Wednesday, August 12, 2020
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शुक्रवार का पंचांग | Shukrwar ka panchag


शुक्रवार का पंचांग, Shukrwar ka panchag

शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang, 07 अगस्त   2020 का पंचांग

  • Panchang, पंचाग, ( Panchang 2020, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)



    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
    जानिए शुक्रवार का पंचांग (Shukrawar Ka Panchang)।
    * शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
    * वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
    * नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
    * योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
    * करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
    इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥


।। आज का पंचांग, aaj ka panchang ।।

  • दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
    शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें । शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
    धन लाभ के लिए इस दिन शाम के समय घर के ईशान कोण / मंदिर में गाय के घी का दीपक लगाएं। इसमें रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे से बनी बत्ती का उपयोग करें और दिये में थोड़ी केसर भी डाल दें।
  • *विक्रम संवत् 2077 संवत्सर कीलक तदुपरि सौम्य,
  • * शक संवत – 1942,
    *कलि संवत 5122
    * अयन – दक्षिणायन,
    * ऋतु – वर्षा ऋतु,
    * मास – भाद्रपद माह,
    * पक्ष – कृष्ण  पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुंभ,
  • तिथि का स्वामी – चतुर्थी  तिथि की स्वामी गणेशजी है
    तथा पंचमी तिथि के स्वामी सर्पदेव(नाग ) जी है

चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्नविनाशक गणपति गणेश जी है । इस तिथि का एक नाम खला भी है खला जिसका अर्थ है किसी विशेष परिणाम / सफलता का प्राप्त ना होना। इसलिए चतुर्थी तिथि में प्रारम्भ किए गए कार्यों के विशेष परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं।  इस तिथि के स्वामी विघ्नविनाशक श्री गणेश जी की आराधना से जीवन के सारे विघ्न दूर हो जाते हैं। चतुर्थी को भगवान गणेश जी के मन्त्र “ॐ गं गणपतये नमः” का अवश्य ही जाप करें ।  इस दिन ज्यादा से ज्यादा इस मन्त्र का उच्चारण करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते है , कर्ज  मिटता है । जीवन में धन, यश और बुद्दि की प्राप्ति होती है । 

  • नक्षत्र (Nakshatra)-पूर्व भाद्रपद   – 20:28 तक मूल
  • नक्षत्र के देवता – पूर्व भाद्रपद   नक्षत्र के देवता भग्र
    है एवं मूल नक्षत्र के देवता अर्यमा है ।
  • योग(Yog) – सुकर्मा – पूर्ण रात्रि तक
  • प्रथम करण : – बव  – 11:15 तक
  • द्वितीय करण : -बालव  -22:42 तक
  • गुलिक काल : –
    शुक्रवार को शुभ गुलिक दिन 7:30 से 9:00 तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)-
    शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-दिन – 10:30 से 12:00 तक।
  • सूर्योदय -प्रातः 05:51
  • सूर्यास्त – सायं : 19:02
  • विशेष – चतुर्थी को मूली नहीं खानी चाहिए ।  (चतुर्थी को मूली खाने से धन-नाश होता है । )
  • पर्व त्यौहार-
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

pandit-ji
ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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