Wednesday, August 12, 2020
Home Hindi सावन नाग पंचमी के उपाय, Nag Panchmi Ka Upay,

नाग पंचमी के उपाय, Nag Panchmi Ka Upay,

Nag Panchmi Ka Upay, नाग पंचमी के उपाय,

हिन्दू धर्म में देवताओं के साथ साथ नागों को भी अहम स्थान दिया गया है। भगवान शिव के गले में नाग राज वासुकी ने स्थान पाया है, नाग पंचमी का त्योहार नाग देवता को समर्पित है। और प्रत्येक पक्ष की पंचमी विशेषकर सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी जिसे “नाग पंचमी” भी कहते है के दिन नागो की पूजा Nagon ki puja का विशेष महत्व है । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन नाग जाति की उत्पत्ति हुई थी।

 नाग पंचमी ( nag panchami ) के दिन भगवान शिव का अभिषेक करते हुए चाँदी के नाग नागिन का जोड़ा शिवलिंग पर चढ़ा दें फिर अभिषेक की समाप्ति पर उसे ताम्बे के पात्र में विसर्जित करके , उस पात्र को अभिषेक कराने वाले पंडित को दान में दे दें , इससे काल सर्पदोष (Kaal Sarp Dosh) में बहुत ज्यादा राहत मिलती है ।

 नाग पंचमी ( nag panchami ) के दिन 11 नारियल बहते हुए पानी में प्रवाहित करें , इससे काल सर्प दोष Kaal Sarp Dosh से अवश्य ही मुक्ति मिलती है, कार्यों में सफलता मिलने के योग बनने लगते है, जीवन में चली आ रही अस्थिरतायें दूर होती है।

 नाग पंचमी ( nag panchami ) एवं प्रत्येक माह के दोनों पक्षो की पंचमी के दिन “ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा”
मन्त्र का जाप अवश्य ही करें। इससे काल सर्प दोष kaal sarp dosh के दुष्प्रभाव में कमी होती है ।

 नाग पंचमी nag panchami के दिन नागो के 5 पौराणिक “अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक व पिंगल” के नामो का कम से कम 21 बार अवश्य ही उच्चारण करें ।

 नाग पंचमी nag panchami के दिन अधिक से अधिक ‘ॐ नागदेवतायै नम:’ मन्त्र का जाप करें इससे भगवान शिव और नाग देवता प्रसन्न होते है।

 नाग पंचमी ( nag panchami ) के दिन नागदेव की सुगंधित पुष्प व चंदन से ही पूजा करनी चाहिए क्योंकि नागदेव को सुगंध बहुत प्रिय है, इससे नाग देवता प्रसन्न होते है और काल सर्प दोष kaal sarp dosh में कमी आती है।

 जिस भी जातक पर काल सर्प दोष kaal sarp dosh हो उसे कभी भी नाग की आकृति वाली अंगूठी को नहीं पहनना चाहिए ।

 नाग पंचमी ( nag panchami ) के दिन महामृत्युंज्य मंत्र का जाप करें या उसकी कैसेट सुनें।

 नाग पंचमी ( nag panchami ) के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे मिटटी के बर्तन में दूध रखने से नाग देवता ( nag devta ) प्रसन्न होते है, काल सर्प दोष ( kal sarp dosh ) निश्चय ही दूर होता है, जीवन से अस्थिरताएँ दूर होती है।

tripathi-ji
कुंडली एवं वास्तु विशेषज्ञ
पंडित पंडित ज्ञानेंद्र त्रिपाठी जी

ध्यान रहे कि नागपंचमी के दिन धरती पर हल चलाना, धरती खोदना मना है। देश के बहुत से भागों में इस दिन सुई धागे से किसी तरह की सिलाई भी नहीं की जाती है।

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
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