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मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

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Mangalwar Ka Panchang
मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang

मंगलवार का पंचांग, Mangalwar Ka Panchang,

आप सभी को चैत्र नवरात्री और नव संवत्सर 2078 की हार्दिक शुभकामनायें

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2021, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)




पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए मंगलवार का पंचांग (Mangalvar Ka Panchang)।

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

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13 अप्रैल 2021 का पंचांग, 13 April 2021 ka panchang,

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

  • दिन (वार) – मंगलवार Mangalwar के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।

    मंगलवार Mangalwar को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।

    मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।

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    मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।

    मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है, मांगलिक दोष दूर होता है।

*विक्रम संवत् 2078 संवत्सर कीलक तदुपरि सौम्य
*शक संवत – 194
3
*कलि सम्वत 5123
*अयन – उत्तरायण
*ऋतु – बसंत ऋतु
*मास –
चैत्र माह
*पक्ष – शुक्ल पक्ष
*चंद्र बल – मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मकर,

तिथि :- प्रतिपदा – 10:16 AM तक तत्पश्चात द्वितीया

तिथि के स्वामी – प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी और द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्मा जी है।

आज से अति शुभ चैत्र नवरात्री, हिन्दू नव वर्ष 2078 का प्रारम्भ हो रहा है

नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि पर देवी दुर्गा नौ दिनों तक पृथ्वी पर वास करती हैं, और अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

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बहुत से हिन्दू नवरात्री में घर में माँ के स्वरुप खेत्री ( जौ ) बो कर, कलश स्थापित करके माँ का अहवाहन करते है, शास्त्रों के अनुसार घर पर कलश सदैव शुभ मुहूर्त में ही स्थापित किया जाना चाहिए ।

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 12, 2021 को 08:00 AM बजे से

प्रतिपदा तिथि समाप्त – अप्रैल 13, 2021 को 10:16 AM बजे तक

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त का समय प्रात: 05:58 से 10:17 AM तक.

अवधि – 04 घण्टे 19 मिनट

अभिजित मुहूर्त  11:44 बजे से 12:44 बजे तक रहेगा।

इसके अतिरिक्त सुबह 9 बजे से लेकर 10.30 तक चर की चौघड़ियों में,

सुबह 10.30 से लेकर दोपहर 12 बजे तक लाभ की चौघड़ियों में, और

दोपहर 12 बजे से दोपहर 1.30 तक अमृत की चौघड़ियों में भी कलश की स्थापना करना शुभ रहेगा

नवरात्री के पहले दिन माँ शैल पुत्री की आराधना की जाती है । माँ शैल पुत्री ही नवदुर्गाओं में माँ दुर्गा का प्रथम स्वरुप हैं। पर्वतराज हिमालय के घर में पुत्री के रूप जन्म होने के कारण ही इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। माँ शैल पुत्री को गाय के घी का भोग लगाया जाता है ।

ब्रह्म पुराण में लिखे इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पास के सूर्योदय पर सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से नव संवतसर, nav samvatsar, प्रारम्भ होता है ।

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शास्त्रों के अनुसार नए वर्ष के प्रथम दिन के स्वामी को उस वर्ष का स्वामी मानते हैं। चूँकि 2021 में हिन्दू नव वर्ष 2078 मंगलवार के दिन से प्रारम्भ  हो रहा है, अतः नए सम्वत् के स्वामी मंगलदेव जी होंगे।

  • नक्षत्र (Nakshatra)- अश्विनी – 14:20 PM तक तत्पश्चात भरणी
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनीकुमार जी और नक्षत्र के स्वामी केतु जी है ।     

अश्विन नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से पहला नक्षत्र है और घोड़े के सिर का प्रतीक है। अश्विनी नक्षत्र साहस, जीवन, और शक्ति का प्रतीक है।

अश्विनी एक देवता नक्षत्र है जिसे अत्यधिक शुभ माना जाता है। यह नाम अश्विनी-कुमारों से संबंधित है जो हिंदू देवता माने जाते हैं।

अश्विनी नक्षत्र का लिंग पुरुष है। अश्विन नक्षत्र का आराध्य वृक्ष कुचला और स्वभाव शुभ माना गया है ।

अश्विनी नक्षत्र के जातको के लिए भाग्यशाली संख्या 2, 7 और 9, भाग्यशाली रंग पीला, मैरून, ऑरेंज, गुलाबी, एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार होता है ।
आज अश्विनी नक्षत्र के मंत्र “ॐअश्विनी कुमाराभ्यां नमः” का 108 बार जाप करें इससे अश्विनी नक्षत्र को बल मिलेगा।  

  • योग (Yog) – विष्कम्भ – 15:17 PM तक तत्पश्चात प्रीति
  • प्रथम करण : – बव – 10:16 AM तक
  • द्वितीय करण : -बालव – 11:30 PM तक तत्पश्चात कौलव,
  • गुलिक काल : – दोपहर 12:00 से 01:30 तक है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है। यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal) दिन – 3:00 से 4:30 तक।
  • सूर्योदय – प्रातः 06:02
  • सूर्यास्त – सायं 18:32
  • विशेष – नवरात्री में किसी भी प्रकार का तामसी भोजन, मांस. मदिरा, प्याज, लहसुन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए प्रतिपदा के दिन कद्दू का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • पर्व त्यौहार- चैत्र नवरात्री

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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धन्यवाद ।

2 COMMENTS

  1. बहुत सुंदर आपका पंचांग बहुत अच्छा लगा।
    जय महाकालेश्वर बाबा।
    काल गणना

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