Tuesday, October 19, 2021
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navratri kab se hai 2021, नवरात्री कब से है,

navratri kab se hai, नवरात्री कब से है 2021,

नवरात्री Navratri से नौ विशेष रात्रियां का बोध होता है। “रात्रि”  सिद्धि का प्रतीक मानी गयी है। नवरात्र Navratr  में माँ शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है। भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों ने दिन की अपेक्षा रात्रि को अधिक महत्व दिया है।
इसी कारण होली, दीवाली, शिवरात्रि एवं नवरात्री आदि पर्वों को रात में ही मनाने की परंपरा है,  

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 प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्री Navratri का पवित्र पर्व आता है। नवरात्रों Navratro  में माता दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है। नवरात्री का प्रथम पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है, इन्हे चैत्र के नवरात्रे कहते है ।

इस वर्ष 2021 में शरद नवरात्र गुरुवार 7 अक्टूबर से शुरू होकर 14 अक्टूबर दिन गुरुवार तक रहेंगे। 15 अक्टूबर शुक्रवार को विजयदशमी का पर्व मनाया जायेगा ।
इस शरद नवरात्री में 9 अक्टूबर शनिवार को एक ही दिन में तीसरा और चौथा दोनों ही नवरात्र मनाया जायेगा ।

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प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – बुधवार 6 अक्टूबर, 2021 को शाम को 4.34 बजे से

प्रतिपदा तिथि समाप्त – गुरुवार 7 अक्टूबर, 2021 को दोपहर 1:46 बजे तक

कब से है नवरात्री, kab se hai navratri,

नवरात्रि navratri में माँ नौ शक्तियों की पूजा अलग-अलग दिन में की जाती है।

7 अक्टूबर गुरुवार  –  प्रतिपदा नवरात्र navratr का पहले दिन प्रतिपदा को माँ  शैलपुत्री की आराधना होती हैं। नवरात्री के पहले दिन भक्तों को पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।

8 अक्टूबर शुक्रवार   – द्वितीया  नवरात्र navratr का दूसरा दिन  द्वितीया को माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना होती हैं। नवरात्री के दूसरे दिन भक्तो को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय हरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए ।

9 अक्टूबर शनिवार –  तृतीया  नवरात्र navratr के तीसरे दिन तृतीया को देवी चन्द्रघंटा की पूजा की जाती हैं। नवरात्री के तीसरे दिन भक्तो को मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय भूरे या ग्रे रंग के कपड़े पहनने चाहिए।

9 अक्टूबर शनिवार  –  चतुर्थी   नवऱात्र navratr के चौथे दिन चतुर्थी को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा की पूजा होती हैं। चौथे नवरात्री में भक्तो को नारंगी रंग के कपडे पहनना शुभ माना जाता है।

10 अक्टूबर रविवार –  पंचमी नवरात्र के पाँचवे दिन पंचमी को माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है। पाँचवे नवरात्री के दिन भक्तो को सफेद रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।

11 अक्टूबर सोमवार –  षष्टी  नवरात्र navratr के छठे दिन षष्टी को माँ दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती हैं। नवरात्री के छठे दिन भक्तो को लाल रंग के वस्त्र धारण करके माँ कात्यायनी की आराधना करनी चाहिए ।

12 अक्टूबर मंगलवार  – नवरात्र navratr के सातवें दिन यानि सप्तमी को मां कालरात्रि की पूजा होती हैं। नवरात्री की सप्तमी तिथि को भक्तो को नीले वस्त्र धारण करके माँ काल रात्रि की पूजा करनी चाहिए ।

13 अक्टूबर बुधवार –   नवरात्र navratr के आठवें  दिन यानि अष्टमी को मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा होती हैं। नवरात्री की अष्टमी तिथि को भक्तो गुलाबी वस्त्र धारण करने चाहिए । एवं

14 अक्टूबर गुरुवार  –  नवरात्र navratr के नौवे दिन यानि नवमी को मां सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती हैं। नवरात्री के नौवें दिन भक्तो को मां सिद्धि दात्री की पूजा करते समय बैगनी अर्थात पर्पल रंग के कपड़े पहनना शुभ माना गया है ।

15 अक्टूबर शुक्रवार को विजयदशमी का पर्व मनाया जायेगा ।

नवरात्री Navratri के 9 दिनों के पर्व को 3-3-3 दिनों में बांटा गया है।

प्रथम 3 दिन भक्त माँ दुर्गा की आराधना  तमस को जीतने के लिए अर्थात अपने अंदर उपस्थित बुराइयों, अपने विघ्न- बाधाओं, अपने रोगो, अपने पापो तथा शत्रुओं के नाश के लिए करते है ।

बीच के तीन दिन में भक्त धन की देवी माँ लक्ष्मी की आराधना  रजस को जीतने के लिए अर्थात सभी भौतिक इच्छाओं, धन, सुख समृद्धि और ऐश्वर्य प्राप्त करने के लिए करते है ।

तथा अंतिम तीन दिन में भक्त विध्या की देवी माँ सरस्वती की आराधना  सत्व को जीतने के लिए अर्थात आध्यात्मिक ज्ञान, विद्या, ज्ञान, वाकपटुता, कौशल प्राप्त करने के लिए करते है ।

” प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्माचारिणी।
 तृतीय चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेति चतुर्थकम्।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रि महागौरीति चाऽष्टम्।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः। “

नवरात्री में माँ दुर्गा के पूजन की सभी सामग्री यथासंभव नवरात्री से दो दिन पहले खरीद लेनी चाहिए, अमावस्या को पूजन सामग्री खरीदने से बचना चाहिए।

वर्ष 2021 में शरद नवरात्री के प्रथम दिन मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आएगी।

शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक वर्ष नवरात्री में माँ दुर्गा का अलग अलग वाहनों पर आगमन होता है । माँ के हर वाहन का अलग अलग महत्त्व होता है ।

यदि नवरात्री रविवार या सोमवार से प्रारम्भ होते है तो इसका अर्थ है कि माता का आगमन हाथी पर होगा ।

अगर मंगलवार और शनिवार को नवरात्री शुरू होते है तो मां का आगमन घोड़े पर होता है ।

इसी प्रकार बुधवार के दिन नवरात्री का आरम्भ होने पर माता धरती पर नाव पर सवार होकर आती है और यदि,

नवरात्र गुरुवार या शुक्रवार को शुरू होते है तो इसका अर्थ है कि माता डोली पर सवार होकर आएगी ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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