Wednesday, September 16, 2020
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Tithianusaar shubh muhurat, तिथि अनुसार शुभ मुहूर्त,

Tithianusaar shubh muhurat, तिथि अनुसार शुभ मुहूर्त,

हिन्दु धर्म शास्त्रों के अनुसार कुछ मुहूर्त (Muhurat )ऐसे होते हैं जो हमेशा शुभ ही होते हैं। यहाँ पर हम ऐसे ही Tithianusaar shubh muhurat, तिथिनुसार शुभ मुहूर्त, दे रहे है जिनके लिए कोई भी पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं है। जानिए कौन कौन से है तिथिनुसार शुभ मुहूर्त….

जानिए तिथि अनुसार शुभ मुहूर्त ( Thithi Anusar Shubh Muhurat )

1 . चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा तिथि ( Pratipada thithi )

2 . बैसाख शुक्ल की तृतीया तिथि ( अक्षय तृतीया )

3 . अश्विन शुक्ल की दशमी तिथि ( विजय दशमी )

4 . दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग

तिथि अनुसार शुभ मुहूर्त ( Thithi Anusar Shubh Muhurat ) में कुछ और तिथियों को भी स्वयंसिद्ध मुहूर्त ( Swamsidhi Muhurat ) माना जाता है ।

1 . माघ शुक्ल पंचमी ( बसंत पंचमी )
2 . आषाढ़ शुक्ल नवमी ( भड्डली नवमी )
3 . फाल्गुन शुक्ल दित्तीय ( फुलेरा दूज )
4 . कार्तिक शुक्ल एकादशी ( देव प्रबोधिनी एकादशी )

इन दिनों में किसी भी कार्य को करने के लिए मुहूर्त देखने कि आवश्यकता नहीं होती है हाँ विवाह आदि के लिये मुहूर्त निकलवाना ही श्रेष्ठ है।

Tithianusaar shubh muhurat, तिथिनुसार शुभ मुहूर्त, में शुक्ल या कृष्ण पक्ष के मंगलवार को पड़ने वाली तृतीया, अष्टमी या तेरस को यदि कोई भी कानूनी वाद किया जाए, तो सफलता निश्चित मानी जाती है। शुक्ल पक्ष की पंद्रह तिथियों का बहुत ही महत्व है यह अपने आप में शक्ति संपन्न मानी गयी हैं।

चूँकि अमावस्या को सूर्य और चंद्र दोनों का प्रभाव बराबर होता है इसलिए अमावस्या किसी भी शुभ कार्य के आरंभ के लिए शुभ नहीं मानी जाती है लेकिन शल्य चिकित्सा के लिए अमावस्या सर्वोत्तम तिथि मानी गयी है, क्योंकि उस दिन शरीर में द्रवों का प्रवाह बहुत ही कम होता है लेकिन पूर्णिमा तिथि शल्य चिकित्सा के लिए बिलकुल भी उपयोगी नहीं मानी गयी है, क्योंकि इस दिन शरीर के द्रवों का प्रवाह बहुत ही तेज होता है।
वैसे शल्य-चिकित्सा के लिए मंगलवार का दिन भी अति उत्तम माना गया है ।लेकिन शल्य चिकित्सा के अतिरिक्त अमावस्या तिथि स्वास्थ्य के मामलो में ठीक नहीं मानी जाती है।
अमावस्या और अमावस्या से पूर्व कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भी रोगियों के लिए घातक मानी गयी है। किसी भी नये कार्य को आरंभ करने के लिए ऐसे दिनों से बचना चाहिए, जिनमें सूर्य नयी राशि में प्रवेश करता है। 14 जनवरी और 14 फरवरी ऐसी ही तारीखें होती हैं और हर माह की संक्रांति को भी नया कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।




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