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रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag, 19 अप्रैल का पंचांग 2026 का पंचांग,

आप सभी को अक्षय तृतीया, भगवान परशुराम के जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें

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रविवार का पंचांग, Raviwar Ka Panchag,

19 अप्रैल 2026 का पंचांग, 19 April 2026 ka Panchang,

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Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)



पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे । जानिए रविवार का पंचांग, Ravivar Ka Panchang।

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भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।

👉🏽दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

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रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।

1593 Revisions

* विक्रम संवत् – 2083, वर्ष
* शक संवत – 1948, वर्ष
* कलि संवत 5128, वर्ष
* कलयुग – 5128, वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – बसंत ऋतु,
* मास – बैसाख माह
* पक्ष – शुक्ल पक्ष
* चंद्र बल – वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन,

रविवार को सूर्य देव की होरा :-

प्रात: 5.59 AM से 7.05 AM तक

दोपहर 01.22 PM से 02.33 PM तक

रात्रि 20.33 PM से 9.35 PM तक

रविवार को सूर्य की होरा में अधिक से अधिक अनामिका उंगली / रिंग फिंगर पर थोड़ा सा घी लगाकर मसाज करते हुए सूर्य देव के मंत्रो का जाप करें ।

सुख समृद्धि, मान सम्मान, सरकारी कार्यो, नौकरी, साहसिक कार्यो, राजनीती, कोर्ट – कचहरी आदि कार्यो में सफलता के लिए रविवार की होरा अति उत्तम मानी जाती है ।

रविवार के दिन सूर्य देव की होरा में सूर्य देव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

अक्षय तृतीया के दिन अवश्य ही करें ये बहुत ही छोटी सी खरीददारी, घर धन – धान्य से भरा रहेगा,

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सूर्य देव के मन्त्र :-

ॐ भास्कराय नमः।।

अथवा

ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।

द्वितीया तिथि के स्वामी सृष्टि के रचियता भगवान ‘ब्रह्मा’ जी हैं। इसका विशेष नाम ‘सुमंगला’ है। यह भद्रा संज्ञक तिथि है।

सोमवार और शुक्रवार को द्वितीया तिथि मृत्युदा होती है।

लेकिन बुधवार के दिन दोनों पक्षों की द्वितीया में विशेष सामर्थ होता है और यह सिद्धिदा हो जाती है, अर्थात इसमें किये गये सभी कार्य शुभ और सफल होते हैं।

द्वितीया तिथि को चारो वेदो के रचियता ब्रह्मा जी का स्मरण करने से कार्य सिद्ध होते है।

व्यासलिखित पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी के चार मुख हैं, जो चार दिशाओं में देखते हैं। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा को स्वयंभू (स्वयं जन्म लेने वाला) और चार वेदों का निर्माता माना गया है।

ब्रह्मा जी की उत्पत्ति विष्णु की नाभि से निकले कमल से मानी गयी है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी के एक मुँह से हर वेद निकला था।

देवी सावित्री ब्रह्मा जी की पत्नी, माँ सरस्वती ब्रह्मा जी की पुत्री, सनकादि ऋषि,नारद मुनि और दक्ष प्रजापति इनके पुत्र और इनका वाहन हंस है।1

ब्रह्मा जी ने अपने चारो हाथों में क्रमश: वरमुद्रा, अक्षरसूत्र, वेद तथा कमण्डलु धारण किया है।

द्वितीया तिथि को ब्रह्मचारी ब्राह्मण की पूजा करना एवं उन्हें भोजन, अन्न, वस्त्र आदि का दान देना बहुत शुभ माना गया है।

भारत के राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा जी का विश्व प्रसिद्द मंदिर है, ब्रह्मा जी की पूजा भारत में केवल यहीं पुष्कर तीर्थ के ब्रह्मा मंदिर में ही की जाती है । यहाँ पर ब्रह्मा जी के दर्शन पूजा से समस्त कार्य सिद्ध होने लगते है ।

ऐसा माना जाता है कि पुष्कर तीर्थ को स्वयं सृष्टि के हिंदू देवता ब्रह्मा द्वारा निर्मित किया गया था । इस तीर्थ में हर साल लाखो हिन्दू ब्रह्मा जी के दर्शन, उनकी पूजा करने के लिए आते है ।

