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om तुलसी विवाह कैसे करेंom
om Tulsi vivah kaise kareom


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om तुलसी विवाह की विधि om
om Tulsi vivah ki vithiom




हिन्दू पुराणों में तुलसी जी को बहुत महत्त्व दिया गया है। भगवान श्री विष्णु जी की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है के बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। हिन्दू धर्म में भगवान श्री विष्णु और तुलसी जी को पति-पत्नी के रूप में देखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी/ देवोत्थान एकादशी Devotthan Ekadashi के दिन तुलसी विवाह Tulsi Vivah में तुलसी जी और विष्णु जी का विवाह कराने से कई जन्मो के पापो का नाश हो जाता है,
बहुत से लोग अपनी अपनी मान्यताओं के अनुसार प्रबोधिनी एकादशी Prabodhini Ekadashi Ke Din के दिन और बहुत से लोग द्वादशी के दिन तुलसी जी का भगवान शालिग्राम से विवाह संपन्न कराते है।
जानिए तुलसी विवाह कैसे करें, Tulsi vivah kaise kare, तुलसी विवाह की विधि, Tulsi vivah ki vithi ।

देवोत्थान एकादशी Devotthan Ekadashi के दिन तुलसी विवाह Tulsi vivah में तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति या शालिग्राम का विवाह पूर्ण वैदिक रीति से कराया जाता है। 2017 में तुलसी विवाह का शुभ दिन 31 अक्टूबर को है।

om अगर कोई जातक तुलसी विवाह Tulsi vivah अच्छी तरह से करना चाहता है तो पंडित या ब्राह्मण को बुलाया जा सकता है अन्यथा "ऊं तुलस्यै नम:" मन्त्र के उच्चारण के साथ स्वयं भी तुलसी विवाह tulsi vivah को संपन्न करा सकते है ।

om तुलसी विवाह ( Tulsi Vivah ) / तुलसी माता की पूजा करने से पहले परिवार सहित नहा कर साफ सुथरे पीले या लाल वस्त्र धारण करें ।

om देवोत्थान एकादशी, Devutthana Ekadashi तुलसी विवाह Tulsi Vivah के दिन तुलसी माता के पौधे को गेरू या चूने से अच्छी तरह से सजा लें।

om अब इस तुलसी के पौधे को अपने कमरे / आँगन / छत के बीच में रखे ।

om इसके बाद तुलसी के पौधे को एक लाल रंग की चुनरी अवश्य ही पहना दें।

om गमले के चारों ओर गन्नों को खड़ा करके विवाह का मंडप बनाएं एवं उसे साड़ी,फूल आदि से सजा लें । अगर मण्डप नहीं सजा रहे हो तो गमले को ही फूल माला से सजा लें।

om अब तुलसी के पौधे पर सुहाग की समस्त सामग्री चढ़ा लें।

om तुलसी के गमले में शालिग्राम जी रखें यदि शालिग्राम ना हो तो भगवान श्री विष्णु जी की मूर्ति या फोटो रखे ।

om अब तुलसी जी और शालिग्राम जी पर हल्दी को दूध में भिगो कर उसे लगाएं।

om अगर आपने मंडप बनाया है तो उस मंडप पर भी हल्दी का लेप करें ।

om भगवान श्री विष्णु जी पर तिल चढ़ाएं, उन पर चावल नहीं चढाएं ।

om अब सबसे पहले भगवान श्री गणेश जी का ध्यान करें, तत्पश्चात भगवान श्री विष्णु एवं तुलसी जी को आँवला, सिंगाड़े, गन्ना, फल, पीले फूल, मिष्ठान, मीठा पान, लौंग, इलाइची, बताशा, बेर, चने की भाजी, भीगी चने की दाल एवं नारियल एवं जो भी प्रशाद भी बनाया हो उसे चढ़ाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाये एवं ॐ तुलस्यै नमः का जाप करते रहे।

om अब धूप, अगरबत्ती, घी का दीपक जलाकर अन्य देवी देवताओं का भी आह्वाहन करें ।

om इसके बाद भगवान शालिग्राम जी अथवा भगवान श्री विष्णु जी की मूर्ति को अपने हाथो में लेकर तुलसी माता के पौधे की सात बार परिक्रमा करें, परिक्रमा करते समय लगातार मन्त्र का जाप करते रहे ।

