Home Hindi पंचांग शुक्रवार का पंचांग, Shukrwar ka panchag,

शुक्रवार का पंचांग, Shukrwar ka panchag,

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शुक्रवार का पंचांग, Shukrwar ka panchag,

17 सितम्बर 2021 का पंचांग, 17 सितम्बर   2021 ka Panchang,

शुक्रवार का पंचांग, shukrwar ka panchang,

  • Panchang, पंचाग, Panchang 2021, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang, पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-

    1:- तिथि (Tithi)
    2:- वार (Day)
    3:- नक्षत्र (Nakshatra)
    4:- योग (Yog)
    5:- करण (Karan)



    पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी नित्य पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
    जानिए, शुक्रवार का पंचांग, Shukravar Ka Panchang, आज का पंचांग, aaj ka panchang,
  • महालक्ष्मी मन्त्र : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
  • ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥


आज का पंचांग, aaj ka panchang,

  • दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

    शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
    शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।

    शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
  • *विक्रम संवत् 2078 ,
  • * शक संवत – 1943,
    *कलि संवत – 5123
    * अयन – दक्षिणायण,
    * ऋतु – शरद ऋतु,
    * मास – भाद्रपद माह
    * पक्ष – शुक्ल  पक्ष
    *चंद्र बल – मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, ,मकर,
  • तिथि (Tithi)- एकादशी – 08:07 तक तत्पश्चात द्वादशी
  • एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी हैं।

आप सभी को पद्मा एकादशी / परिवर्तिनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं।

शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी योग निद्रा के दौरान करवट बदलते है।

इसी लिए इस एकादशी को परिवर्तिनी / पद्मा एकादशी कहते है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण जी की पूजा करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है।

  • एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु के मंदिर में एक नारियल व थोड़े बादाम चढ़ाएं। इस उपाय से जीवन में आर्थिक लाभ की प्राप्ति होती है कार्यों में समस्त बाधाएं भी दूर हो जाती है ।
  • पीपल में भगवान विष्णु का ही वास माना गया है। यदि आप कर्ज से परेशान है तो एकादशी के दिन पीपल के वृक्ष पर मीठा जल चढ़ाएं और शाम के समय दीपक लगाएं। इस उपाय से शीघ्र ही कर्ज मुक्ति के योग प्रबल होते है , कार्यों में सफलता मिलती है , धन टिकता है ।
  • एकादशी के दिन सांय के समय तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाकर और ऊँ वासुदेवाय नम: मंत्र बोलते हुुए तुलसी की 11 परिक्रमा करें । इस उपाय से घर के सदस्यों के मध्य प्रेम, सुख-शांति बनी रहती है उस परिवार पर किसी भी प्रकार का कोई संकट नहीं आता है।

आज विश्वकर्मा जयंती है। 17 सितंबर को देवताओं के शिल्पी, सबसे बड़े वास्तुविद, ब्रह्माण्ड के सबसे बड़े, पहले और महान शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है, इसलिए इस दिन सभी तरह के उद्योगों, फैक्ट्र‍ियों और हर तरह की मशीन की% पूजा की जाती है।

समस्त कारीगर और मशीनों का काम करने वाले अपने अपने औजारों और मशीनों का पूजन करते हैं और इस दिन काम बंद रहता है।

नक्षत्र ( Nakshatra ) : श्रवण – 27:36+ तक तत्पश्चात धनिष्ठा

नक्षत्र के स्वामी :– श्रवण नक्षत्र के देवता गोविन्द ( विष्णु ) जी है ।

श्रवण नक्षत्र के देवता विष्णु और सरस्वती जी तथा स्वामी चंद्र देव जी है ।
श्रवण नक्षत्र 22 वें नंबर का नक्षत्र  है।

यह एक त्रिशूल के जैसा प्रतीत होता है। श्रवण नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आक या  मंदार, और नक्षत्र का स्वभाव चर माना गया है । श्रावण नक्षत्र का लिंग पुरुष है।
श्रवण नक्षत्र के जातक पर शनि और चंद्र का प्रभाव जीवनभर बना रहता है।  श्रवण नक्षत्र के जातक को हनुमानजी की सदैव उपासना करना है। जातक को शराब, मांस आदि व्यसनों से दूर रहना चाहिए।


श्रवण नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 2 और 8, भाग्यशाली रंग, आसमानी, हल्का नीला, भाग्यशाली दिन गुरुवार, बुधवार और सोमवार माना जाता है ।
श्रवण नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ श्रवणाय नमः “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

योग(Yog) : अतिगण्ड – 20:21 तक

प्रथम करण : – विष्टि – 08:07 तक

द्वितीय करण :-बव – 19:28 तक

  • गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-दिन – 10:30 से 12:00 तक।
  • सूर्योदय -प्रातः 06:01
  • सूर्यास्त – सायं : 18:12
  • विशेष – एकादशी में चावल और सेम की फली नहीं खानी चाहिए , इस दिन इनके सेवन से पाप और रोग बढ़ता है । 
  • पर्व त्यौहार- परिवर्तिनी / पद्मा एकादशी, विश्वकर्मा जयंती
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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