गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 4 June 2026 Ka Panchang,
मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है, अगर आप भी पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9044862881 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।
कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।
आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद
बृहस्पतिवार का पंचांग, Brahaspativar ka panchang,
- Panchang, पंचाग, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-
1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)
पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए । नित्य पंचाग पढ़ने से भाग्य चमकने लगता है ।
जानिए आज गुरुवार का पंचांग, Guruwar Ka Panchag,
आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है, आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,
इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
आज का पंचांग, aaj ka panchang, गुरुवार का पंचाग, Guruvar Ka Panchag,
गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag,
4 जून 2026 का पंचांग, 4 June 2026 Ka Panchang,
- गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, 4 जून 2026 का पंचांग,
- दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
- गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए ।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है । - गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है । - गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
इस उपाय को करने से कार्यो में अड़चने दूर होती है, भाग्य चमकने लगता है, बृहस्पति देव की कृपा मिलती है।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ परम फलदाई है।
जीवन में कोई भी मनोकामना हो हनुमान जी के जन्मोत्सव के दिन अवश्य ही करें ये उपाय,

- *विक्रम संवत् 2083,
- * शक संवत – 1948,
*कलि संवत 5128,
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – ग्रीष्म ऋतु,
* मास – ज्येष्ठ माह ( अधिक माह )
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन,
गुरुवार को बृहस्पति देव की होरा :-
प्रात: 5.23 AM से 6.32 AM तक
दोपहर 01.26 PM से 2.33 PM तक
रात्रि 20.38 PM से 9.47 PM तक

आज गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा के समय दाहिने हाथ की तर्जनी ऊंगली ( अंगूठे के बगल वाली उंगली ) के नीचे गुरु पर्वत और उस पूरी ऊंगली पर बृहस्पति देव के मंत्र का जाप करते हुए अधिक से अधिक रगड़ते / मसाज करते रहे ( कम से कम 10 मिनट अवश्य ) I
गुरुवार को बृहस्पति की होरा में अधिक से अधिक बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करें । शिक्षा, मान – सम्मान, व्यापार, कारोबार, नए कार्यो के प्रारम्भ के लिए गुरुवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।
गुरुवार के दिन बृहस्पति की होरा में बृहस्पति देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।
बृहस्पति देव के मन्त्र
ॐ बृं बृहस्पतये नमः।। अथवा
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।
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- तिथि (Tithi) :- चतुर्थी 23.30 PM तक तत्पश्चात पंचमी ,
- तिथि का स्वामी – चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्नहर्ता गणेश जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है I
- आज संकट चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी है । प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकट चतुर्थी कहते है।
- इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना, संकट चतुर्थी का व्रत सभी प्रकार के संकटो से रक्षा होती है।
- अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तो पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
- संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित किया जाता है। जिस चतुर्थी तिथि के दिन चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी उसी दिन रखा जाता है।
- संकष्टी चतुर्थी के दिन शाम को चंद्रोदय के बाद गणेश जी और चंद्र देव जी की पूजा की जाती है । यदि उस दिन बादल के कारण चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के अनुसार चंद्रोदय के समय में पूजा कर लेना चाहिए ।
- आज गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम:” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
- चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है ।
- चतुर्थी को गणेश जी के परिवार के सदस्यों के नामो का स्मरण, उच्चारण करने से भाग्य चमकता है, शुभ समय आता है ।
- चतुर्थी तिथि को रिक्ता तिथि कहते है इस दिन शुभ कार्यो का प्रारम्भ शुभ नहीं समझा जाता है ।
- किसी भी पक्ष की चतुर्थी तिथि में मूली और बैंगन का सेवन करना मना है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है, और चतुर्थी को बैगन खाने से रोग बढ़ते है ।

