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रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 23 अगस्त का पंचांग 2026 का पंचांग,

आप सभी को श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, पुत्रदा एकादशी की हार्दिक शुभकामनायें

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रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag,

23 अगस्त 2026 का पंचांग, 23 August 2026 ka Panchang,

अवश्य पढ़ें :-  मनचाही नौक री चाहते हो, नौकरी मिलने में आती हो परेशानियाँ  तो अवश्य करें ये उपाय 

Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)



पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।

रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang,
23 अगस्त
2026 का पंचांग, 23 August 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9044862881 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद

जानिए नवरात्री में कन्या पूजन में माता के किन किन स्वरूपों की पूजा की जाती है

भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।

👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

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रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,आप अपने जानने वाले कितने लोगो को जानते है जो नित्य यह पंचांग पढ़ पाते है, आप ईश्वर के प्रिय है जो आपको यह अवसर मिल रहा है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । नित्य पंचांग को पढ़ने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है, पंचांग को पढ़ने से तीर्थ दर्शन के समान फल मिलता है ।

1593 Revisions

* विक्रम संवत् – 2083, वर्ष
* शक संवत – 1948, वर्ष
* कलि संवत — 5128, वर्ष
* कलयुग – 5128, वर्ष
* अयन – दक्षिणयान,
* ऋतु – वर्षा ऋतु,
* मास – सावन माह,
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन,

रविवार को सूर्य देव की होरा :-

प्रात: 5.54 AM से 6.59 AM तक

दोपहर 01.28 PM से 02.33 PM तक

रात्रि 20.43 PM से 9.38 PM तक

रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।

सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अवश्य जानिए देव दीपावली किस दिन मनाई जाएगी, देव दीपावली क्यों मनाते है 

सूर्य देव के मन्त्र :-

ॐ भास्कराय नमः।।

अथवा

ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।

सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इसे विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान की सुख-समृद्धि और संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेष बात यह है कि पुत्रदा एकादशी वर्ष में दो बार आती है—पौष शुक्ल एकादशी और श्रावण शुक्ल एकादशी। दोनों का नाम पुत्रदा एकादशी है, और दोनों ही एकादशी में पुत्र प्राप्ति और पुत्र / संतान के कल्याण के लिए यह ब्रत रखा जाता है ।

एकादशी तिथि 23 अगस्त रविवार को लगभग तड़के सुबह 2:00 AM से शुरू होकर 24 अगस्त सोमवार को लगभग 4:18 AM तक रहेगी। इसलिए एकादशी का ब्रत रविवार 23 अगस्त को ही रखा जायेगा ।

🌿 पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्त्व

‘पुत्रदा’ शब्द संस्कृत के पुत्र + दा से बना है—अर्थात संतान प्रदान करने वाली। परंपरागत रूप से इस व्रत का संबंध संतान प्राप्ति, संतान की मंगल-कामना और वंश की उन्नति से जोड़ा गया है। आज इसे केवल पुत्र प्राप्ति तक सीमित न मानकर संतान-सुख, संतान की दीर्घायु, अच्छे संस्कार और परिवार की समृद्धि के लिए भी किया जाता है।

📜 पद्म पुराण में क्या कहा गया है?

पद्म पुराण के उत्तरखंड के अध्याय 55 में श्रावण शुक्ल एकादशी को स्पष्ट रूप से ‘पुत्रदा’ कहा गया है। वहाँ ऋषि लोमश राजा को इस एकादशी का व्रत करने की सलाह देते हैं और बताते हैं कि यह वांछित फल देने वाली है। कथा में राजा महीजित निःसंतान होते हैं। ऋषि लोमश के मार्गदर्शन में राजा और प्रजा इस व्रत का पालन करते हैं और इसके पुण्य के प्रभाव से रानी को गर्भ प्राप्त होता है तथा एक पुत्र का जन्म होता है।

🌺 संतान के लिए विशेष रूप से क्यों मानी जाती है?

शास्त्रीय परंपरा में पुत्र को वंश की निरंतरता तथा माता-पिता के श्राद्ध आदि धार्मिक कर्तव्यों से जोड़ा गया था। इसी कारण ‘पुत्रदा’ नाम का विशेष अर्थ बना। हालांकि आज इसके आध्यात्मिक अर्थ को व्यापक रूप में संतान-सुख और संतान के कल्याण के रूप में समझना अधिक उपयुक्त है।

मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का ब्रत रखने से योग्य, आज्ञाकारी, धर्म का पालन करने वाली, चरित्रवान, और कुल का नाम रौशन करने वाली संतान की प्राप्ति होती है। संतान के जीवन से सभी कष्ट दूर रहते है उसे आरोग्य और दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है ।

सनातन धर्म में एकादशी तिथि को भगवान श्री विष्णु की सर्वाधिक प्रिय तिथि माना गया है। इस दिव्य दिन भगवान श्रीहरि विष्णु एवं श्रीकृष्ण की उपासना, भक्ति और नाम-स्मरण करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।

शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत का पालन करता है, वह भगवान श्री विष्णु को अत्यंत प्रिय हो जाता है तथा उस पर श्रीहरि की विशेष कृपा सदैव बनी रहती है।

✨ एकादशी के दिन अधिक से अधिक भगवान विष्णु के पवित्र मंत्रों का जाप करें —

🔸 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

या

🔸 ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन, बुद्धि और आत्मा शुद्ध होती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

