Friday, October 23, 2020
Home Hindi ग्रहो के उपाय शनि देव के उपाय | शनि देव को कैसे प्रसन्न करें

शनि देव के उपाय | शनि देव को कैसे प्रसन्न करें

 शनि अमावस्या, शनि देव को कैसे प्रसन्न करें 
 Shani Amavasya, Shani Dev ko Prassan kaise Karen 

  • शुक्रवार 22 मई को शनि जयंती है । ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर ग्रहों में न्यायाधीश सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था ।
  • शनि जयंती 2020 पर इस साल ग्रहों का विशेष, दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, इस दिन शनि की स्वराशि मकर में एक साथ तीन ग्रह गुरु और चंद्रमा की युति बन रही है। ग्रहों का ऐसा कल्याणकारी संयोग बहुत समय बाद बना है।
  •  शनि देव Shani Dev को न्याय का देवता कहा गया है जो मनुष्यों को उनके कर्मो के अनुसार फल देते है। जीवन में किसी भी तरह के सुखो की प्राप्ति हेतु शनि देव को अपने अनुकूल करना उनकी कृपा प्राप्त करना परम आवश्यक है।
  •  शास्त्रों के अनुसार शनि देव की कृपा प्राप्त करके सभी मनोरथो को अवश्य सिद्द किया जा सकता है।
  •  शनिदेव को परमपिता परमात्मा के जगदाधार स्वरूप कच्छप का ग्रहावतार और कूर्मावतार भी कहा गया है।
  •  वह महर्षि कश्यप के पुत्र सूर्यदेव की संतान हैं। उनकी माता का नाम छाया है।
  •  इनके भाई मनु सावर्णि, यमराज, अश्वनी कुमार जी है और शनि देव की बहन का नाम यमुना और भद्रा है।
  •  उनके गुरु शिवजी हैं और उनके मित्र हैं काल भैरव, हनुमान जी, बुध और राहु ।
  •  शनि न्याय के देवता है जो यदि शनिदेव बुरे कर्मो का दण्ड देते हैं तो शुभ कामों से कृपा भी बरसाते हैं। शास्त्रों में शनि के दस अति पुण्य प्रदान करने वाले नामों का वर्णन है, जिनका स्मरण,जप करने से ही सभी बड़े से बड़ा सकंट कैसे भी दु:खों का नाश होता है।
  • विशेषकर शनिवार को तो शनि देव के वह दस कल्याणकारी नमो का अवश्य ही उच्चारण करना चाहिए यदि पीपल के पेड़ के नीचे इन नामो का जाप किया जाय तो शनि देव अति प्रसन्न होते है। शनि देव के 10 नाम है :—–
  • कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मन्द, पिप्पलाश्रय
  •  ज्यातिष शास्त्रों में सूर्य पुत्र शनि देव को कठोर एवं क्रूर ग्रह बताया गया है जिनकी दशा में समान्यता जातक को कष्ट उठाने पड़ते है । लेकिन इनसे हमेंशा अशुभ परिणाम ही नहीं मिलते हैं। शनि ग्रह से सम्बन्धित फलादेश देखते समय यह अवश्य ही देखना चाहिए कि क्या साढ़े साती सचमुच अशुभ फलदायी है।
  •  यदि शनि प्रतिकूल हो तो यहाँ बताये जा रहे उपायों को करें, अपना चरित्र उत्तम बनाए रखे धैर्य का साथ ना छोड़े, बड़े बुजुर्गो और स्त्रियों को पूर्ण सम्मान दें तो शनि की दशा आसानी से कट जाती है ।