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नक्षत्र (Nakshatra) – उत्तराषाढ़ा 03.41 AM शुक्रवार 5 जून तक
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – उत्तराषाढा नक्षत्र के देवता दस विश्वदेव जी एवं नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव जी है ।
उत्तराषाढा नक्षत्र 21 वें नंबर का नक्षत्र है। उत्तराषाढ़ा’ का अर्थ होता है अजेय, विजय के पश्चात। यह एक हाथी के दांत जैसा प्रतीत होता है।
उत्तराषाढ़ नक्षत्र तारे का लिंग स्त्री है। उत्तराषाढा नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कटहल और नक्षत्र का स्वभाव स्थिर माना गया है ।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में जन्मे जातक पर सूर्य, शनि और गुरु का प्रभाव बना रहता है।
उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति एक सफल एवं स्वतंत्र व्यक्ति होते हैं। इन्हे ईश्वर में आस्था होती है, इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति प्रसन्न चित्त और मित्रो में लोकप्रिय होते है ।
विवाह के उपरान्त इनको जीवन में और अधिक सफलता प्राप्त होती है, इन्हे उत्तम पुत्र सुख मिलता है। यह घूमने फिरने के बहुत शौक़ीन होते है ।
उत्तराषाढा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 1, 3 और 8, भाग्यशाली रंग, तांबे का रंग, हल्का भूरा, भाग्यशाली दिन गुरुवार और शुक्रवार का माना जाता है ।
उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ उत्तराषाढाभ्यां नमः”। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।
उत्तराषाढा नक्षत्र में जन्मे जातको को नित्य गणेश संकट स्रोत्र का पाठ करना चाहिए इससे कार्यो में आने वाली बाधाओं का निवारण होता है ।
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योग :- शुक्ल 09.03 AM तक तत्पश्चात ब्रह्म
योग के स्वामी, स्वभाव :- बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
प्रथम करण :- बव 10.27 AM तक
करण के स्वामी, स्वभाव :- बव करण के स्वामी इंद्र देव और स्वभाव सौम्य है ।
द्वितीय करण :- बालव 23.30 PM तक तत्पश्चात कौलव
करण के स्वामी, स्वभाव :- बालव करण के स्वामी ब्रह्म जी और स्वभाव सौम्य है ।
ब्रह्म मुहूर्त : 4.02 AM से 4.43 AM तक
विजय मुहूर्त : 14.38 PM से 15.34 PM तक
गोधूलि मुहूर्त : 19.15 PM से 19.35 PM तक
अमृत काल : 20.34 AM से 22.21 PM तक
अग्नि वास : आकाश में 23.30 PM तक तत्पश्चात पाताल में
अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
जब पाताल में अग्नि वास है तो वह हवन से सम्बन्धित अनुष्ठानों के लिये शुभ नहीं मानी जाती है, यह अशुभ मानी गई है । अग्नि के पाताल वास के दौरान किये जाने वाले हवन सम्बन्धित अनुष्ठानों व्यक्ति को आर्थिक नुकसान करना पड़ता है उसका धन नष्ट हो सकता है।
शिव वास : कैलाश पर 23.30 PM पर तत्पश्चात नंदी पर
शिव वास :- जब भगवान भोलेनाथ जी कैलाश पर होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर जी के कैलाश पर्वत पर रहने के दौरान रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सुखो की प्राप्ति होती है।
शिव वास :- जब भगवान भोलेनाथ नन्दी जी पर विराजमान होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना सदैव बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों केअनुसार भगवान शंकर जी के नन्दी पर विराजमान के समय रूद्र अभिषेक करने से सर्वत्र सफलता, शुभ समाचारो की प्राप्ति होती है।
- दिशाशूल (Dishashool)– बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
- गुलिक काल : – गुलिक 09:30 AM से 11 AM बजे तक ।
- राहुकाल (Rahukaal)– दिन – 1:30 PM से 3:00 PM तक।
- सूर्योदय – प्रातः 05:23
- सूर्यास्त – सायं 19.16
- विशेष – चतुर्थी को मूली का सेवन नहीं करना चाहिए, चतुर्थी को मूली का सेवन करने से धन का नाश होता है ।
- पर्व त्यौहार– संकष्टी चतुर्थी
- मुहूर्त (Muhurt) –
“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस गुरुवार का पंचाग, Guruwar Ka Panchag, सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।
मित्रो हम इस साईट के माध्यम से वर्ष 2010 से निरंतर आप लोगो के साथ जुड़े है। आप भारत या विश्व के किसी भी स्थान पर रहते है, अपने धर्म अपनी संस्कृति को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए www.memorymuseum.net के साथ अवश्य जुड़ें, हमारा सहयोग करें ।
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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।
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( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )
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नमो-नमो गुरु देव
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