Saturday, November 27, 2021
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लाभ पंचमी, labh Panchmi,

लाभ पंचमी, labh Panchmi को भारतवर्ष में दीपावली के अंतिम पर्व के रूप में मनाया जाता है । कहीं पर इसे लाभ पंचमी कहते हैं कहीं पर लाभ पंचमी, labh Panchmi, या फिर सौभाग्य पंचमी, saughagy panchmi, या ज्ञान पंचमी, gyan panchmi।

लाभ पंचमी का पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। 2021 में यह पर्व 9 नवम्बर मंगलवार को मनाया जायेगा।

लाभ पंचमी, labh Panchmi का पर्व मां लक्ष्मी को दिवाली जितना ही प्रिय है। इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा अत्यंत फलदाई मानी जाती है  ।

 दीपावली का पर्व वर्तमान में नशेबाजी करने, पटाखा फोड़ने, जुआ खेलने या फिर गाडी या बर्तन या आभूषण खरीदने के लिए ज्यादा ही याद किया जाता है ।

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परन्तु असली दीपावली तो तब है जब की हम अपने अन्दर के अँधेरे को दूर भगाएं । अपने अन्दर ज्ञान का दीपक जलाएं ।

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लाभ पंचमी गुजरात और विशेषकर महाराष्ट्र में बहुत श्रद्धा से मनाई जाती है। गुजरात में यह माना जाता है कि लाभ पंचमी पर पूजा करने, नए व्यापार करने, नए सौदे करने से उनका भाग्योदय होगा।    

गुजरात में गुजराती नववर्ष का प्रारम्भ दिवाली के अगले दिन से होता है। सभी लोग इस दिन से आने वाले चार दिनों के लिए छुट्टियों पर चले जाते हैं और लाभ पंचमी के दिन से ही वापस अपना कार्य शुरू करते हैं।

आज के दिन गुजरात में व्यापारी अपने नए बही खाते बनाते हैं । इन बही खातों के बाईं ओर शुभ और दाई और लाभ लिखा जाता है और इनके पहले पन्ने के बीच में स्वास्तिक का पवित्र चिन्ह बनाया जाता है।

इस दिन विशेषकर भगवान शिव का पूजन करना विशेष फलदायी होता है। लाभ पंचमी के दिन पूरे मन से भगवान शिव की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति आती है और जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है।

इस दिन गणेश जी और माँ लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है, मान्यता है इस दिन गणेश जी की पूजा करने से पूरे साल व्यापार, कार्यो में विघ्न नहीं आते है ।

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मां लक्ष्मी के आठ स्वरूप माने गए हैं। हर रूप विभिन्न कामनाओं को पूर्ण करता है। दीपावली पर लक्ष्मी के इन आठ स्वरूपों की पूजा करने पर असीम धन-संपदा तथा सुख की प्राप्ति होती है। आज के दिन माँ लक्ष्मी को सफ़ेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं ।

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आज के दिन गुलाबी कपड़े पर श्रीयंत्र और अष्ट लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें। गाय के घी के 8 दीपक जलाएं। गुलाब की अगरबत्ती जलाएं। लाल फूलो की माला चढ़ाएं और कमल गट्टे की माला से या माता को कमलगट्टे चढ़ाकर इस मंत्र का यथासंभव जाप करें।

मंत्र: ऐं ह्रीं श्रीं अष्टलक्ष्मीयै ह्रीं सिद्धये मम गृहे आगच्छागच्छ नमः स्वाहा।।

जाप पूरा होने के बाद आठों दीपक घर की आठ दिशाओं में लगा दें तथा कमलगट्टे कि माला को घर की तिजोरी में स्थापित करें। इस उपाय से जीवन के आठों वर्गों में सफलता प्राप्त होगी।

  1. श्री आदि लक्ष्मी – ॐ आद्यलक्ष्म्यै नम: – ये जीवन के प्रारंभ और आयु को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं।।
  2. श्री धान्य लक्ष्मी – ॐ धान्यलक्ष्म्यै नमः – ये जीवन में धन और धान्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं क्लीं।। 
  1. श्री धैर्य लक्ष्मी – ॐ धैर्यलक्ष्म्यै नमः – ये जीवन में आत्मबल और धैर्य को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।
  2. श्री गज लक्ष्मी – ॐ गजलक्ष्म्यै नमः – ये जीवन में स्वास्थ और बल को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं।।
  1. श्री संतान लक्ष्मी – ॐ संतानलक्ष्म्यै नमः – ये जीवन में परिवार और संतान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं।।
  2. श्री विजय लक्ष्मी – ॐ विजयलक्ष्म्यै नमः – ये जीवन में जीत और वर्चस्व को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ क्लीं ॐ।।
  3. श्री विद्या लक्ष्मी – ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः – ये जीवन में बुद्धि और ज्ञान को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ ऐं ॐ।।
  4. श्री ऐश्वर्य लक्ष्मी – ॐ ऐश्वर्यलक्ष्म्यै नमः – ये जीवन में प्रणय और भोग को संबोधित करती है तथा इनका मूल मंत्र है – ॐ श्रीं श्रीं।।

    लक्ष्मी जी के ये आठ स्वरुप जीवन की आधारशिला है। इन आठों स्वरूपों में लक्ष्मी जी जीवन के आठ अलग-अलग वर्गों से जुड़ी हुई हैं। इन आठ लक्ष्मी की साधना करने से मानव जीवन सफल हो जाता है।

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    कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी को पांडव पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार पांडवों ने कौरवों को भगवान श्रीकृष्ण के आदेश से  जिस दिन हराया था, उस दिन  कार्तिक शुक्ल की पंचमी थी। इसीलिए तभी से इस दिन पांचों पांडवों की पूजा होती, इस दिन को पांडव पंचमी के रूप में मनाया जाता है।

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कुंडली एवं वास्तु विशेषज्ञ
पंडित ज्ञानेंद्र त्रिपाठी जी


Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

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