Wednesday, August 12, 2020
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शिव पूजा में रखे ध्यान, Shiv puja me rakhe dhyan,

Shiv puja me rakhe dhyan, शिव पूजा में रखे ध्यान,

  • भगवान भोलेनाथ बहुत ही भोले है जो अपने भक्तो की थोड़ी सी भी सच्ची भक्ति से प्रसन्न हो जाते है। लेकिन कुछ बातो का अवश्य जी शिव पूजा में रखे ध्यान, Shiv puja me rakhe dhyan, शास्त्रों में कई वस्तुएं / पदार्थ ऐसे कहे गए है जिन्हे भगवान शंकर पर नहीं चढ़ाने चाहिए।
  • यहाँ पर हम कुछ विशेष बातो को बता रहे है जिनका शिव पूजा में अवश्य ही ध्यान रखना चाहिए।

शिव पूजा में रखे ध्यान, Shiv puja me rakhe dhyan,

  • भगवान शिव को हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए इसका कारण यह है शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है और हल्दी स्त्रियोचित वस्तु है। स्त्रियोचित यानी स्त्रियों संबंधित। इसी वजह से शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है।
  •  वैसे तो शँख को हिन्दु धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है परन्तु भगवान शिव को शंख से जल चढ़ाना वर्जित कहा गया है और इनकी पूजा में शँख को बजाया भी नहीं जाता है ।
  •  अपने सुहाग की दीर्घायु / अच्छे स्वास्थ्य के लिए विवाहित स्त्रियां अपने माथे पर सिंदूर लगाती है, और सौभाग्य के लिए गौरी माँ को सिंदूर अर्पित करती है लेकिन भगवान शिव पर सिंदूर /कुमकुम नहीं चढ़ाया जाता है।
  •  शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव का केतकी के फूल को श्राप है कि उनकी पूजा / उनके शिवलिंग पर कभी केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा। इसीलिए शिवलिंग पर कभी भी केतकी के फूल नहीं चढ़ाये जाते है अर्थात भगवान शिव को केतकी के फूल अर्पित करना अशुभ माना जाता है।

  •  भगवान शिव को पूजा में सफ़ेद फूल चढ़ाये जाते है ।
  •  भगवान शिव की पूजा में शिवलिंग पर लोहे / स्टील के बर्तन से जल नहीं चढ़ाना चाहिए उनको सदैव ताम्बे अथवा अष्ट धातु के बर्तन / लोटे से ही जल चढ़ाना चाहिए।
  •  कभी भी शिवलिंग पर ताम्बे के बर्तन से दूध नहीं चढ़ाना चाहिए ।
  •  भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सफेद वस्त्र अर्पित करना चाहिए।

  •  भगवान शिव की पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए इनकी मात्र आधी परिक्रमा करने का ही शास्त्रों में विधान है । भगवान शिव की परिक्रमा करते समय अभिषेक की धार को लाँघना नहीं चाहिए ।
  • शिवपुराण के अनुसार तुलसी का पूर्व जन्म में नाम वृंदा था और मजबूत पतिधर्म की वजह से उसके पति अत्याचारी असुर जालंधर को कोई भी देव हरा नहीं सकता था। भगवान विष्णु तुलसी के पतिव्रत को खंडित करने के लिए जालंधर के वेष में तुलसी के पास पहुंच गए, जिससे तुलसी का पतिधर्म टूट गया एवं भगवान भोलेनाथ ने असुर जालंधर का संहार कर दिया।

  • तब वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया लेकिन माँ लक्ष्मी और समस्त देवताओं की प्रार्थना के कारण उन्हें श्राप से मुक्त भी कर दिया तब भगवान विष्णु ने वृंदा को तुलसी के रूप में प्रतिष्ठित किया और यह कहा की उनकी पूजा बिना तुलसी के पूर्ण नहीं होगी लेकिन तुलसी ने भगवान शिव के द्वारा अपने पति असुर जालंधर का वध करने के कारण भगवान शिव को अपने दिव्य, अलौकिक गुणों वाले पत्तों से वंचित कर दिया इसी लिए भगवान शिव पर तुलसी कभी भी नहीं चढ़ाई जाती है ।

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