Thursday, June 13, 2024
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Chandr darshan dosh ke uapy, चंद्र दर्शन दोष के उपाय, Chandr darshan 2023,

Chandr darshan dosh ke uapy, चंद्र दर्शन दोष के उपाय,

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी या कलंक चतुर्थी के रूप में जाना जाता है क्योंकि रात्रि  को चन्द्रमा के दर्शन करने पर व्यक्ति को भविष्य में झूठा कलंक लगने का भय बना रहता है।

इसी कारण किसी भी व्यक्ति को गणेश चतुर्थी पर भूलकर भी चंद्रमा के दर्शन नहीं करना चाहिए।

लेकिन शास्त्रों में चंद्र दर्शन दोष के उपाय, Chandr darshan dosh ke uapy, भी बताये गए है जिनको करने से इस दिन चंद्रमा के दर्शन का दोष समाप्त हो जाता है

चंद्र दोष के सम्बन्ध की कथा:

शास्त्रों में इस सम्बन्ध में कई कथाएं वर्णित है । एक पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान श्री गणेश जी अपने पिता शिव और माता पार्वती की परिक्रमा करके प्रथम पूज्यनीय कहलाए तो सभी देवी-देवताओं ने वंदना की, लेकिन चंद्रदेव ने अपने रूप एवं सौंदर्य का अभिमान करते हुए ऐसा नहीं किय।

 इससे नाराज होकर भगवान गणेश जी ने चंद्र देव को काले होने का श्राप दे दिया। तब चंद्रमा को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह गणपति जी से माफी मांगने लगे और उन्होंने इस श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा।

 तब गणेश जी ने कहा कि जैसे-जैसे सूर्यदेव का प्रकाश उन पर पड़ेगा, वैसे-वैसे उनका तेज स्वरूप वापस लौट आएगा।  लेकिन इस एक दिन उनके दर्शन करने से व्यक्ति को कलंक का भागी होना पड़ेगा ।

 यह घटना भाद्र पक्ष के दिन अर्थात गणेश चतुर्थी के दिन घटी थी, इसलिए तभी से इस दिन चंद्र देव के दर्शन निषेध हो गए ।

इसीलिए चतुर्थी की रात्रि को चन्द्रमा ना देखने की सलाह दी जाती है। लेकिन अगर गलती से इस रात कोई चांद देख ले तो मान्यतानुसार उसे झूठा कलंक झेलना पड़ता है।

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चतुर्थी की रात लोग चन्द्रमा को अर्घ्य देखते हैं, लेकिन ऐसा चांद देखे बिना करना होता है।
* लेकिन यदि गलती से कोई चांद देख ले और उसके बाद इस दोष से मुक्त होना हो तो निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जाप कर लें:-

सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

इसका अर्थ है कि …….  सुंदर सलोने कुमार! इस मणि के लिये ही सिंह ने प्रसेन को मारा हैं और जाम्बवन्त ने उस सिंह का संहार किया हैं। अतः तुम मत रो । अब तुम्हारा ही इस स्यमंतक मणि पर अधिकार हैं।

चतुर्थी के दिन चन्द्रदर्शन से कलंक लगता है। लेकिन इस मंत्र को पढ़ने, अथवा स्यमन्तक मणि कथा को पढ़ने – सुनने से उसका प्रभाव बहुत कम हो जाता है।

* दसवें स्कन्द के 57 वें अध्याय का पाठ करने से निश्चय जी चंद्र दर्शन का दोष समाप्त हो जाता है ।

* मान्यता है कि यदि चतुर्थी के दिन जाने अनजाने में चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो उसके दोष से बचने के लिए एक छोटा सा कंकर या पत्थर का टुकड़ा लेकर किसी की छत पर फेंक देना चाहिए । इसीलिए बहुत से लोग गणेश चतुर्थी को पत्थर चौथ भी कहते है।

* शाम के समय अपने किसी अतिप्रिय निकट संबंधी से कटु वचन बोलें, उसे बुरा भला कहे और अगले दिन प्रातः उससे क्षमा मांग लें।

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* गणपति जी की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति पर 21 लड्डूओं का भोग लगाएं। फिर 5 लड्डुओं को गणेश जी की मूर्ति के पास रखकर शेष 16 लड्डुओं को ब्राह्मणों में बांट दें।

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