Wednesday, April 14, 2021
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पश्चिम दिशा के घर का वास्तु, pashchim disha ke ghar ka vastu,

पश्चिम दिशा के घर का वास्तु, pashchim disha ke ghar ka vastu,

हर व्यक्ति चाहता है कि उसका घर वास्तु के अनुरूप हो ताकि उसके घर में किसी भी चीज़ की कमी ना हो । उसके भवन / भूखण्ड का मुख जिस भी दिशा में हो वह उसके लिए शुभ हो ।

जिन भवनो के पश्चिम दिशा pashchim disha की तरफ मार्ग होता है वह पश्चिम दिशा के घर, pashchim disha ke ghar कहे जाते है । ऐसे भूखण्ड का शुभ अशुभ प्रभाव उस भवन में रहने वाली संतान पर पड़ता है।

यहाँ पर हम आपको पश्चिम दिशा के घर का वास्तु, pashchim disha ke ghar ka vastu, के ऐसे नियम बता रहे है जिसका पालन करते हुए कोई भी अपने पश्चिम मुख वाले भवन को अपने लिए बहुत ही शुभ बना सकता है।

अवश्य जानिए :- नैत्रत्यमुखी भवन के वास्तु के अचूक उपाय, 

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पश्चिम दिशा का वास्तु, pashchim disha ka vastu,

* पश्चिम दिशा pashchim disha वाले भवन में मुख्य द्वार पश्चिम की तरफ ही होना चाहिए । नैत्रत्य कोण अर्थात दक्षिण पश्चिम दिशा एवं वायव्य कोण अर्थात उत्तर पश्चिम दिशा में द्वार नही होना चाहिए ।
नैत्रत्य कोण में मुख्य द्वार होने पर घर में बीमारी, धन हानि एवं आकाल मृत्यु का भय रहता है ।

* पश्चिम मुख वाले भवन में अगर आगे की तरफ रिक्त स्थान हो तो पीछे पूर्व की तरफ और यदि संभव हो तो उत्तर दिशा की तरफ भी खाली स्थान अवश्य ही छोड़ना चाहिए ।
पूर्व दिशा की जगह पश्चिम दिशा pashchim disha में ज्यादा रिक्त स्थान होने पर संतान को परेशानी उठानी पड़ती है ।

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* पश्चिम दिशा के भवन में अगर सामने के भाग में ऊँची दीवार के साथ निर्माण किया जाय तो यह बहुत ही शुभदायक होता है ।

* पश्चिम दिशा pashchim disha वाले भवन में चारदीवारी पीछे पूर्व दिशा की चारदीवारी से सदैव ऊँची होनी चाहिए।

* पश्चिम दिशा pashchim disha वाले भूखण्ड में किसी भी प्रकार का निर्माण पश्चिम दिशा से प्रारम्भ करना चाहिए।

* पश्चिम दिशा pashchim disha वाले भवन के आगे के भाग में फर्श/बरामदा पीछे अर्थात पूर्व की दिशा के फर्श बरामदे से ऊँचा होना चाहिए इससे यश एवं सफलता की प्राप्ति होती है।
लेकिन इसके नीचे होने से धन की हानि के साथ साथ अपयश का सामना भी करना पड़ सकता है ।

* इस दिशा में बनाये गए कक्षों के फर्श एवं उसकी छत की ऊंचाई भी पूर्व दिशा में बनाये गए कक्षों से अधिक होनी चाहिए ।

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* पश्चिम दिशा के भवन में जल की निकासी उत्तर, पूर्व या ईशान में होनी चाहिए ।
जल की निकासी घर के सम्मुख अर्थात पश्चिम दिशा में होने से घर के निवासियों को तरह तरह के गम्भीर रोगो का सामना करना पड़ सकता है ।

* पश्चिम दिशा वाले भवन के आगे वाले भाग में ऊँचे और भारी वृक्ष लगाने से शुभ फल मिलते है।

Published By : Memory Museum
Updated On : 2020-12-24 01:20:55 PM

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