🌿 एकादशी के दिन भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित कर पूजा अवश्य करें। ध्यान रहे कि तुलसी दल एकादशी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए, बल्कि उसे एक दिन पूर्व दशमी तिथि में ही संग्रह कर लेना चाहिए।

🚿 शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस मिलाकर स्नान करने से पापों का क्षय होता है और शरीर व मन दोनों पवित्र होते हैं।

🪔 रात्रि के समय भगवान विष्णु के समक्ष नौ बत्तियों वाला दीपक प्रज्ज्वलित करें तथा एक अखंड दीपक ऐसा जलाएँ जो पूरी रात प्रकाशित रहे। यह दीपक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैलाता है।

🚫 एकादशी के दिन चावल तथा अन्न का सेवन वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन चावल खाने से पाप और रोग बढ़ते हैं तथा दूसरे का अन्न ग्रहण करने से संचित पुण्यों का क्षय होता है।

🌺 एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, संयम और भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त करने का दिव्य साधन है।

🙏 “हरि स्मरण ही जीवन का सबसे बड़ा कल्याण है।”

इस दिन पूजा के बाद भगवान श्री कृष्ण जी से प्रार्थना करें कि

“हे श्रीहरि विष्णु, हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। हमारी संतान को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सद्बुद्धि, अच्छे संस्कार, सफलता और सुख प्रदान करें तथा हमारे जीवन की संतान संबंधी सभी बाधाओं को दूर करें।” 🙏

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नक्षत्र :- मूल 17.44 PM तक तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा

नक्षत्र के स्वामी :-    मूल नक्षत्र के देवता निॠति (राक्षस) एवं स्वामी केतु जी है ।


मूल नक्षत्र का नक्षत्र मंडल में 19वां स्थान है। ‘मूल’ का अर्थ ‘जड़’ होता है।  ज्योतिष शास्त्र में गंडमूल नक्षत्र के अंतर्गत अश्विनी, रेवती, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र को रखा गया है।

ज्योतिषियों का मानना है कि अगर बच्चे का जन्म गंडमूल नक्षण में हो तब उस की शांति अवश्य करा लेनी चाहिए अन्यथा इसका अशुभ परिणाम प्राप्त होता है।

गंडमूल नक्षत्र में जन्म लेने पर भी अगर लड़के का जन्म रात में और लड़की का जन्म दिन में हो, तब मूल नक्षत्र का प्रभाव समाप्त हो जाता है। लेकिन यदि बच्चे का जन्म अगर मंगलवार अथवा शनिवार के दिन हुआ है तो इसके अशुभ प्रभाव बढ़ जाते हैं।

मूल नक्षत्र में जन्मा जातक शांतिप्रिय, आकर्षक, साहसी, राजनीति में निपुण, धनवान, चतुर, वाकपटु, सौभाग्यशाली, ज्ञानवान और धार्मिक स्वभाव का होता है।

मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक को रविवार को छोड़कर सदैव या समय समय पर पीपल के वृक्ष में प्रसाद और जल चढ़ाते रहना चाहिए । मूल नक्षत्र सितारे का लिंग तटस्थ है।

मूल नक्षत्र का आराध्य वृक्ष साल और नक्षत्र का स्वभाव तीक्ष्ण माना गया है ।

मूल नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 3 और 7, भाग्यशाली रंग, सुनहरा और क्रीम, भाग्यशाली दिन शनिवार, मंगलवार और बुधवार का माना जाता है ।

मूल नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ निॠतये नमः “। मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए ।

काल सर्प दोष, जीवन में अस्थिरताएँ दूर करने के लिए नाग पंचमी के दिन अवश्य ही करें ये अचूक उपाय


घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स

  • योग (Yog) – विष्कम्भ 06.14 AM तक तत्पश्चात प्रीति
  • योग के स्वामी :-         विष्कम्भ योग के स्वामी यम एवं स्वभाव हानिकारक है । प्रीति  योग के स्वामी विष्णु एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – वणिज 15.10 PM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – विष्टि 04.18 AM सोमवार 24 अगस्त तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.26 AM से 5.10 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.33 PM से 15.25 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.53 PM से 19.15 PM तक
  • अमृत काल :- 10.33 AM से 12.21 PM तक


    शिव वास – क्रीड़ा में 04.18 AM सोमवार 24 अगस्त तक


    जब भगवान शंकर जी क्रीड़ा में होते हैं, तो उस समय भी रुद्र अभिषेक करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ जी के कार्य अथवा क्रीड़ा के समय रूद्र अभिषेक करने से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।  


    अग्नि वास : – आकाश में 04.18 AM सोमवार 24 अगस्त तक

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:54
  • सूर्यास्त – सायं 18:53

    आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय

  • विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।

    रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।

    रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1
  • एकादशी के दिन सेम फली, चावल का सेवन और दूसरो के अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  •  एकादशी के दिन चावल खाने से रोग बढ़ते है और दूसरे का अन्न खाने से पुण्य नष्ट होते है ।
  • एकादशी के दिन माँ तुलसी एकादशी का ब्रत रखती है इसलिए इस दिन तुलसी जी पर जल चढ़ाना, तुलसी जी को तोड़ना सख्त मना है ।

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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Suneel Pardal
Panchang & Vastu Consultant

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