Wednesday, April 14, 2021
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सूर्य ग्रहण के उपाय, Sury Grahan Ke Upay,

सूर्य ग्रहण के उपाय, Sury Grahan Ke Upay,

14 दिसंबर, सोमवार को सूर्य ग्रहण लग रहा है। सूर्य ग्रहण के उपाय, sury grahan ke upay बहुत ही सिद्ध माने गए है । ज्‍योतिष गणना के अनुसार यह ग्रहण देश व दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ग्रहण के बारे में हमारे ऋषि मुनियों को वैदिक काल से ही जानकारी थी ऋग्वेद के अनुसार महर्षि अत्रिमुनि ग्रहण के ज्ञान को देने वाले प्रथम आचार्य थे।
वैदिक काल से ही ग्रहण पर अध्ययन और परीक्षण होते चले आए हैं। ग्रहण के विषय में हमारे धार्मिक एवं ज्योतिषीय ग्रन्थों में बहुत सी जगह उल्लेख्य मिलता है ।
कुण्डली, हस्त रेखा, वास्तु एवं प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य डॉ० अमित कुमार द्धिवेदी जी से जानिए, सूर्य ग्रहण के उपाय, sury grahan ke upay

14 दिसंबर साल 2020 का अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा। यह खंडग्रास सूर्यग्रहण है, इस ग्रहण काल में सूर्य आंशिक रूप से ढका हुआ रहेगा। यह खंडग्रास सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार शाम 7.04 बजे से आरंभ होकर मध्य रात्रि 12.23 तक रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस सूर्य ग्रहण का असर भारत पर सीधा नहीं पड़ेगा।

इस ग्रहण का मध्यकाल 09.45 बजे है वहीं, मोक्ष काल अर्थात ग्रहण की समाप्ति मध्य रात्री 12.23 बजे होगी। इस खंडग्रास सूर्य ग्रहण का असर प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका में पड़ेगा।
हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में नज़र नहीं आएगा लेकिन ग्रहण काल में कुछ सावधानियाँ अवश्य ही रखनी चाहिए।

ग्रहण काल में भूल कर भी शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। ज्‍योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण विश्व के किसी भी कोने में क्यों ना हो ग्रहण काल में जप तप का अक्षय पुण्य मिलता है ।

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मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से वातावरण अशांत और दूषित होता है। जिसका मनुष्यों, जीव जंतुओ और प्रकृति पर नकारात्मक असर दिखाई पड़ता है।

चूँकि यह ग्रहण मार्गशीर्ष की अमावस्या पर पड़ रहा है और इस अमावस्या के दिन दान और पूर्वजों की शांति के लिए तर्पण और गंगा स्नान का विशेष महत्व है।

सूर्य ग्रहण के उपाय, Sury Grahan Ke Upay,


ग्रहण के समय पवित्र नदियों, सरोवरों में स्नान करना से बहुत पुण्य मिलता है लेकिन ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार ग्रहण ( grahan ) के समय गायों को हरा चारा या घास, चींटियों को पंजीरी या चीनी मिला हुआ आटा, पक्षियों को अनाज एवं निर्धन, असहायों को वस्त्रदान से बहुत ज्यादा पुण्य प्राप्त होता है।

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सूर्यग्रहण (Surya Grahan) के सूतक और ग्रहण काल में स्नान, दान, जप, तप, पूजा पाठ, मन्त्र, तीर्थ स्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कार्यो का करना बहुत लाभकारी रहता है। ज्ञानी लोग इस समय का अवश्य ही लाभ उठाते है ।

वेदव्यास जी ने कहा है कि –

सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया जप , तप, ध्यान, दान आदि एक लाख गुना और

सूर्य ग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। और

यदि यह गंगा नदी / या किसी पवित्र नदी के किनारे किया जाय तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और

सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।

सूर्य ग्रहण ( surya grahan ) के दिन जलाशयों, नदियों व मन्दिरों में राहू, केतु व सुर्य के मंत्र का जप करने से सिद्धि प्राप्त होती है और ग्रहों का दुष्प्रभाव भी खत्म हो जाता है ।

