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विजय दशमी, दशहरे के अचूक उपाय

Vijay Dashmi Ke upay

vijaydashami ke upay

विजयदशमी के उपाय
Vijaydashami ke upay


vijaydashami ke upay


दशहरे के अचूक उपाय
Dussehra ke achuk upay


आश्विन मास Ashwin maah के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय का पर्व विजयादशमी Vijaydashmi मनाया जाता है। यह श्रीराम shree ram की रावण पर एवं माता दुर्गा की शुंभ-निशुंभ आदि असुरों पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला पर्व है।

इस बार विजयादशमी vijaydashmi का पर्व 30 सितम्बर , शनिवार को है। इस दिन भगवान श्रीराम, शस्त्रों व शमी के वृक्ष की पूजा करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार विजयदशमी vijaydashmi के दिन कुछ खास उपाय करने से जीवन से सभी प्रकार के भय, संकट दूर हो जाते है । हम यहाँ पर आपको ऐसे ही कुछ खास उपाय बता रहे है।

hand-logo दशहरे Dussehre के दिन दोपहर के समय ईशान दिशा में शुद्ध भूमि पर चंदन, कुमकुम, पुष्प से अष्टदल कमल का निमार्ण करके अपराजित देवी एवं जया और विजया देवी का स्मरण कर उनका पूजन करें। इसके बाद शमी वृक्ष का पूजन करें।

hand-logo मान्यता है कि विजयदशमी के दिन ही कुबेर देव ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्राएं देने के लिए शमी के वृक्ष के पत्तों को सोने का बना दिया था। उसी समय से शमी को सोना देने वाला पेड़ माना जाता है।

hand-logo शमी वृक्ष के पास जाकर विधिपूर्वक सभी पूजा सामग्री को चढ़ाकर शमी वृक्ष की जड़ों में मिट्टी को अर्पित करें। फिर थोड़ी सी मिट्टी वृक्ष के पास से लेकर उसे किसी पवित्र स्थान पर रख दें। इस दिन शमी के कटे हुए पत्ते और डालियों की पूजा नहीं करनी चाहिए। रात्रि में देवी मां के मंदिर में जाकर दीपक जलाएं साथ ही पूरे घर में रोशनी रखें।

hand-logo नवरात्र में विजयादशमी Navratra me vijaydashmi के दिन शमी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि Shukh Samriddhi का स्थाई वास होता है।

hand-logo शमी का पौधा जीवन से टोने-टोटके के दुष्प्रभाव और नकारात्मक प्रभाव को दूर करता है। इस दिन संध्या के समय शमी के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से युद्ध और मुक़दमो में विजय मिलती है शत्रुओं का भय समाप्त होता है । आरोग्य व धन की प्राप्ति होती है।

शमी वृक्ष तेजस्विता एवं दृढता का प्रतीक भी माना गया है, जिसमें अगि्न तत्व की प्रचुरता होती है। इसी कारण यज्ञ में अगि्न प्रकट करने हेतु शमी की लकडी के उपकरण बनाए जाते हैं।

hand-logo कहते हैं कि लंका पर विजय पाने के बाद राम ने भी शमी पूजन किया था। नवरात्र Navratra में मां दुर्गा की पूजा भी शमी वृक्ष के पत्तों से करने का शास्त्र में विधान है। दशहरे पर शमी के वृक्ष की पूजन परंपरा हमारे यहां प्राचीन समय से चली आ रही है। ऎसी मान्यता है कि मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने के पूर्व शमी वृक्ष के सामने शीश नवाकर अपनी विजय हेतु प्रार्थना की थी।

hand-logo महाभारत के समय में पांडवों ने देश निकाला के अंतिम वर्ष में अपने हथियार शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे। संभवत: इन्हीं दो कारणों से शमी पूजन की परंपरा प्रारंभ हुई होगी। घर में ईशान कोण (पूर्वोत्तर) में स्थित शमी का वृक्ष विशेष लाभकारी माना गया है।

hand-logo आश्विन माह की विजयदशमी vijaydashmi के दिन अपराह्न को शमी वृक्ष के पूजन की परंपरा विशेष कर क्षत्रिय व राजाओं में रही है वह लोग इसके साथ ही अपने अस्त्र शास्त्रों की भी पूजा करते थे । आज भी राजपूत, क्षत्रिय लोग यह परंपरा निभाते है। कहते हैं कि ऎसा करने से व्यक्ति की सभी जगह पर विजय होती है उसका अन्ताकरण पवित्र हो जाता है। इस दिन हमें अपने कार्यक्षेत्र के अस्त्र शास्त्र अर्थात अपने लैपटाप, कम्प्यूटर, अपनी तराजू या जो भी वस्तु हमारे कार्य क्षेत्र में सहायता प्रदान करती है उसकी भी पूजा करनी चाहिए । इससे कार्य क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता मिलती है ।

hand-logo हर व्यक्ति से जीवन में जाने-अनजाने पाप हो ही जाते है, जिसका फल उसे कभी ना कभी भोगना ही पड़ता है । ऐसे ही पापों से बचने के लिए विजयदशमी vijayadashami के दिन एक विशेष उपाय अवश्य ही करना चाहिए । शास्त्रों के अनुसार जाने-अनजाने में किए ऐसे ही पाप कर्मों के बुरे फल यमराज की भयंकर यातनाओं के रूप में प्राप्त होते हैं।

hand-logo इन यातनाओं से बचने के लिए दशहरे Dussehra के दिन माँ दुर्गा की स्वरूप मां काली का ध्यान करते हुए उनसे अपने सभी जाने अनजाने में किये गए पापो के लिए क्षमा मांगते हुए उनको काले तिल अर्पित करने चाहिए इससे व्यक्ति के पापों में कमी आती है और पुण्य बढ़ते है। इसे प्रति वर्ष करना चाहिए ।
इसके साथ ही संकल्प करें कि हम सभी बुरी आदतों एवं लतों का त्याग करेंगे। ऐसा करने से यमलोक में मिलने वाली भयंकर यातना का भय नहीं रहता है।

hand-logo विजयदशमी के दिन रावण दहन के बाद बची हुई लकड़‌ियां ला कर उसे घर में कहीं सुरक्ष‌ित रख दें। इससे घर में नकारात्मक शक्‍त‌ियों का प्रवेश नहीं होता है।

hand-logo दशहरा dashara के दिन किसी भी धार्मिक स्थान में अपनी मनोकामना कहते हुए गुप्तदान अवश्य ही करें इससे कार्यों में अड़चने दूर होती है, समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होती है ।

hand-logo शास्त्रों के अनुसार इस दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।


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