Wednesday, April 14, 2021
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navratri kab se hai, नवरात्री कब से है,

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नवरात्री Navratri से नौ विशेष रात्रियां का बोध होता है। “रात्रि”  सिद्धि का प्रतीक मानी गयी है। नवरात्र Navratr  में माँ शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है। भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों ने दिन की अपेक्षा रात्रि को अधिक महत्व दिया है। इसी कारण होली, दीवाली, शिवरात्रि एवं नवरात्री आदि पर्वों को रात में ही मनाने की परंपरा है,  जानिए नवरात्री का महत्व, navratri ka mahtv, चैत्र नवरात्र का महत्व, Chaitra navratri ka  mahatv  ।

 प्रत्येक वर्ष में दो बार नवरात्री Navratri का पवित्र पर्व आता है। नवरात्रों Navratro  में माता दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है। नवरात्री का प्रथम पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है, इन्हे चैत्र के नवरात्रे कहते है ।

नवरात्री Navratri  का दितीय पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है। दोनों ही नवरात्रों Navratro में देवी का पूजन किया जाता है, इन्हे शारदीय नवरात्रे कहते है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के नवरात्रों Navratro के बाद विजय दशमी का पर्व मनाया जाता है। दोनों ही नवरात्रों Navratro में देवी का पूजन करने की विधि लगभग एक समान रहती है।

 इसके अलावा भी वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्रे भी आते है।  पहला गुप्त नवरात्रा आषाढ मास के शुक्ल पक्ष में व दुसरा गुप्त नवरात्रा माघ मास के शुक्ल पक्ष में आता है।
आषाढ और माघ मास में आने वाले इन नवरात्रों Navratro को साधना सिद्धि ,गुप्त विधाओं की प्राप्ति के लिये प्रयोग किया जाता है।
इस वर्ष 2021 में चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल मंगलवार से शुरू होकर 21 अप्रैल दिन बुधवार तक रहेंगे।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी 12 अप्रैल सुबह 8.01 बजे

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि समाप्त होगी 13 अप्रेल सुबह 10.28 बजे

कब से है नवरात्री, kab se hai navratri,

13 अप्रैल मंगलवार  –  प्रतिपदा नवरात्र navratr का पहले दिन प्रतिपदा को माँ  शैलपुत्री की आराधना होती हैं।

14 अप्रैल बुधवार   – द्वितीया  नवरात्र navratr का दूसरा दिन  द्वितीया को माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना होती हैं।

15 अप्रैल गुरुवार –  तृतीया  नवरात्र navratr के तीसरे दिन तृतीया को देवी चन्द्रघंटा की पूजा की जाती हैं।

16 अप्रैल शुक्रवार  –  चतुर्थी   नवऱात्र navratr के चौथे दिन चतुर्थी को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा की पूजा होती हैं।

17 अप्रैल शनिवार –  पंचमी नवरात्र के पाँचवे दिन पंचमी को माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है।

18 अप्रैल रविवार –  षष्टी  नवरात्र navratr के छठे दिन षष्टी को माँ दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती हैं।

19 अप्रैल सोमवार  – नवरात्र navratr के सातवें दिन यानि सप्तमी को मां कालरात्रि की पूजा होती हैं।

20 अप्रैल मंगलवार –   नवरात्र navratr के आठवें  दिन यानि अष्टमी को मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा होती हैं। एवं

21 अप्रैल बुधवार  –  नवरात्र navratr के नौवे दिन यानि नवमी को मां सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती हैं।

21 अप्रैल बुधवार को राम नवमी का पर्व मनाया जायेगा ।

नवरात्री Navratri के 9 दिनों के पर्व को 3-3-3 दिनों में बांटा गया है।

प्रथम 3 दिन भक्त माँ दुर्गा की आराधना  तमस को जीतने के लिए अर्थात अपने अंदर उपस्थित बुराइयों, अपने विघ्न- बाधाओं, अपने रोगो, अपने पापो तथा शत्रुओं के नाश के लिए करते है ।

बीच के तीन दिन में भक्त धन की देवी माँ लक्ष्मी की आराधना  रजस को जीतने के लिए अर्थात सभी भौतिक इच्छाओं, धन, सुख समृद्धि और ऐश्वर्य प्राप्त करने के लिए करते है ।

तथा अंतिम तीन दिन में भक्त विध्या की देवी माँ सरस्वती की आराधना  सत्व को जीतने के लिए अर्थात आध्यात्मिक ज्ञान, विद्या, ज्ञान, वाकपटुता, कौशल प्राप्त करने के लिए करते है ।

नवरात्रि navratri में माँ नौ शक्तियों की पूजा अलग-अलग दिन में की जाती है। पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरुप की आराधना की जाती है।
उसके बाद क्रमश: माँ श्री ब्रह्मचारिणी, माँ श्री चंद्रघंटा, माँ श्री कुष्मांडा, माँ श्री स्कंदमाता, माँ श्री कात्यायनी, माँ श्री कालरात्रि, माँ श्री महागौरी, माँ श्री सिद्धिदात्री का पूजन पूर्ण विधि विधान से किया जाता है, माँ के इन्ही के स्वरुपो को नवदुर्गा कहते हैं।

” प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्माचारिणी।
 तृतीय चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेति चतुर्थकम्।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रि महागौरीति चाऽष्टम्।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिताः। “

नवरात्री में माँ दुर्गा के पूजन की सभी सामग्री यथासंभव नवरात्री से दो दिन पहले खरीद लेनी चाहिए, अमावस्या को पूजन सामग्री खरीदने से बचना चाहिए।

वर्ष 202 में नवरात्री के प्रथम दिन 13 अप्रैल मंगलवार को माँ दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आने वाली है। देवी भागवत के अनुसार जब नवरात्री में माँ दुर्गा घोड़े की सवारी पर आती है तब युद्ध, आंधी तूफान, देश की राजनीती में उथल पुथल होती है।
शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक वर्ष नवरात्री में माँ दुर्गा का अलग अलग वाहनों पर आगमन होता है । माँ के हर वाहन का अलग अलग महत्त्व होता है ।

यदि नवरात्री रविवार या सोमवार से प्रारम्भ होते है तो इसका अर्थ है कि माता का आगमन हाथी पर होगा ।
अगर मंगलवार और शनिवार को नवरात्री शुरू होते है तो मां का आगमन घोड़े पर होता है ।
इसी प्रकार बुधवार के दिन नवरात्री का आरम्भ होने पर माता धरती पर नाव पर सवार होकर आती है और यदि,
नवरात्र गुरुवार या शुक्रवार को शुरू होते है तो इसका अर्थ है कि माता डोली पर सवार होकर आएगी ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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