Saturday, November 27, 2021
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माँ लक्ष्मी के प्रिय भोग, Ma Laxmi ke Priye Bhog,

माँ लक्ष्मी के प्रिय भोग, Ma Laxmi ke Priye Bhog,

माँ लक्ष्मी को करना है प्रसन्न तो, माँ लक्ष्मी के प्रिय भोग, Ma Laxmi ke Priye Bhog, जानना है बहुत ही जरुरी। हर व्यक्ति चाहता है कि संसार में उसे सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति हो । यह सत्य भी है कि जैसे इस पृथ्वी में जैसे लकड़ी के बिना लाचार व्यक्ति चलने में असमर्थ है उसी प्रकार धन अर्थात माता लक्ष्मी की कृपा के बिना इस भौतिक संसार में कोई भी कार्य करना, अपने कर्तव्यों का पालन करना लगभग असंभव ही है।

यदि माता लक्ष्मी Mata Laxmi की पूजा में कुछ खास बातों का ध्यान दें तो माँ शीघ्र प्रसन्न होती है और दीपावली Dipawali में माता लक्ष्मी की पूजा में तो इन बातों विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।

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माँ लक्ष्मी की पूजा Maa Lakshmi Ki puja में माँ को प्रशाद में मखाना अवश्य चढ़ाना चाहिए । माँ लक्ष्मी को मखाना विशेष रूप से प्रिय है। जैसे माता लक्ष्मी Mata Laxmi जल से प्रकट हुई हैं उसी प्रकार मखाना भी जल में जन्म लेता है और जल में ही पलता बढ़ता है। मखाना भी सागर को मथने के बाद उसी प्रकार से उत्पन्न हुआ था जैसे लक्ष्मी माँ उत्पन्न हुई थीं।

माँ लक्ष्मी को दीपावली की पूजा में सिंघाड़ा भी चढ़ाना चाहिए । सिंघारा भी मखाने की तरह ही जल में पानी के अंदर फलता है। जल से उत्पन्न होने के कारण लक्ष्मी मैया को बहुत पसंद है। शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं को मौसमी फल अत्यंत प्रिय होते  है। इसलिए जिस मौसम में जिस देवी देवता की पूजा हो,
उस मौसम का फल देवी-देवताओं को अवश्य जी अर्पित करना चाहिए। सिंघाड़ा दीपावली के मौसम में बहुत मिलता है इसलिए भी यह देवी लक्ष्मी का प्रिय है।

माँ लक्ष्मी को नारियल अत्यंत प्रिय है ।  देवी लक्ष्मी का एक नाम ‘श्री’ भी है। लक्ष्मी माता का प्रिय फल होने के कारण ही नारियल को श्रीफल भी कहते  है। नारियल को अत्यंत शुद्ध और पवित्र मानते  है, इसीलिए प्रत्येक पूजा में यह अनिवार्य रूप से चढ़ाया जाता है । लक्ष्मी माँ को जल से भरा नारियल , नारियल के लड्डू और  कच्चा नारियल अर्पित करने वाले पर माता अवश्य ही प्रसन्न होती हैं।

माँ लक्ष्मी की पूजा में बताशे को अवश्य ही चढ़ाना चाहिए । लक्ष्मी माता को बताशे बहुत ही पसंद है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मखाना, जल सिंघार और बताशे ये तीनों ही वस्तुएं चन्द्रमा से सम्बन्ध रखती हैं। चन्द्रमा को जल का कारक और देवी लक्ष्मी का भाई भी माना जाता है। अत: चन्द्रमा  से संबंध होने के कारण बताशे माता को बहुत ही प्रिय हैं।

माता लक्ष्मी की पूजा में खील और चीनी के खिलौने अवश्य ही चढ़ाएं जाते है ।  दीवाली पर माँ लक्ष्मी की पूजा में चावल नहीं चढ़ाते है , दीपावली की रात को माँ की खील, बताशे और चीनी के खिलौनों से पूजा करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती है ।

माता लक्ष्मी को शुद्द घी का हलुवा, खीर, सफ़ेद मिठाई बेहद पसंद है । मान्यता है कि दीपावली की रात को माँ को बाजार से बनी मिठाई की जगह घर में बनी खीर अथवा शुद्ध घी से बने हलुवे का  भोग लगाने से माँ उस जातक से अत्यंत प्रसन्न होती है । कहते है दीपावली से शुरू करके जो जातक अगली दीपावली तक प्रति शुक्रवार को माँ को हलुए का भोग और हर अमवस्या को खीर का भोग  लगाते है उन्हें इस धरती पर समस्त  भौतिक सुखों की अवश्य ही प्राप्ति होती है ।

माता लक्ष्मी के हाथी ऐरावत को गन्ना अर्थात ईख अत्यंत प्रिय है। दीपावली के दिन पूजन में माँ को ईख अर्पित करने से उनके हाथी ऐरावत अत्यंत प्रसन्न रहते हैं,अपने प्रिय हाथी की प्रसन्नता देखकर माँ लक्ष्मी उस जातक के जीवन में धन, ऐश्वर्य और हर्ष की मिठास भर देती है।

माँ लक्ष्मी को फलो में अनार बेहद प्रिय है, अत: माँ के पूजन में विशेषकर दीपावली में माता की पूजा करते समय अनार अवश्य ही चढ़ाना चाहिए । इसके अतिरिक्त माँ को केला, सेब आदि फल भी अर्पित कर सकते है ।

माता लक्ष्मी को को पान बहुत पसंद है। माँ लक्ष्मी की पूजा में मीठा पान अवश्य ही भेंट करना चाहिए , इससे माँ शीघ्र ही प्रसन्न होती है । कहते है जो जातक माता को पूजा में मीठा पान अर्पित करता है माँ उस घर उस जातक को कभी भी नहीं छोड़ती है ।  

 

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