Sunday, September 12, 2021
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सुबह स्नान से लाभ, subah snan se labh,

सुबह स्नान से लाभ, subah snan se labh,

प्रतिदिन स्नान स्वस्थ, सुंदर शरीर और अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। जो लोग रोज़ नहाते हैं, उन्हें स्वास्थ्य की दृष्टि से कई लाभ प्राप्त होते हैं। सुबह स्नान से लाभ, subah snan se labh, बहुत अधिक है, सुबह स्नान से जहां थकान और तनाव घटता है वहीं मन प्रसंन्न और शरीर भी ऊर्जावान रहता है। हमारे शास्त्रों और आयुर्वेद में बहुत अधिक सुबह स्नान से लाभ, subah snan se labh, बताए गए हैं।

यदि हम सूर्योदय के समय या उससे पहले स्नान करते हैं तो यह धर्म की नजरिए से बहुत शुभ होता है। पुराने समय में विद्वान और ऋषि-मुनि सूर्योदय से पूर्व या ठीक सूर्योदय के समय स्नान करते थे और सुबह स्नान, subah snan के बाद भगवान सूर्य को अर्ध्य अर्पित करते थे। इस प्रकार की गई दिन की शुरुआत से पूरे दिन कार्यों में सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

सुबह स्नान से लाभ, subha snan se labh,

नित्य सूर्योदय से पूर्व पूर्व तारों की छावं में स्नान करने से निसंदेह ही माँ लक्ष्मी की कृपा, तेज बुद्धि और चमकती दमकती त्वचा प्राप्त होती है । इस समय स्नान करने से अनेकों परेशानियों और ग्रहों के दुष्प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है। स्नान करते समय गुरू मंत्र, स्तोत्र, कीर्तन, भजन या भगवान के नाम का जाप करें ऐसा करने से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है।

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स्नान करते समय सर्वप्रथम सिर पर पानी डालना चाहिए बाद में पूरे शरीर पर। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। ऐसे स्नान करने से सिर और शरीर की गर्मी पैरों के माध्यम से निकल जाती है।

स्नान करते समय शरीर के गले से नीचे के भाग पर गुनगुने पानी से स्नान करने से बल पौरष बढ़ता है, किंतु सिर पर गर्म पानी ना डालें । सर पर गर्म पानी डालने से बालों तथा आँखों को हानि पहुँचती है। (बृहद वाग्भट, सूत्रस्थानः अ.3)

स्नान करते समय अपने मुँह में पानी भरकर आँखों को पानी से भरी बाल्टी / टब / पात्र में डुबायें एवं उसी में थोड़ी देर तक पलके झपकायें अथवा मुँह पर पानी भरकर आँखों पर पानी के छींटे मारें। इससे आँखों की रौशनी तेज होती है।

कभी भी स्नान करते समय बिलकुल निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करना चाहिए, इससे पुण्य क्षीण होते है और जल देवता का निरादर भी होता है। स्नान करने के बाद किसी साफ सूखे सूती वस्त्र / तौलिये से अपना बदन रगड़ रगड़ कर पौंछिये फिर उसे कमर में बाँध कर कमर का अंतिम वस्त्र उतारना चाहिए ।
अगर अपने अंग वस्त्र को स्वयं धोना हो तो उसे धो कर अपने हाथ अच्छी तरह से धो लें और अपने सर, शरीर पर पुन: पानी के छीटें मारने चाहिए ।

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नहाने के तुरंत बाद प्रतिदिन सूर्य को जल अवश्य ही अर्पित करना चाहिए। सूर्य देव को नित्य जल चढ़ाने से जातक को मान-सम्मान, सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
सूर्य देव को जल चढ़ाते हुए पानी के बीच से भगवान सूर्य को देखना चाहिए इससे हमारी आँखों की रौशनी बढ़ती है।
सूर्य की किरणों में विटामिन डी के भी कई गुण होते है इससे व्यक्ति की त्वचा में भी एक आकर्षक चमक आती है।

शास्त्रों में समय अनुसार स्नान के कई प्रकार और नहाने की एक विशेष विधि भी बताई गई है। यदि मनुष्य इस विधि से सही समय पर नहाए तो चमत्कारिक रूप से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं।

ब्रह्म स्नान- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का अति विशेष महत्व है । ब्रह्म मुहूर्त में अर्थात सुबह सुबह लगभग 4-5 बजे जो स्नान भगवान का मनन चिंतन करते हुए, विभिन्न मन्त्रों का जाप करते हुए किया जाता है, उसे ब्रह्म स्नान कहते हैं।माना जाता है कि इस समय जल में सारे देवता वा तीर्थ वास करते है इसलिए इस समय स्नान करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है।ऐसा स्नान करने वाले व्यक्त्ति को ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी संकट दूर रहते है।

