशीलें पदार्थों के सेवन पर पूरी तरह से रोक लगी है।

पुष्कर में लगभग 500 मन्दिर है, इनमें से प्राचीन ब्रह्म मन्दिर, विष्णु वाराह भगवान का मन्दिर, अटपटेश्वर महादेव जी का मन्दिर ये सतयुग के मन्दिर है जिनके दर्शन का बहुत ही महात्मय बताया गया है। इस सभी मन्दिरों का विभिन्न काल खण्डों में समय-समय पर अनेक राजाओं मन्त्रियों, सेठों एवं श्रद्धालुओं ने जीणोद्वार करवाया है। नया एवं पुराना रंगनाथ मन्दिर भी अति दर्शनीय है। इसके अतिरिक्त 108 महादेव नवखण्डी हनुमान जी, ग्वालियर घाट शिवालय, रामाधाम, बड़ा गणेश जी, सन्तोषी माता मन्दिर, भटवाय गणेश जी, कपालेश्वर महादेव, झूलेलाल मन्दिर भी अति दर्शनीय है।




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