Wednesday, April 14, 2021
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सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang,

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang,

12 अप्रैल 2021 का पंचांग, 12 April 2021 ka Panchang,

Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2021, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है ।

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*विक्रम संवत् 2077 संवत्सर कीलक तदुपरि सौम्य
* शक संवत – 1942,
*कलि संवत 5122
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – चैत्र माह,
* पक्ष – कृष्ण पक्ष,
*चंद्र बल – मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन,  

  • तिथि (Tithi)- अमावस्या – 08:00 AM तक तत्पश्चात प्रतिपदा
  • तिथि के स्वामी –   अमावस्या के स्वामी पितृ देव और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है।    

आज सोमवती अमावस्या है, सोमवती अमावस्या Somwati Amavasya के ब्रत को भीष्म पितामह ने ‘ब्रत शिरोमणि’ अर्थात ‘ब्रतराज’ कहा है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, पितरो का तर्पण करने, उनके निमित ब्राह्मण भोजन कराने, दान देने से पितरों कि आत्मा को शांति मिलती है।

सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के पूजन से अक्षय पुण्य, लाभ तथा सौभाग्य की वृद्धि होती है।

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सोमवती अमावस्या के दिन पीपल को लोहे के बर्तन से दूध, गुड़, तिल मिश्रित, जल अर्पित करके, जनेऊ चढ़ाकर पीपल जी पर दीपक या धूप जलानी चाहिए।

सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के चारों ओर 108 बार सूत का धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है। और प्रत्येक परिक्रमा में कोई भी एक मिठाई, फल, मिश्री या मेवा चढ़ाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।
यदि धागा ना लपेट पाएं तो भी पीपल की 108 परिक्रमा करने से जन्म जन्मान्तरों के पाप का नाश होता है, भाग्य प्रबल होता है ।

शास्त्रों के अनुसार इस दिन जो व्यक्ति धोबी,धोबन को भोजन कराता है,सम्मान करता है, दान दक्षिणा देता है, उसके बच्चो को कापी किताबे, फल, मिठाई, खिलौने आदि देता है उसके सभी मनोरथ अवश्य ही पूर्ण होते है।

मान्यता है कि इस दिन जो स्त्री तुलसी व माता पार्वती पर सिन्दूर चढ़ाकर अपनी माँग में लगाती है वह अखण्ड सौभाग्यवती बनी रहती है ।

अमावस्या के दिन शमी के पेड़ की पूजा करने से भगवान शनि देव की कृपा मिलती है। अमावस्या के दिन सांयकाल शमी के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे शनि दोष दूर होते है।

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रेवती नक्षत्र आकाश मंडल में अंतिम नक्षत्र है। यह मीन राशि में आता है।  रेवती का अर्थ है ‘समृद्ध’ और यह सुख – समृद्धि,  धन और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है।
रेवती नक्षत्र की गणना गंडमूल नक्षत्रों में की जाती है । इस नक्षत्र में जन्मे जातको को विष्णु भगवान की पूजा अवश्य करनी चाहिए ।  

इन्हे नित्य विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से जीवन में श्रेष्ठ सफलता की प्राप्ति होती है ।

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रेवती नक्षत्र का आराध्य वृक्ष महुआ और स्वभाव  मृदु माना गया है ।

रेवती नक्षत्र के लिए भाग्यशाली अंक 3 और 5,  भाग्यशाली रंग भूरा, और भाग्यशाली दिन  शनिवार और गुरुवार होता है ।

रेवती नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को इस नक्षत्र देवता के नाममंत्र:- “ॐ रेवत्यै नमः”l  मन्त्र की माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।

  • योग(Yog) – वैधृति – 14:28 PM तक तत्पश्चात विष्कम्भ
  • प्रथम करण : – नाग – 08:00 AM तक
  • द्वितीय करण : किंस्तुघ्न – 21:06 PM तक तत्पश्चात बव
  • गुलिक काल : – दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
  • विशेष –  अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र या फूल पत्ती तोडऩा मना है। अमावस्या के दिन स्त्री प्रसंग नहीं करना चाहिए अन्यथा रोग और दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है । 
  • पर्व त्यौहार- सोमवती अमावस्या
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण,आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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