शुक्ल पक्ष की द्वितीया में भगवान शंकर जी माँ पार्वती के संग होते हैं इसलिए भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।

लेकिन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि में भगवान शंकर की पूजा करना उत्तम नहीं माना जाता है।

अवश्य जानिए,  आखिर क्या कारण है कि अक्षय तृतीया का पर्व वर्ष का सबसे सिद्ध और अक्षय पुण्यदायक माना जाता है

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आज अति पवित्र अक्षय तृतीया है । अक्षय तृतीया Akshaya Tritiya का पर्व वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। अक्षय तृतीया को अनबुझ मुहूर्त माना जाता है, अर्थात यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है इस दिन किसी भी मुहूर्त को देखने की आवश्यकता नहीं होती है ।

यह तिथि यदि सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए जप-तप, दान आदि का अक्षय फल प्राप्त होता हैं।

अक्षय तृतीय के दिन ग्रहों का एक विशेष संयोग बनता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में होते है, ऐसा खास संयोग साल में सिर्फ एक दिन आज ही के दिन बनता है। इस पवित्र दिन सूर्य, मेष में और चंद्रमा वृषभ में होता है।

मान्यता है कि इस दिन बिना पंचांग देखे कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों, घर, जमीन, वाहन आदि की खरीददारी से करना शुभ होता हैं।

अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्‍णु के छठें अवतार कहे जाने वाले भगवान परशुराम जी का जन्‍म महर्षि जमदाग्नि और माता रेनुका देवी के घर हुआ था। इसी कारण अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जी एवं भगवान विष्‍णु की उपासना की जाती है।

हिंदू कैलंडर में अक्षय तृतीया को एक शुभ दिन के तौर पर गिना जाता है। नए सामान की खरीदारी और निवेश के लिए इस दिन को बहुत शुभ मानते हैं। इस दिन घर में हवन, पूजा और पितरों को श्राद्ध करना अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है।

मान्यता है कि यदि किसी को किसी भी अच्छे कार्य के लिए कोई शुभ मुहुर्त नहीं मिल पा रहा हो उसके कार्यों में लगातार अड़चने आती है, व्यापार में घाटा होता है तो उनके लिए कोई भी नई शुरुआत करने के लिए शुभ कार्य, लाभ का कार्य करने का अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ माना जाता है। ।

पौराणिक कथा और ग्रंथों के अनुसार इस दिन आप जो भी शुभ कार्य करते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है।

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु को मिश्री, भीगी हुई चने की दाल, सत्तू का भोग लगया जाता है, और प्रसाद में इसे ही बांटा जाता है। इस दिन प्रत्येक मनुष्य सत्तू अवश्य खाना चाहिए।

इस दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है।

वृंदावन के श्री बांके बिहारी जी के मंदिर में केवल इसी दिन श्रीविग्रह के चरण-दर्शन होते हैं अन्यथा पूरे वर्ष वस्त्रों से ढंके रहते हैं।

शास्त्रों के अनुसार जो मनुष्य इस दिन गंगा स्नान/ पवित्र नदियों में स्नान करता है, उसे समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। यदि घर पर ही स्नान करना पड़े तो सूर्य उदय से पूर्व उठ कर एक बाल्टी में जल भर कर उस में गंगा जल मिला कर स्नान करना चाहिए ।

आज के दिन दान करने का बहुत महत्व है । इस तिथि में थोड़ा या बहुत, जितना और जो कुछ भी दान दिया जाता है, उसका फल अक्षय हो जाता है। आज के दिन पूजा, जप, दान आदि अवश्य जी करना चाहिए ।

इस दिन अपने सामर्थ के अनुसार अपने माता पिता ,बड़े बुजुर्ग और अपने गुरु को उपहार देकर उनका आशीर्वाद अवश्य ही लेना चाहिए । इस दिन मिला हुआ आशीर्वाद वरदान साबित होता है ।

इस दिन बहुत प्रसन्न रहना चाहिए इस दिन किसी भी दशा में क्रोध, कलह या हिंसा नहीं करनी चाहिए । इस दिन शुभ वचन बोलने, प्रसन्न रहने, से जीवन में सुख – सौभाग्य खिंचा चला आता है ।


