Thursday, September 17, 2020
Home पितृ पक्ष तर्पण का महत्व, tarpan ka mahtv,

तर्पण का महत्व, tarpan ka mahtv,

पितरो का तर्पण कैसे करें, Pitron ka tarpan kaise karen

हिन्दू धर्म में श्राद्ध पक्ष में तर्पण का महत्व / tarpan ka mahtv, बहुत अधिक है। हमारे पितृ अपने वंशजो से अपने निमित तर्पण और श्राद्ध के अपेक्षा रखते है। तर्पण से हमारे पितृ जल और तिल पाकर तृप्त / प्रसन्न होकर करने वाले को आशीर्वाद देते है।

हिन्दु धर्म शास्त्रों में- वसु, आदित्य और रुद्र इन तीन देवताओं को क्रमशः पितृ, पितामह और प्रपितामह का पोषण प्रतिनिधि माना है। हमारे विवाह में भी गात्रोच्चारण में पितृ, पितामह, प्रपितामह इन तीनों का ही उल्लेख होता है।

येन पितुः पितरो ये पितामहास्तेभ्यः पितृभ्योनमसा विधेम।

अर्थात्‌ पितृ, पितामह, प्रपितामाहों को हम श्राद्ध से तृप्त करते हैं।
त्रयाणामुदकं कार्य त्रिषु पिंडः प्रवर्तते।
चतुर्थः सम्प्रदातैषां पंचमो नापि विद्यते॥
अर्थात्‌ पिता, पितामह और प्रपितामह इन तीनों का श्राद्ध Shradh, तर्पण Tarpan, पिंडदान Pind Daan होता है। चौथा श्राद्धकर्ता स्वयं यजमान होता है, और यहाँ पर पाँचवें की कोई सम्भावना ही नहीं है।

तिल और पानी की जलांजली के माध्यम से हम अपने पित्रों को संतुष्ट करते हुए उनको और ऊंचे स्तर पर पहुंचा सकते हैं।

तर्पण का महत्व, tarpan ka mahtv,

* तर्पण Tarpan में हम उन्हें मंत्रों के साथ पानी और तिल की पेशकश करते हैं तर्पण Tarpan जो उन्हें बहुत पसंद है और वह शीघ्रता से प्रसन्न हो जाते है ।
महाभारत,आदि पर्व, 74.39 मे लिखा है।

पुन्नाम्नॊ नरकादयस्मात्पितरम् त्रायते सुत:
तस्मात्पुत्र इति प्रॊक्त: स्वयमॆव स्वयम्भुवा
बेटा पिता को पुत नाम का नरक से बचाता है,इसलिए उसे स्वयंभु भगवान ने पुत्र नाम रखा था।

* हमारे पूर्वजों की मौत के बाद हमें उनकी आगे की यात्रा के बारे में कुछ भी पता नहीं होता है, वे कहाँ, किस रूप में है, उन्होंने जन्म लिया है या नहीं, जन्म लिए है तो कहाँ किसी को कुछ भी पता नहीं होता है, लेकिन यह हमारा कर्तव्य है की हम उन्हें जीवित भी खुश रखें और उनकी मृत्यु के बाद भी।

* पितृ तर्पण Pitra Tarpan एक अद्भुत मौका है जिसमें देवताओं, हमारे आदि पितृ वसु, रुद्र और आदित्य, चाहे हमारे पितृ किधर भी किसी भी रूप में हो, उनको सूक्ष्म माध्यम से हमारे जल और तिल को पित्रों के पास उत्तम रूप मे पहुंचा देते हैं।

* चूँकि पितरों को भी पोषण की जरूरत है। इसलिए जब हम उनको तर्पण Tarpan देते हैं,वे संतुष्ट हो जाते हैं और हमें सुख, दौलत और सत संतति की आशीर्वाद देते हैं। और जब वे अच्छाई करते हैं,तब उसके हिसाब से उनको भी ऊंचाई मिल जाती है।

* सुबह तर्पण Tarpan करने से पहले कुछ भी नहीं खाना चाहिए।

* प्रतिदिन तर्पण के दिन की सुबह में गीले किए हुये और सूखे धोती / कपड़ा पहनना चाहिए. यदि संभव हो तो पिछली रात मे धोती को धो के एक स्थान पर लटकाए जिधर कोई नहीं छुए।

* तर्पण करने से व्यक्ति के जन्म के आरंभ से तर्पण Tarpan के दिन तक जाने अनजाने किए गए पाप उसी समय नष्ट हो जाते हैं।

* “समयानुसार श्राद्ध Shradh, तर्पण Tarpan करने से कुल में कोई दुःखी नहीं रहता। पितरों की पूजा Pitron Ki Puja करके मनुष्य आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, श्री, पशु, सुख और धन-धान्य प्राप्त करता है। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्त्व है। देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी है।”

