आप सभी को निर्जला एकादशी / भीमसेनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें
गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 25 June 2026 Ka Panchang,
मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9044862881 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
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आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,
- Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।
जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,
गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,
25 जून 2026 का पंचांग, 25 June 2026 Ka Panchang,
- गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 25 जून 2026 का पंचांग,
- दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
- गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । - गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । - गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है।
जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,

- *विक्रम संवत् 2083,
- * शक संवत – 1948,
*कलि संवत 5128,
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – ग्रीष्म ऋतु,
* मास – ज्येष्ठ माह
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर
गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-
प्रात: 5.25 AM से 6.35 AM तक
दोपहर 01.33 PM से 2.44 PM तक
रात्रि 21.02 PM से 9.53 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I
गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
बृहस्पति देव के मन्त्र
ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।
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- तिथि (Tithi) :- एकादशी 20.09 PM तक तत्पश्चात द्वादशी ,
- तिथि का स्वामी – एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी और द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी है I
- आज भगवान श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय, समस्त पापों का नाश करने वाली तथा जन्म-जन्मांतर तक अक्षय पुण्य प्रदान करने वाली निर्जला एकादशी का मैटर पावन पर्व है।
- ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी अथवा भीमसेनी एकादशी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास जी के अनुसार महाबली भीमसेन ने इसी व्रत का पालन किया था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
- शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन श्रद्धा एवं नियमपूर्वक बिना जल और अन्न ग्रहण किए उपवास करने से भगवान श्री विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत अत्यंत कठिन माना गया है, इसलिए इसका पुण्य भी अनंत एवं अद्वितीय बताया गया है।
- ✨ मान्यता है कि इस एकमात्र व्रत के पालन से वर्ष भर की समस्त 24 एकादशियों के व्रत के समान पुण्यफल प्राप्त होता है।
- ✨ यह व्रत समस्त पापों का नाश करता है, दीर्घायु प्रदान करता है तथा अंत समय में कष्टों से रक्षा कर भगवान विष्णु के परम धाम की प्राप्ति कराता है।
- 🌿 इस दिन अन्न, वस्त्र, घी, गुड़, जल से भरे घड़े या सुराही, छाता, पंखा, आम, खरबूजा, चप्पल आदि का दान विशेष फलदायी माना गया है। कहा गया है कि निर्जला एकादशी पर किया गया दान वर्ष भर किए गए दानों से भी अधिक पुण्य प्रदान करता है।
- सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान श्री विष्णु की सर्वाधिक प्रिय तिथि माना गया है। इस दिव्य दिन भगवान श्रीहरि विष्णु एवं श्रीकृष्ण की उपासना, भक्ति और नाम-स्मरण करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
- शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत का पालन करता है, वह भगवान श्री विष्णु को अत्यंत प्रिय हो जाता है तथा उस पर श्रीहरि की विशेष कृपा सदैव बनी रहती है।
- ✨ एकादशी के दिन अधिक से अधिक भगवान विष्णु के पवित्र मंत्रों का जाप करें —
- 🔸 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
- या
- 🔸 ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
- इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन, बुद्धि और आत्मा शुद्ध होती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
- 🌿 एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित कर पूजा अवश्य करें। ध्यान रहे कि तुलसी दल एकादशी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए, बल्कि उसे एक दिन पूर्व दशमी तिथि में ही संग्रह कर लेना चाहिए।
- 🚿 शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस मिलाकर स्नान करने से पापों का क्षय होता है और शरीर व मन दोनों पवित्र होते हैं।
- 🪔 रात्रि के समय भगवान विष्णु के समक्ष नौ बत्तियों वाला दीपक प्रज्ज्वलित करें तथा एक अखंड दीपक ऐसा जलाएँ जो पूरी रात प्रकाशित रहे। यह दीपक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाता है।
