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तिरूपति बालाजी| Tirupati Balaji


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तिरूपति बालाजी का मंदिर आध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित है। यह मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। यह मंदिर सात पहाड़ों से मिलकर बने तिरूमाला के पहाड़ों पर स्थित है, कहते है कि तिरूमाला की पहाड़ियाँ विश्व की दूसरी सबसे प्राचीन पहाड़ियाँ है। इस तिरूपति मंदिर में भगवान वेंकटश्वर निवास करते है। भगवान वेंकटश्वर को विष्णुजी का अवतार माना जाता है। यह मंदिर समुद्र तल से अट्ठाइस सौ फिट की ऊँचाई पर स्थित है।

तिरूपति हिन्दुओं का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण तीर्थस्थान है। इस मंदिर को तमिल राजा ‘थोडईमाननें’ ने बनवाया था। कालान्तर में कई चोल तथा तेलुगु राजाओं ने इसे और भी ज्यादा विकसित किया। इस वजह से इस मंदिर पर तमिल कला की छाप स्पष्ट दिखायी पड़ती है। विजयनगर के प्रसिद्ध राजा कृष्णदेव राय की इस मंदिर पर अटूट आस्था थी, उन्होंने इस मंदिर में बहुत सा सोना-चाँदी, हीरे-जवाहरात आदि का दान दिया था। आज भी श्रद्धालु, भक्तगण इस मंदिर में चढ़ावे के रूप में करोड़ों की धनराशि, हीरे-जवाहरात, सोना-चाँदी आदि चढ़ाते है।

यहाँ पर सभी धर्म के लोग लाखों की संख्या में पूरे विश्व से भगवान बालाजी के दर्शनों के लिए आते है तथा ऐसी मान्यता है कि बालाजी उनकी सभी इच्छाएँ पूरी करते है। तमाम बड़े-बड़े नेता, कलाकार एवं समाज के गणमान्य व्यक्ति इन पर अटूट श्रद्धा रखते है तथा भगवान के दर्शनों के लिए घंटों इन्तजार भी करते है। इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण का केन्द्र इसका गोपुरम् है। मंदिर के गर्भग्रह के ऊपर आनन्द निलयम स्थित है जो सोने का बना है। मंदिर स्थल पर विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय और उनकी पत्नी की मूर्ति तथा अकबर के प्रसिद्ध मंत्री टोडरमल की मूर्ति लगी हुयी है। मुख्य मंदिर में भगवान बालाजी की अत्यन्त मनोहर मूर्ति स्थापित है जिसमें भगवान विष्णु और शिव दोनों का ही अद्भुत रूप समाया हुआ है।

तिरूपति मंदिर में प्रतिदिन भगवान वेंकटेश्वर की पूजा-अर्चना होती है। मंदिर में दिन की शुरूआत सुबह तीन बजे ‘सुप्रभातम्’ यानि भगवान को जगाने से होती है तथा सबसे अन्त में लगभग रात एक बजे ‘एकान्त सेवा’ यानि भगवान को सुलाया जाता है। भगवान की प्रार्थना, स्तुति जिसे सेवा और उत्सव कहते है प्रतिदिन, साप्ताहिक, पाक्षीय रूप में पूर्ण श्रद्धा से आयोजित की जाती है। तिरूपति बालाजी के मंदिर में हर वर्ष सितम्बर के महीने में ब्रहमोत्सव मनाया जाता है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश-दुनिया के लोग कोने-कोने से भाग लेकर अपना जीवन सफल बनाते है।







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