  • जब किसी जातक को शनि देव की कृपा प्राप्त होती है तो उसका भाग्य जागृत हो जाता है। शनि देव में रंक को राजा बनाने की शक्ति है ।
  •  शनिवार के दिन शनि भगवान की विधि पूर्वक पूजा करने से शनि महाराज प्रसन्न होते है। अगर कुंडली में शनि की दशा, या किसी भी ग्रह की दशा खराब चल रही है तो भी इस दिन उनकी आराधना करने से अशुभ ग्रहो के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
  • शनिवार के दिन मंदिर में शनि देवता के दर्शन अवश्य करें लेकिन ध्यान रहे कि उनकी आँखो में झाँकने की गलती भूल कर भी ना करें |
  •  शनि देव को काला / नीला रंग अति प्रिय है। शनिवार के दिन सांय काल शनि मंदिर में शनि देव पर काला वस्त्र और सुरमा अवश्य ही चढाएं।
  •  शनिवार के दिन शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं, सांय काल प्रदोष काल में ( 6 बजे से 8 बजे के बीच ) पीपल पर भी दीपक अवश्य ही जलाएं ।
  •  शनि देव पर कड़वा तेल ( सरसो का तेल ) काले उड़द, काले तिल, लोहा, गुड़ एवं नीले या काले पुष्पों चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते है ।
  •  कोई भी पूजा बिना प्रशाद के पूरी नहीं होती है , शनिवार के दिन शनि देव को प्रसाद के रूप में श्री फल / नारियल , इमरती या तेल से बनी वस्तुएं के साथ अन्य फल चढ़ाएं, इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है, कार्यो से अड़चने दूर होती है, आर्थिक हानि हो रही हो तो बंद होती है।
  •  शनि की साढ़े के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए नित्य हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए।
  •  शनिवार के दिन नंगे पैर हनुमान मंदिर जाएॅ और वहाँ पर जाकर अपने माथे पर उनके चरणो का सिंदूर लगाएॅ।
  •  शनि की दशा में शुभ फलों की प्राप्ति हेतु काले घोड़े की नाल की अंगूठी बनाकर उसे दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में पहनना चाहिए।
  •  शनिवार के दिन शनि देव के मंदिर में सरसों का तेल और तांबा चढ़ाना चाहिए।
  •  शनिवार के दिन लोहे के बर्तन में कड़वा तेल डालकर उसमें एक रूपया डालकर अपना चेहरा देखते हुए शनि का दान लेने वाले को दान दें ।
  •  शनि दशा में महामृत्युंजय मंत्र का जाप रोज 108 बार करें। अथवा कम से कम 21 बार तो जरुर करें।
  •  हर सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाते हुए काले तिल चढ़ाएं ।
  •  शनि की दशा में रात्रि के समय कुत्ते को दूध पिलाएॅ, लेकिन स्वयं न पीएॅ।
  •  शनि की दशा में शराब, माँस, मछली अण्डे आदि का सेवन न करें।
  •  नित्य अपनी थाली के भोजन मे से एक रोटी अलग करके उसके तीन हिस्से करके , एक गाय , एक कुत्ते और एक कौओं को खिलाएॅ।

  • Published By : Memory Museum
  • Updated On : 2020-06-03 08:35:55 PM

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Purnima ke achuk upay totke, पूर्णिमा के अचूक उपाय टोटके,

Purnima ke achuk upay totke, पूर्णिमा के अचूक उपाय टोटके,Purnima ke achuk upay totke, पूर्णिमा के...

पितरों के दान, Pitron ke daan,

पितृ पक्ष में क्या दान करें, Pitra Paksh Me Kya Daan Karen,हिन्दू धर्म में दान को बहुत...

सर्दियों के आहार | Sardiyo ke aahar

खाना-पीना हमेशा मौसम के अनुसार हो तो शरीर के लिए अत्यंत फायदेमंद रहता है। सर्दियों का मौसम सेहत बनाने का होता है।...

राशिनुसार रोग निवारण के उपाय

राशिनुसार रोग निवारण के उपायदोस्तों स्रष्टि के प्रारम्भ से ही मनुष्य किसी ना रोगो बिमारियों से ग्रसित...
Translate »