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नवरात्री Navratri से नौ विशेष रात्रियां का बोध होता है। “रात्रि”  सिद्धि का प्रतीक मानी गयी है। नवरात्र Navratr  में माँ शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है। भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों ने दिन की अपेक्षा रात्रि को अधिक महत्व दिया है।
इसी कारण होली, दीवाली, शिवरात्रि एवं नवरात्री आदि पर्वों को रात में ही मनाने की परंपरा है,  

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 प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्री Navratri का पवित्र पर्व आता है। नवरात्रों Navratro  में माता दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है।

नवरात्री का प्रथम पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है, इन्हे चैत्र के नवरात्रे कहते है ।

वर्ष में दूसरी बार नवरात्री का पर्व अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है, इन्हे शरद नवरात्रे कहते है ।

इस वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र गुरुवार 19 मार्च से शुरू होकर शुक्रवार 27 मार्च तक रहेंगे।

इस वर्ष 19 मार्च को मां शैलपुत्री के पूजन के साथ चैत्र नवरात्र का प्रारंभ होगा ।

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प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – गुरुवार 19 मार्च को सुबह 06.56 AM से

प्रतिपदा तिथि समाप्त – शुक्रवार 20 मार्च मध्य रात्रि 02.33 AM तक7 AM तक

इस बार प्रतिपदा तिथि का क्षय हो रहा है । हिन्दू पंचांग के अनुसार साल 2026 में चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि गुरुवार 19 मार्च को सुबह 06.56 AM से प्रारम्भ होगी जो शुक्रवार 20 मार्च को तड़के 02.33 AM तक रहेगी, इस कारण उदया तिथि के अनुसार पहला नवरात्र का ब्रत गुरुवार 19 मार्च के दिन रखा जाएगा ।

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नवरात्रि navratri में माँ नौ शक्तियों की पूजा अलग-अलग दिन में की जाती है।

 प्रतिपदा नवरात्र navratr का पहले दिन प्रतिपदा को माँ  शैलपुत्री की आराधना होती हैं। नवरात्री के पहले दिन भक्तों को पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।

द्वितीया  नवरात्र navratr का दूसरा दिन  द्वितीया को माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना होती हैं। नवरात्री के दूसरे दिन भक्तो को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय हरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए ।

 तृतीया  नवरात्र navratr के तीसरे दिन तृतीया को देवी चन्द्रघंटा की पूजा की जाती हैं। नवरात्री के तीसरे दिन भक्तो को मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय भूरे या ग्रे रंग के कपड़े पहनने चाहिए।

 चतुर्थ  नवऱात्र navratr के चौथे दिन चतुर्थी को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा की पूजा होती हैं। चौथे नवरात्री में भक्तो को नारंगी रंग के कपडे पहनना शुभ माना जाता है।

 पंचम नवरात्र के पाँचवे दिन पंचमी को माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है। पाँचवे नवरात्री के दिन भक्तो को सफेद रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।

 षष्टी  नवरात्र navratr के छठे दिन षष्टी को माँ दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती हैं। नवरात्री के छठे दिन भक्तो को लाल रंग के वस्त्र धारण करके माँ कात्यायनी की आराधना करनी चाहिए ।

नवरात्र navratr के सातवें दिन यानि सप्तमी को मां कालरात्रि की पूजा होती हैं। नवरात्री की सप्तमी तिथि को भक्तो को नीले वस्त्र धारण करके माँ काल रात्रि की पूजा करनी चाहिए ।

  नवरात्र navratr के आठवें  दिन यानि अष्टमी को मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा होती हैं। नवरात्री की अष्टमी तिथि को भक्तो गुलाबी वस्त्र धारण करने चाहिए । एवं

 नवरात्र navratr के नौवे दिन यानि नवमी को मां सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती हैं। नवरात्री के नौवें दिन भक्तो को मां सिद्धि दात्री की पूजा करते समय बैगनी अर्थात पर्पल रंग के कपड़े पहनना शुभ माना गया है ।

नवरात्री Navratri के 9 दिनों के पर्व को 3-3-3 दिनों में बांटा गया है।

प्रथम 3 दिन भक्त माँ दुर्गा की आराधना  तमस को जीतने के लिए अर्थात अपने अंदर उपस्थित बुराइयों, अपने विघ्न- बाधाओं, अपने रोगो, अपने पापो तथा शत्रुओं के नाश के लिए करते है ।

बीच के तीन दिन में भक्त धन की देवी माँ लक्ष्मी की आराधना  रजस को जीतने के लिए अर्थात सभी भौतिक इच्छाओं, धन, सुख समृद्धि और ऐश्वर्य प्राप्त करने के लिए करते है ।

तथा अंतिम तीन दिन में भक्त विध्या की देवी माँ सरस्वती की आराधना  सत्व को जीतने के लिए अर्थात आध्यात्मिक ज्ञान, विद्या, ज्ञान, वाकपटुता, कौशल प्राप्त करने के लिए करते है ।

” प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्माचारिणी।
 तृतीय चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेति चतुर्थकम्।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रि महागौरीति चाऽष्टम्।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः। “

नवरात्री में माँ दुर्गा के पूजन की सभी सामग्री यथासंभव नवरात्री से दो दिन पहले खरीद लेनी चाहिए, अमावस्या को पूजन सामग्री खरीदने से बचना चाहिए।

वर्ष 2026 में Chaitr navratri, चैत्र नवरात्री, के प्रथम दिन मां दुर्गा हाथी पर पालकी / डोली होकर आएगी।

इस वर्ष 2026 में शरद नवरात्री गुरुवार से शुरू हो रहे हैं, इसलिए माँ दुर्गा जी पालकी पर सवार होकर आएंगी । शास्त्रों में देवी की हाथी की पालकी को शुभ नहीं माना गया है ।

देवी पुराण के अनुसार, डोली / पालकी पर माता का आगमन शुभ नहीं माना जाता है। यह अस्थिरता, उतार-चढ़ाव का धोतक है। माता के डोली पर आगमन का अर्थ है कि इस वर्ष कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा, युद्ध या महामारी की स्थिति बन सकती है ।


शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक वर्ष नवरात्री में माँ दुर्गा का अलग अलग वाहनों पर आगमन होता है । माँ के हर वाहन का अलग अलग महत्त्व होता है ।

यदि नवरात्री रविवार या सोमवार से प्रारम्भ होते है तो इसका अर्थ है कि माता का आगमन हाथी पर होगा ।

अगर मंगलवार और शनिवार को नवरात्री शुरू होते है तो मां का आगमन घोड़े पर होता है ।

इसी प्रकार बुधवार के दिन नवरात्री का आरम्भ होने पर माता धरती पर नाव पर सवार होकर आती है और यदि,

नवरात्र गुरुवार या शुक्रवार को शुरू होते है तो इसका अर्थ है कि माता डोली पर सवार होकर आएगी ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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