- 🚫 एकादशी के दिन चावल तथा अन्न का सेवन वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चावल खाने से पाप और रोग बढ़ते हैं तथा दूसरे का अन्न ग्रहण करने से संचित पुण्यों का क्षय होता है।
- 🌺 एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, संयम और भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का दिव्य साधन है।
- 🙏 “हरि स्मरण ही जीवन का सबसे बड़ा कल्याण है।”
- श्रीहरि विष्णु की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।
- 🕉️ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥ 🕉️
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नक्षत्र (Nakshatra) – स्वाति 16.29 PM तक तत्पश्चात विशाखा
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – स्वाति नक्षत्र के देवता वायु और सरस्वती जी और स्वामी राहु जी है ।
स्वाति नक्षत्र, नक्षत्र मंडल में उपस्थित 27 नक्षत्रों में 15वां है। स्वाति नक्षत्र राहु का दूसरा नक्षत्र है। स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं। स्वाति नक्षत्र का संबंध विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती से भी है।
स्वाति नक्षत्र ‘शुद्धता’, ‘स्वतंत्रता’ को दर्शाता है । यह अत्यंत शुद्ध और पवित्र बारिश की पहली बूंद का भी प्रतीक है ।
स्वाति नक्षत्र के पानी का महत्व ज्यादा होता है। इसकी एक बूंद से पपैया पक्षी अपनी प्यास बुझा लेता है। केले के पत्ते पर जल की बूंद गिरने से कपूर बनता है। इसी जल की बूंद समुद्र में गिरने से मोती बनता है।
इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष : अर्जुन तथा स्वाभाव शुभ माना गया है। स्वाति नक्षत्र सितारे का लिंग महिला है।
इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक पर जीवन भर शुक्र एवं राहु ग्रह का प्रभाव बना रहता है।
इस नक्षत्र में जन्मा जातक धार्मिक, लोकप्रिय, बुद्धिमान, चतुर, परिश्रमी, अनुशासित, आध्यात्मिक होता हैं, सामन्यता इन्हे भूमि, भवन और पूर्ण सुख मिलता है।
लेकिन यदि शुक्र ख़राब हो तो जातक क्रोधी, घमंडी, अति कामुक, मदिरा प्रेमी होता है उसको धन और स्त्री का सुख भी नहीं मिलता है ।
स्वाति नक्षत्र में पैदा हुई स्त्री सुन्दर, मिलनसार, धार्मिक, दयालु, दूसरो को जल्द प्रभावित करने वाली होती हैं। इनका पारिवारिक दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
स्वाति नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 4 और 6, भाग्यशाली रंग, गहरा भूरा, काला, भाग्यशाली दिन शनिवार, सोमवार और मंगलवार माना जाता है ।
स्वाति नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को वायु देव के “ॐ वायवे नमः”। मन्त्र माला का जाप अवश्य करना चाहिए, इससे जीवन में श्रेष्ठ सफलता मिलती है ।
पुष्य नक्षत्र के इस उपाय से हर कार्य में मिलेगी सफलता

कैसा भी सिर दर्द हो उसे करें तुरंत छूमंतर, जानिए सिर दर्द के अचूक उपाय
योग :- शिव 10.54 AM तक तत्पश्चात सिद्ध
योग के स्वामी, स्वभाव :- शिव योग के स्वामी मित्र देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
प्रथम करण :- वणिज 07.08 AM तक
करण के स्वामी, स्वभाव :- वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
द्वितीय करण :- विष्टि 20.09 PM तक तत्पश्चात बव
करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।
ब्रह्म मुहूर्त : 4.05 AM से 4.45 AM तक
विजय मुहूर्त : 14.43 PM से 15.39 PM तक
गोधूलि मुहूर्त : 19.21 PM से 19.42 PM तक
अमृत काल : 06.46 AM से 08.32 AM तक
रवि योग : 05.25 AM से 16.29 PM तक
अग्नि वास : आकाश में 20.09 PM तत्पश्चात पाताल में
अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल वास के दौरान किये जाने वाले हवन सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका धन नष्ट हो सकता है।
शिव वास : क्रीड़ा में 20.09 PM तक तत्पश्चात कैलाश पर
जब भगवान शंकर जी क्रीड़ा में होते हैं, तो उस समय भी रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ जी के कार्य अथवा क्रीड़ा के समय रूद्र अभिषेक करने से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
शिव वास :- जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर जी के कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।
- दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
- सूर्योदय – प्रातः 05:25
- सूर्यास्त – सायं 19.23
- विशेष – एकादशी के दिन सेम फली, चावल का सेवन और दूसरो के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए ।
- एकादशी के दिन चावल खाने से रोग बढ़ते है और दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट होते है ।
- पर्व त्यौहार– निर्जला एकादशी
- मुहूर्त (Muhurt) –
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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नमो-नमो गुरु देव
नमो नमो