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गणेश जी का परिवार, Ganesh ji ka Parivar,

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Ganesh ji ka Parivar, गणेश जी का परिवार,

गणेश जी का परिवार, Ganesh ji ka Parivar, बहुत पूजनीय माना गया है । श्री गणेश भगवान शिव व पार्वती के पुत्र हैं, ये बात तो सभी लोग जानते हैं, लेकिन श्रीगणेश जी के परिवार Shri Ganesh ji ke pariwar के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं।
कहते है कि नित्य या हर बुधवार को गणपति जी के परिवार ganesh ji ke pariwar का नाम लेने से जीवन में शुभ फल मिलते है समस्त मनोकामनाएँ अवश्य ही पूर्ण होती है।
भगवान गजानन के परिवार के सभी सदस्यों का नाम गणपति उत्सव में लेना अत्यन्त फलदायी है।

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शास्त्रो के अनुसार गणपति एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिनके परिवार का हर सदस्य अत्यंत पूजनीय और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है। श्रीगणेश के परिवार के सभी सदस्यों का अपना विशेष महत्व है।

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Ganesh ji ka Parivar, गणेश जी का परिवार,

* गणपति जी के पिता भगवान शिव जी हैं। शिव को सृष्टि का प्राण माना जाता है। अगर शिव नहीं हों तो सृष्टि शव समान हो जाती है। इस कारण शिव को कालों का काल यानी महाकाल कहा गया है। शिव प्राण देते हैं, जीवन देते हैं और संहार भी करते हैं। शिव का पूजन समस्त सुख देने वाला माना गया है।

* गणेश जी की माता पार्वती जी हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार, ये पर्वतराज हिमालय व मैना की पुत्री हैं। पार्वती को ही शक्ति माना गया है। शरीर में शक्ति ना हो तो शरीर बेकार है। शक्ति तेज का पुंज है। मानव को हर काम में सफलता की शक्ति पार्वती यानी दुर्गा देती हैं। भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर स्वरूप में स्वयं शक्ति के महत्व को प्रतिपादित किया है।

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* भगवान गणेश जी के भाई भगवान कार्तिकेय है। कार्तिकेय के पास देवताओं के सेनापति का पद है। वे साहस के अवतार हैं। कम आयु में ही अपने अदम्य साहस के बल पर उन्होंने तारकासुर का नाश किया था। इसलिए आत्मविश्वास और आत्मबल की प्राप्ति कार्तिकेय से होती है।
शिवपुराण के अनुसार, कार्तिकेय ब्रह्मचारी हैं, वहीं ब्रह्मवैवर्त पुराण में इनकी पत्नी का नाम देवसेना बताया गया है।

* शास्त्रो में भगवान शिव Bhagwaan Shiv और माता पार्वती की पुत्री अशोक सुंदरी को गणेशजी Ganesh ji की बहन बताया गया है। अशोक सुंदरी का विवाह राजा नहुष से हुआ था।

मुद्गलपुराण में स्वयं शिवजी ने गणेश जी Ganesh ji की स्तुति करते हुये उनके परिवार का वर्णन किया है–

सिद्धिबुद्धिपतिं वन्दे ब्रह्मणस्पतिसंज्ञितम्।
मांगल्येशं सर्वपूज्यं विघ्नानांनायकं परम्।।

* अर्थात श्री गणेश जी Ganesh ji सिद्धि और बुद्धि के पति हैं। जो जातक उनकी उपासना करता है उन्हें वे अपने कार्य में सिद्धि (पूर्णता) प्रदान करते हैं साथ ही बुद्धि (विवेक, ज्ञान शक्ति) देते हैं।

* शिवपुराण के अनुसार सिद्धि और बुद्धि प्रजापति विश्वरूप की पुत्रियां हैं। कुछ स्थानों पर रिद्धि और सिद्धि का नाम मिलता है, लेकिन अधिकांश ग्रंथों नें सिद्धि और बुद्धि को ही गणपति की पत्नी माना गया है।
सिद्धि कार्यों में, मनोरथों में सफलता देती है। बुद्धि ज्ञान के मार्ग को प्रशस्त करती हैं। भगवान गणपति के वाम भाग में सिद्धि देवी और दक्षिण भाग अर्थात दाएं भाग में बुद्धि की संस्थिति बतायी गयी है।

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* भगवान गणेश के दो पुत्र हैं क्षेम और लाभ। गणेशजी को अपनी पत्नी सिद्धि से क्षेम अर्थात शुभ और पत्नी बुद्धि से लाभ नाम के पुत्र हुए है।
किसी भी व्यापार, कारोबार में सदैव शुभ लाभ की ही आशा की जाती है और इन्ही की कृपा से जातक को सुख – समृद्धि Shukh Samridhi और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

* क्षेम हमारे अर्जित पुण्य, धन, ज्ञान और ख्याति को सुरक्षित रखते हैं। सीधा अर्थ है हमारे पुरुषार्थ से कमाई गई हर वस्तु को सुरक्षित रखते हैं, उसे क्षय नहीं होने देते और धीरे-धीरे उसे बढ़ाते हैं।

* लाभ का काम निरंतर उसमें वृद्धि देने का है। लाभ हमें धन, यश आदि में निरंतर बढ़ोत्तरी देता है।

* शास्त्रो में कई स्थानों में तुष्टि एवं पुष्टि को गणेश जी की बहुएं कहा गया है तथा आनंद एवं प्रमोद गणेश जी Ganesh Ji के पौत्र है । जैसा नाम वैसे ही गुण, तुष्टि जातक को पूर्ण आत्म सन्तुष्टि एवं पुष्टि आरोग्य प्रदान करती है ।
इसी प्रकार अमोद एवं प्रमोद जातक के जीवन में सर्वत्र सुख समृद्धि एवं हर्ष-उल्लास का वातावरण बनाते है ।

इस प्रकार गणपति जी के पूरे परिवार का नित्य / चतुर्थी एवं बुधवार को नाम लेने से जीवन में सभी मनोरथ पूर्ण होते है । विशेषकर गणेश उत्सव के समय जब भगवान गणपति स्वयं इस धरती पर आते है उनके परिवार का नित्य स्मरण करना उनकी आराधना करना अत्यंत पुण्यदायक है, इसका अक्षय फल मिलता है।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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