देव स्नान – वर्तमान समय में अधिकतर लोग सूर्योदय के बाद ही स्नान करते हैं। जो लोग सूर्योदय के तुरंत बाद किसी नदी में या घर पर ही विभिन्न नदियों के नामों का, विभिन्न मंत्रों का जप करते हुए स्नान करते हैं तो उस स्नान को देव स्नान कहते है। ऐसे स्नान से निश्चित ही व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

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ऋषि स्नान – यदि कोई व्यक्ति सुबह-सुबह, जब आकाश में तारे दिखाई दे रहे हों और उस समय ईश्वर के ध्यान करते हुए स्नान करें तो उस स्नान को ऋषि स्नान कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय से पूर्व किए जाने वाले सभी स्नान श्रेष्ठ होते हैं।

दानव स्नान-आज के युग में बहुत से लोग सूर्योदय के बाद चाय-नाश्ता करके खा पी के बाद स्नान करते हैं, ऐसे स्नान को दानव स्नान कहते है। ऐसे स्नान करने वाले व्यक्तियों को जीवन में बहुत अस्थिरताओं का सामना करना पड़ता, उनके दिमाग में बहुत परेशानियाँ, तनाव रहता है । शास्त्रों के अनुसार हमें ब्रह्म स्नान, देव स्नान या ऋषि स्नान ही करना चाहिए। यही स्नान ही सर्वश्रेष्ठ स्नान कहे गए हैं।

यह भी ध्यान रखें कि शाम या रात के समय स्नान नहीं करना चाहिए। इससे दरिद्रता आती है, लेकिन यदि सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण का दिन हो तो उस स्थिति में रात के समय स्नान किया जा सकता है।

तांत्रिक स्नान, Tantrik snan,

1. कई बार किसी बुरी नजर के दोष या कुंडली में किसी ग्रह दोष की वजह से हमें चाहकर भी अपने कार्यों में सफलता नहीं मिल पाती है। लेकिन यदि आप नहाते समय एक छोटा उपाय किया करें तो आपकी रुकावटों विशेषकर आर्थिक स्थिति में रुकावटें समाप्त होती जाती हैं।

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इस उपाय से बुरी नजर के दोष और कुंडली के दोषों में भी राहत मिलती है बस आपको करना यह है कि नहाते समय अपनी इंडेक्स फिंगर यानी तर्जनी अंगुली जो अँगूठे के पास वाली होती है उससे नहाने के पानी पर त्रिभुज का निशान बनाएं। इसके बाद एक अक्षर का बीज मंत्र ‘ह्रीं’ को उस त्रिभुज के अंदर लिखें। फिर उस पानी से स्नान करें ।

इसे प्रतिदिन नहाने से पहले करें और इस संबंध में किसी प्रकार की शंका या संदेह ना रखे वरना यह उपाय निष्फल हो जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार यह उपाय बहुत जल्दी असर दिखाने वाले होते हैं। इस उपाय से आपके आसपास की नकारात्मक शक्तियां निष्क्रीय हो जाती हैं और यदि आपके ऊपर किसी की बुरी नजर है तो वह भी उतर जाती है।

इस उपाय के साथ ही किसी भी देवी-देवताओं के नामों का या उनके मंत्रों का उच्चारण भी करते रहना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार यदि यह उपाय प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में किया जाय तो श्रेष्ठ फल मिलता है।

यदि कोई व्यक्ति किसी नदी या तालाब में स्नान करता है तो उसे पानी पर ऊँ लिखकर उस पानी में तुरंत डुबकी मार लेना चाहिए। इस उपाय से भी स्नान का अधिक पुण्य प्राप्त होता है और आसपास की नेगेटिव एनर्जी भी समाप्त हो जाती है।

2. यदि जीवन में आर्थिक संकट बने रहते हो, बनता हुआ काम बिगड़ जाता हो , घर में दरिद्रता का वास हो तो किसी भी शुभ दिन से शुरू करते हुए नित्य ब्रह्म मुहूर्त में एक पानी भरे घड़े / बाल्टी में राई के पत्ते डालकर इस जल को अभिमंत्रित करके उत्तर दिशा की ओर मुँह करके स्नान करें इससे दरिद्रता और रोग दोनों ही शीघ्र नष्ट हो जाते हैं।

स्नान करते समय अपने इष्ट देव का स्मरण अथवा किसी भी मन्त्र का जाप अवश्य ही करते रहे ।

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