अक्षय तृतीया के दिन इस वस्तु का दान करने, सेवन करने से समस्त पापो का होता है नाश

नक्षत्र :- भरणी 07.10 AM तक तत्पश्चात कृतिका 04.35 AM सोमवार 20 अप्रैल तक

नक्षत्र के स्वामी :-        भरणी नक्षत्र के देवता यमराज जी और नक्षत्र के स्वामी शुक्र जी है । 

भरणी नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से दूसरा नक्षत्र है और त्रिकोण का प्रतीक है। यह नक्षत्र प्रकृति के स्त्री वाले पहलू को इंगित करता है।

भरणी नक्षत्र बलिदान, ईर्ष्या, सहनशीलता और शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। यह संयम का एक सितारा माना जाता है और गर्भ का प्रतिनिधित्व करता है। भरणी नक्षत्र सितारा का लिंग मादा है। 

भरणी नक्षत्र का आराध्य वृक्ष आँवला और नक्षत्र स्वभाव क्रूर माना गया है ।

भरणी नक्षत्र में पैदा होने वाले एक बड़े दिल वाले व्यक्ति माने जाते हैं, यह लोगो की बातो का बुरा नहीं मानते है। आपकी ताकत आपकी मुस्कुराहट है आप हमेशा शांत और प्रसन्न रहते हैं। आप ईमानदार है और सकारात्मक रहते है। इनका पारिवारिक जीवन सुखमय रहता है ।

भरणी नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, 3 और 12, भाग्यशाली रंग पीला, लाल, और हरा एवं भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार माना जाता है । 

भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को तथा सभी मनुष्यों को जिस दिन भारणी नक्षत्र हो उस दिन नक्षत्र देवता नाममंत्र:- “ॐ यमाय् नमः” l  मन्त्र की एक माला का जप करना चाहिए, इससे भारणी नक्षत्र के शुभ फल मिलते है ।  

भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातको को भगवान शंकर जी की आराधना परम फलदाई है, इन्हे इस नक्षत्र के दिन महा मृत्युंजय मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करना चाहिए ।


घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स

  • योग (Yog) – आयुष्मान 20.02 PM तक तत्पश्चात सौभाग्य
  • योग के स्वामी :-     आयुष्मान योग के स्वामी चंद्र देव एवं स्वभाव श्रेष्ठ माना जाता है ।
  • प्रथम करण : – कौलव 10.49 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  कौलव करण के स्वामी मित्र और स्वभाव सौम्य है ।
  • द्वितीय करण : – तैतिल 21.07 PM तक तत्पश्चात गर
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-     तैतिल करण के स्वामी विश्वकर्मा जी और स्वभाव सौम्य है ।

  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.23 AM से 5.08 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.30 PM से 15.22 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 18.48 PM से 19.10 PM तक
  • अमृत काल :- अमृत काल 02.26 AM से 03.52 AM सोमवार 20 अप्रैल तक

    शिव वास – माँ गौरी के संग
  • जब भगवान शंकर गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

    अग्नि वास : – पृथ्वी पर 10.49 AM तक तत्पश्चात आकाश

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
  • गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
  • राहुकाल (Rahukaal)-सायं – 4:30 से 6:00 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः 05:52
  • सूर्यास्त – सायं 18:49

    आँखों की रौशनी बढ़ाने, आँखों से चश्मा उतारने के लिए अवश्य करें ये उपाय

  • विशेष – रविवार को बिल्ब के वृक्ष / पौधे की पूजा अवश्य करनी चाहिए इससे समस्त पापो का नाश होता है, पुण्य बढ़ते है।

    रविवार के दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल अर्पण करना किसी भी यज्ञ के फल से कम नहीं है, इससे सूर्य देव की सदैव कृपा बनी रहती है ।

    रविवार को तुलसी जी को जल देना, तुलसी जी को तोड़ना वर्जित है ऐसा करने से पुण्य नष्ट होते है 1
  • द्वितीया को बैगन, कटहल और नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए ।

    तृतीया तिथि को परवल का सेवन नहीं करना चाहिए, तृतीया तिथि को परवल का सेवन करने से शत्रुओं में वृद्धि होती है ।

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत शुभ फलो वाला हो ।

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आप पर ईश्वर का सदैव आशीर्वाद बना रहे ।
आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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  1. ↩︎
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