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परीक्षा, परीक्षा में सफलता Priksha main saflata

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परीक्षा, परीक्षा में सफलता

हर मनुष्य के जीवन में बचपन से जवानी तक का समय ऐसा होता है जिसमे उसे अपनी शिक्षा पूरी करनी होती है। वही समय ऐसा होता है जिसके आधार पर उनके जीवन कि दिशा और दशा का निर्धारण होता है। इसीलिए सभी माता-पिता, छात्र छात्राएं चाहते है कि उन्हें उनकी परीक्षा में श्रेष्ठ परिणाम, pariksha men shresth prinam प्राप्त हो, वह अपनी क्लास में अव्वल रहे इसके लिए सामान्यता सभी लोग बहुत मेहनत करते भी है।

लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि लाख प्रयास के बाद, अच्छी ट्यूशन, कोचिंग के बाद भी बहुत से छात्र छात्राओं को अच्छे परिणाम नहीं मिलते है वह लोग औसत विधार्थियों में ही रह जाते है। शास्त्रों में ऐसे बहुत से उपाय बताये गए है जिनको करने से परीक्षा में सफलता, pariksha men safalta मिलती है, विद्याअर्जन में आने वाली बाधाएं दूर होती है, विद्या प्राप्त करने का वातावरण बनने लगता है। जानिए परीक्षा में सफलता प्राप्त के उपाय, pariskha men safalta prapt karne ke upay, परीक्षा में सफलता के रामबाण उपाय, pariskha men safalta ke ramban upay, परीक्षा में सफलता कैसे पाएँ ।

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अध्धयन कक्ष में कभी भी कोई कॉपी किताबें पेन पेंसिल को खुला न रखें ।

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अध्धयन कक्ष में कॉपी किताबों को हमेशा उनकी नियत स्थान, बैग या अलमारी में ही सलीके से रखें, यह जरुर ध्यान रखें की पड़ाई की मेज, कुर्सी टूटी न हो, कापी, किताबें फटी न हो उन सभी पर जरा भी धूल मिटटी न रहे ,लगातार वहां पर साफ सफाई होती रहे ।

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पड़ने की मेज पर खाना नहीं खाना चाहिए, खाना खाते समय पड़ाई की टेबिल पर कॉपी किताबें बंद करके, खाना खाने के लिए बनाये गए स्थान पर ही खाना चाहिए ।

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हमेशा पड़ाई प्रारंभ करते समय अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए कॉपी किताबों को अपने मस्तक से लगाकर पड़ाई शुरू करें, यही प्रक्रिया पड़ाई को समाप्त करते समय भी दोहराएँ ।

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पड़ने का सर्वोतम समय ब्रह्म मुहूर्त अर्थात सुबह के 4 बजे का माना गया है उस काल में पड़ाई करते समय हमें कई गुना ज्यादा और तेजी से अपना पाठ याद होता है इसलिए पड़ने वाले छात्रों को सुबह सवेरे पड़ाई की आदत अवश्य ही डालनी चाहिए ।

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पड़ते समय छात्र का मुंह सदैव ईशान कोण ( उत्तर पूर्व ) की तरफ ही होना चाहिए इसलिए उसकी मेज इस तरह से हो की उसका मुंह ईशान कोण की तरफ ही रहे ।

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विधार्थी को घर पर पड़ते समय जूते – मोज़े नहीं पहनने चाहिए ।

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इमली के ताजे पत्ते ब्रहस्पति वार को अपनी किताबों में रखने से भी विधार्थी की बुद्धि त्रीव होती है ।

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अष्ट सरस्वती यंत्र को गले में धारण करवाने से भी विधार्थी की बुद्धि का विकास होता है ।

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मोर का पंख अपने पास रखने से विधार्थी का अपने स्कूल कालेज में सम्मान बड़ता है ।

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ब्राम्ही का नित्य सेवन करने वाले विधार्थियों की बुद्धि त्रीव होती है स्मरण शक्ति बडती है इसलिए उन्हें परीक्षा में शानदार सफलता प्राप्त होती हैं।

माँ सरस्वती का मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेणसंस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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जिन विद्यार्थियों को परीक्षा में उत्तर भूल जाने की आदत हो, उन्हें परीक्षा में अपने पास कपूर और फिटकरी रखनी चाहिए। इससे मानसिक रूप से मजबूती बनी रहती है और यह नकारात्मक ऊर्जा को भी हटाती हैं ।

Published By : Memory Museum
Updated On : 2020-02-17 03:35:55 PM

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