Sunday, October 2, 2022
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गणेश जी को कैसे प्रसन्न करे, Ganesh ji ko kaise prasann kare, गणेश उत्सव 2022,

गणेश जी को कैसे प्रसन्न करे, Ganesh ji ko kaise prasann kare,

* भगवान श्री गणेश विघ्नहर्ता कहलाते है । किसी भी पूजा में सबसे पहले गणेश जी की आराधना Ganesh ji ki aradhana की जाती है ।

कहते है कि यदि गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi / चतुर्थी तिथि / बुधवार को भगवान श्री गणेश जी को प्रसन्न करने के उपाय Ganesh ji ko prasann krne ke upay किए जाएं तो भक्तों की समस्त इच्छाएँ पूरी हो सकती है।

* भगवान गणेश स्वयं रिद्घि-सिद्घि के दाता व शुभ-लाभ को प्रदान करने वाले हैं। संकल्प अनुसार गणपति जी की पूजा ganesh ji ki pooja अर्चना करने से विघ्नहर्ता अपने भक्तों की सभी बिगड़ी बात बना देते हैं। वह भक्तों की सभी बाधाएं, संकट, रोग, शत्रु तथा दारिद्रता को दूर करते हैं।

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* मान्यता है भगवान गणपति की पूर्ण श्रद्धा एवं संकल्प से साधना-आराधना करने से भक्तों के घोर से घोर संकट भी दूर हो जाते है,उन्हें समस्त चिंताओं से मुक्ति मिलती है, तथा उनके जीवन से विघ्न दूर होकर उन्हें अपने सभी कार्यों में सफलता मिलती है।

* आइये हम आपको कुछ आसान से उपाय बताते है जिससे आप गणेश जी को प्रसन्न करके अपनी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण कर सकते है।

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* गणपति जी की पूजा करते समय सर्वप्रथम गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए Ganesh Ji Prasann karne ke leye रोली ,लाल सिंदूर का तिलक लगाएं। सिंदूर की लाली गणेश जी को बहुत ही ज्यादा पसंद है।

गणेश जी को तिलक लगाकर पूजा करने के बाद अपने माथे पर भी रोली का तिलक अवश्य ही लगाएं लगाएं।

इससे गणेश जी प्रसन्न Ganesh ji ko prasann होते है, उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है, भगवान एकदन्त जातक की सभी दिशाओं से रक्षा करते हैं, उसे किसी भी चीज़ की कोई भी कमी नहीं रहती है ।

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* गणपति जी को प्रसन्न करने का आसान उपाय ganpati ji ko prasann karne ka asan upay है नित्य दूर्वा से भगवान गणपति जी की पूजा करना। दूर्वा गणेश जी को अत्यंत प्रिय है शास्त्रों के अनुसार दूर्वा में अमृत मौजूद होता है।

* गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए नित्य सुबह स्नान पूजा करके गणेश जी को 5/11/21 दूर्वा यानी हरी घास गिन कर अर्पित करें। ध्यान रहे कि दुर्वा गणेश जी के मस्तक पर रखना चाहिए उनके चरणों में दुर्वा नहीं रखें और भगवान विघ्न विनाशक को दुर्वा अर्पित करते हुए ‘इदं दुर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः’ मंत्र भी अवश्य ही बोलें ।

* गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार जो व्यक्ति गणेश जी की पूजा नित्य दुर्वांकुर से करता है वह देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर के समान धनवान हो जाता है, अर्थात उस व्यक्ति के पास धन-धान्य की कभी कमी नहीं रहती है।

* गणेश जी ( Ganesh ji ) को मोदक का भोग बहुत ही प्रिय है। शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए सर्वोत्तम उपाय ganesh ji ke upay मोदक का भोग है । माना जाता है कि यदि गणपति पूजा में मोदक का भोग अर्पित नहीं किया तो जातक की पूजा अधूरी ही रहती है।

शास्त्रों में मोदक को अमृत मिश्रित माना गया है। पद्म पुराण के सृष्टि खंड के अनुसार मोदक का निर्माण अमृत से हुआ है।

गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार जो व्यक्ति गणेश जी Ganesh ji को मोदक का भोग लगाता है गणपति उसका अवश्य जी मंगल करते हैं। मोदक का भोग लगाने वाले जातक की समस्त मनोकामना शीघ्र ही पूरी होती है।

* जीवन में आर्थिक लाभ ( Arthik Labh ) और किसी भी प्रकार के संकट निवारण के लिये गणेश उत्सव के किसी भी दिन से अथवा शुक्ल पक्ष के बुधवार से शुरू करते हुए भगवान गणेश Bhagwaan Ganesh की मूर्ति पर कम से कम 21 दिन तक थोड़ी-थोड़ी जावित्री चढ़ावे और रात को सोते समय थोड़ी जावित्री स्वयं भी खाकर सोएं ।

यह प्रयोग 21, 42, 64 या 84 दिनों तक अवश्य ही करें। इससे सभी विघ्न दूर होते है, घर में निश्चय ही धन (Dhan), सुख समृद्धि ( Sukh Smradhi ) का वास होता है।

मान्यता है की कैसा भी कार्य हो गणेश जी की कृपा ganesh ji ke kripa से अधिकतम 84 दिनों तक इस उपाय को करने से कार्य में अवश्य ही सफलता मिलती है।

* जो लोग भगवान गणेश जी Ganesh ji की घी से नित्य पूजा करते है उन पर प्रभु विघ्नहर्ता की सदैव कृपा बनी रहती है । घी को पुष्टिवर्धक और रोगनाशक कहा जाता है। पंचामृत में एक अमृत घी भी होता है। भगवान गणेश को घी काफी पसंद है।

गणपति अथर्वशीर्ष के अनुसार घी से गणेश की पूजा करने से जातक को ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होती है।

कहते है कि नित्य घी से गणेश की पूजा करने वाला व्यक्ति अपनी बुद्धि, ज्ञान और योग्यता के बल से संसार में श्रेष्ठ स्थान हासिल कर लेता है।

* शास्त्रों के अनुसार जो लोग नित्य भगवान गजानन की शमी पत्र से पूजा करते है उन पर सदैव गणेश जी प्रसन्न रहते है । शमी गणेश जी को अत्यंत प्रिय है। शमी ही एक मात्रा पौधा है जिसकी पूजा से भगवान शंकर, गणेश जी और शनि सभी प्रसन्न होते हैं।

शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री राम ने रावण पर विजय पाने के लिए शमी की पूजा की थी।

जो जातक शमी के कुछ पत्ते नियमित रूप से गणेश जी को अर्पित करता है उस पर गणेश जी के कृपा ganesh ji ki kripa जीवन में कोई भी संकट उसके पास भी नहीं आता है उसके घर में धन – धान्य , सुख – समृद्धि की कोई भी कमी नहीं होती है ।

* भगवान गणेश को प्रसन्न bhagwan ganesh ko prasann करने के लिए उन्हें पवित्र अखंडित अक्षत अर्थात चावल अर्पित करें। अखंडित अर्थात जो टूटा हुआ नहीं हो। गणेश जी को सूखा अक्षत नहीं चढ़ाते है।

उनको अक्षत चढ़ाने से पहले उसमें कुछ बुँदे गंगाजल / जल की डालकर उसे गीला करें फिर यह मन्त्र ‘इदं अक्षतम् ऊं गं गणपतये नमः’ बोलते हुए गणेश जी Ganesh ji को तीन बार अक्षत चढ़ाएं। इससे जातक को अपने कार्य क्षेत्र में मनवाँछित सफलता प्राप्त होती है।

* गणेश जी पर तुलसी नहीं चढाई जाती है । आचार भूषण ग्रंथानुसार भगवान श्रीगणेश को तुलसीदल को छोड़कर सभी प्रकार के फूल चढ़ाए जा सकते हैं।

पद्मपुराण आचाररत्न में भी लिखा है कि ‘न तुलस्या गणाधिपम’ अर्थात् तुलसी से गणेश जी की पूजा कभी न करें।

गणेश जी को सफ़ेद चन्दन और गेंदे का फूल भी नहीं चढ़ाना चाहिए ।

Published By : Memory Museum
Updated On : 2022-09-1 11:48:00 PM

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