om फिर कन्यादान का संकल्प करते हुए भगवान श्री विष्णु जी से प्रार्थना करें – कि हे परम पिता परमेश्वर ! आप इस तुलसी को विवाह Tulsi Vivah की विधि से ग्रहण कीजिये। आपको तुलसी जी अत्यंत प्रिय है अतः मैं इसे आपकी सेवा में अर्पित करता हूँ। हे प्रभु इसे स्वीकार करें एवं इस विवाह में मेरे द्वारा जो भूल हुई हो उसे क्षमा करके मेरे और मेरे परिवार पर सदैव अपनी कृपा बनाये रखे । हे प्रभु अब आप तुलसी जी को अपने साथ लेकर अपने बैकुंठ धाम में पधारें।

om तुलसी विवाह Tulsi Vivah में कन्यादान अवश्य ही करना चाहिए । इसमें ब्राह्मण को फल, अन्न, वस्त्र, बर्तन, दक्षिणा आदि जो भी संभव हो अवश्य ही दान देना चाहिए। तुलसी विवाह Tulsi Vivah / पूजा में ब्राह्मण के बाद ही यह धार्मिक क्रिया पूर्ण मानी जाती है।

om परिक्रमा के बाद भगवान श्री विष्णु एवं तुलसी जी की कपूर से आरती करें। एवं आरती के पश्चात प्रशाद सभी लोगो में बाँटे।

om इस प्रकार देवोत्थान एकादशी Devutthana Ekadashi के दिन इस विधि को करने से तुलसी विवाह संपन्न होता है।

तुलसी जी की पूजा में तुलसी जी के मंत्रों के साथ तुलसी स्तोत्र का भी पाठ किया जाता है। पद्मपुराण के अनुसार द्वादशी की रात को जागरण करते हुए तुलसी स्तोत्र को अवश्य ही पढ़ना चाहिए इससे भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते है, जातक के सभी पापो का नाश होता हैं। तुलसी स्त्रोत निम्न हैं-

om तुलसी स्तोत्रम् om


om जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे।
यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थित्यन्तकारिणः ॥1॥

om नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे।
नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके ॥2॥

om तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भ्योऽपि सर्वदा ।
कीर्तितापि स्मृता वापि पवित्रयति मानवम् ॥3॥

om नमामि शिरसा देवीं तुलसीं विलसत्तनुम् ।
यां दृष्ट्वा पापिनो मर्त्या मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषात् ॥4॥

om तुलस्या रक्षितं सर्वं जगदेतच्चराचरम् ।
या विनिहन्ति पापानि दृष्ट्वा वा पापिभिर्नरैः ॥5॥

om नमस्तुलस्यतितरां यस्यै बद्ध्वाजलिं कलौ ।
कलयन्ति सुखं सर्वं स्त्रियो वैश्यास्तथाऽपरे ॥6॥

om तुलस्या नापरं किञ्चिद् दैवतं जगतीतले ।
यथा पवित्रितो लोको विष्णुसङ्गेन वैष्णवः ॥7॥

om तुलस्याः पल्लवं विष्णोः शिरस्यारोपितं कलौ ।
आरोपयति सर्वाणि श्रेयांसि वरमस्तके ॥8॥

om तुलस्यां सकला देवा वसन्ति सततं यतः ।
अतस्तामर्चयेल्लोके सर्वान् देवान् समर्चयन् ॥9॥

om नमस्तुलसि सर्वज्ञे पुरुषोत्तमवल्लभे ।
पाहि मां सर्वपापेभ्यः सर्वसम्पत्प्रदायिके ॥10॥

om इति स्तोत्रं पुरा गीतं पुण्डरीकेण धीमता ।
विष्णुमर्चयता नित्यं शोभनैस्तुलसीदलैः ॥11॥

om तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी ।
धर्म्या धर्नानना देवी देवीदेवमनःप्रिया ॥12॥

om लक्ष्मीप्रियसखी देवी द्यौर्भूमिरचला चला ।
षोडशैतानि नामानि तुलस्याः कीर्तयन्नरः ॥13॥

om लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत् ।
तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरिप्रिया ॥14॥

om तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे ।
नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥15॥

om इति श्रीपुण्डरीककृतं तुलसीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥




pandit-ji

ज्योतिषाचार्य अखिलेश्वर पाण्डेय
भृगु संहिता, कुण्डली विशेषज्ञ

वैदिक, तंत्र पूजा एवं अनुष्ठान के ज्ञाता


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