* पितृपक्ष Pitra Paksh में तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष के तथा तीन पीढ़ियों तक के माता पक्ष के पूर्वजों के लिए तर्पण Tarpan किया जाता हैं।

* तर्पण Tarpan करते समय एक पीतल के बर्तन में जल में गंगाजल, कच्चा दूध, तिल, जौ, तुलसी के पत्ते, दूब, शहद और सफेद फूल आदि डाल कर फिर एक लोटे से पहले देवताओं, फिर ऋषियों, और सबसे बाद में पितरों का तर्पण Pitron ka Tarpan करना चाहिए।

* कुश तथा काला तिल भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुए हैं तथा चांदी भगवान शिव के नेत्रों से प्रकट हुई हैं। गाय का दूध और गंगाजल का प्रयोग श्राद्ध के कर्मफल को कई गुना तक बढ़ा देता है। तुलसी बहुत ही पवित्र मानी जाती है अत: इसके प्रयोग से पितृ अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

* तर्पण Tarpan में कुशा (पवित्री) का प्रयोग अनिवार्य है। दो कुशा से बनाई हुई पवित्री (अंगूठी) दा‍हिने हाथ की अनामिका अंगुली तथा तीन कुशाओं से मिलाकर बनाई गई पवित्री बाईं अनामिका में धारण करें, यह आप खुद भी बना सकते या बाज़ार में किसी भी पूजा की दुकान में मिल जाता है।

* पितरों के तर्पण Pitron Ke Tarpan में सोना-चांदी, कांसा या तांबे के पात्र का ही उपयोग करना चाहिए। लेकिन लौह के पात्र अशुद्ध माने गए हैं। अत: यथासंभव लोहे के बर्तनो का प्रयोग नहीं ही करना चाहिए ।

* तर्पण Tarpan, श्राद्ध Shradh में तिल और कुशा सहित जल हाथ में लेकर देवताओं का तर्पण Devtaon Ka Tarpan करते समय पूर्व दिशा की तरफ मुँह करके देवताओं का नाम लेकर एक एक बार तपरान्तयामि बोलते हुए उन्हें मध्यमा ऊँगली से जल गिराते हुए जलांजलि दें ।

* ऋषियों का तर्पण करते समय उत्तर दिशा की तरफ मुँह करके दो बार तपरान्तयामि, तपरान्तयामि बोलते हुए उन्हें मध्यमा ऊँगली के दोनों तरफ से जल गिराते हुए जलांजलि दें ।

* इसके पश्चात दक्षिण दिशा की तरफ मुँह करके सबसे पहले भगवान यमराज फिर चित्रगुप्त का नाम लेते हुए और उसके बाद अपने सभी पितरों का नाम लेते हुए सबके नाम के बाद तीन बार तपरान्तयामि, तपरान्तयामि, तपरान्तयामि कहकर पितृ तीर्थ यानी अँगूठे के बगल की उँगली और अंगूठे के बीच से जलांजलि देते हुए जल को धरती में किसी बर्तन में छोड़ने से पितरों को तृप्ति मिलती है।

* तर्पण करते समय पहले अपने ददिहाल के सभी पितरों उसके बाद अपने ननिहाल के सभी पितरों का नाम लेते हुए उनका तर्पण करें, फिर अपने वंश के भूले हुए, पितृ जिन तक आपका तर्पण पहुँचना चाहिए उन सभी पितरों को एक साथ जलांजलि देते हुए उनका तर्पण करें ।

* अंत में पूर्व की ओर मुंह करके शुद्ध जल से सूर्य को अर्घ्य प्रदान करें।

* ध्यान रहे तर्पण Tarpan का जल तर्पण के बाद किसी वृक्ष की जड़ में चड़ा देना चाहिए वह जल इधर उधर बहाना नहीं चाहिए ।

* हमारे धार्मिक ग्रंथों के अनुसार तर्पण का जल सूर्योदय से आधे प्रहर तक अमृत, एक प्रहर तक शहद, डेढ़ प्रहर तक दूध और साढ़े तीन प्रहर तक जल रूप में हमारे पितरों को प्राप्त होता है। अत: हमें सुबह सवेरे ही तर्पण करना चाहिए ।

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

रसोईघर ,किचन का वास्तु

हर भवन में रसोई घर का बहुत ही प्रमुख स्थान होता है । अगर रसोई घर वास्तु सम्मत है तो वहाँ पर...

तिल विचार | Til Vichar | Til Hona

शरीर पर तिल होने का फलमित्रों हमारे शरीर पर कई प्रकार के जन्म से अथवा जीवन काल...

Shradh,Shradh Paksha,Pitra Paksha,Pind Daan

Shradh"Pitrapaksh" has an importance in "Hindu Religion" and "Hindu Culture". The rituals performed for our ancestors with gratitude...

वास्तु दोष निवारण के उपाय

वास्तु दोष निवारण के उपायVastu Dosh Nivaran Ke Upayहर व्यक्ति की कामना होती है कि उसका एक...
Translate »