ज्योतिषाचार्य डॉ० अमित कुमार द्धिवेदी जी के अनुसार सूर्य ग्रहण के समय सूर्य देव का मन्त्र

“ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ “॥ और

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मन्त्र का जाप अवश्य ही करना चाहिए ।

यदि कोई श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी के रस / पाक का स्पर्श करके ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहण की समाप्ति के बाद शुद्ध होकर उस रस को पी ले तो उसकी बुद्धि अत्यंत प्रखर हो जाती है वह भाषा, कविता, लेखन और वाक् पटुता में अत्यंत प्रवीण हो जाता है ।

डॉ० अमित कुमार द्धिवेदी जी कहते है ग्रहण की अवधि में गर्भवती का ‘संतान गोपाल मंत्र’ का जाप करना अति उत्तम माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र के जाप से गर्भवती को गुणवान पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।

देवकीसुत गोविंद, वासुदेव जगत्पते,
देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं भजे।
देव देव जगन्नाथ गोत्रवृद्धिकरं प्रभो,
देहि में तनयं शीघ्रं, आयुष्मन्तं यशस्विनम्।।
इसका अर्थ है, जगत्पति हे भगवान कृष्ण! मैं आपकी ही शरण में हूं। हे जगन्नाथ, मुझे मेरे गोत्र की वृद्धि करने वाला और यशस्वी पुत्र प्रदान कीजिए।

शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के स्पर्श के समय में स्नान, मध्य के समय में देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए।

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सूर्य ग्रहण के दिन ग्रहण के पूर्ण होने पर सूर्य देव का शुद्ध बिम्ब देखकर ही भोजन करना श्रेष्ठ और पुण्यदायक माना जाता है ।

शास्त्रों के अनुसार सूर्यग्रहण ( Surya grahan ) में ग्रहण से चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। लेकिन बालक, बूढ़े, और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक भोजन कर सकते हैं।

चूँकि सूर्यग्रहण में 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है और सूतक काल में देव दर्शन वर्जित माने गये हैं इसीलिए सूर्यग्रहण ( Surya grahan ) में मन्दिरों के कपाट भी बन्द कर दिये जाते हैं ।

सूर्यग्रहण ( Surya grahan ) या चन्द्रग्रहण के समय तो भोजन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए । शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के समय मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक उसे नरक में वास करता है। फिर वह मनुष्य उदर रोग से पीड़ित होता है फिर काना, दंतहीन होकर उसे अनेक रोगो से पीड़ा मिलती है।

किसी भी ग्रहण पर चाहे वह चन्द्रग्रहण हो या सूर्यग्रहण ( Surya grahan ) पर किसी भी दूसरे व्यक्ति का अन्न नहीं खाना चाहिए । स्कन्द पुराण के अनुसार अनुसार यदि ग्रहण के दिन किसी दूसरे का अन्न खाये तो बारह वर्षों से एकत्र किया हुआ सम्पूर्ण पुण्य नष्ट हो जाता है।

डॉ० अमित कुमार द्धिवेदी जी का कहना है कि ग्रहण ( grahan ) के दौरान भगवान की मूर्ति को छूना, धूप बत्ती जलाकर पूजा करना, भोजन पकाना, खाना – पीना, खरीददारी करना, सोना, कामवासना आदि का त्याग करना चाहिए। ग्रहण के समय भोजन व पानी में दूर्वा या तुलसी के पत्ते डाल कर रखना चाहिए। ग्रहण के पश्चात पूरे घर की शुद्धि एवं स्नान कर दान देना चाहिए।

शास्त्रो के अनुसार ग्रहण लगने से जिन पदार्थों में तुलसी या कुश की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं माना जाते है । लेकिन पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना ही धर्म और स्वास्थ्य की दृष्टि से श्रेष्ठ होता है ।

Amit Pandit ji
ज्योतिषाचार्य डॉ० अमित कुमार द्धिवेदी
कुण्डली, हस्त रेखा, वास्तु
एवं प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ

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