शुभ मुहूर्त योग Shubh Muhurt Yog
प्रत्येक दिन ग्रहों और नक्षत्रों की चाल के कारण नए नए योग बनते बिगड़ते रहते है, इनमे कुछ शुभ योग नक्षत्र होते है और कुछ अशुभ …..शुभ योग में कुछ भी कार्य करने से सफलता की सम्भावना बड़ जाती है और अशुभ समय में कार्यो में बाधा आ सकती है हमें नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह शुभ अशुभ नक्षत्र हमारे जीवन में बहुत प्रभाव डालते है और जिन लोगो को अपने जन्म दिवस या जन्म समय का सही ज्ञान नहीं है उनके लिए तो मुहूर्त का ज्ञान बहुत ही आवश्यक है। वेद शास्त्रों में भी मुहूर्त की उपयोगिता का वर्णन मिलता है। मुहूर्त ज्योतिष का स्थान संहिता स्कंध में भी आता है। मुहूर्तों का उद्देश्य किसी भी कार्य की निर्विघ्नता पूर्वक सफलता के लिए सबसे उपर्युक्त काल का निर्धारण करना है। हमारे दैनिक जीवन में मुहूर्त बहुत उपयोगी हैं।यहाँ पर हम आपको कुछ बहुत ही आसान नियम बता रहे है जिनके आधार पर आप अपने नित्य के काम में निश्चित ही सफलता हासिल कर सकते है।
दिन में 15 और रात में 15 अर्थात कुल मुहूर्त आते है।इन मुहूर्तों के अपने-अपने गुण – दोष हैं। मुहूर्त एक इकाई है और एक मुहूर्त बराबर होता है दो घड़ी यानि लगभग 48 मिनट। मुहूर्तों में अमृत महूर्त और ब्रह्म मुहूर्त बहुत ही श्रेष्ठ होते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से लगभग दो घंटे पूर्व होता है।यह समय योग,ध्यान, अध्ययन आदि के लिये सर्वोत्तम कहा गया है।
दिन भर के इन मुहूर्तों में से एक अभिजित मुहूर्त है। जो दिन का आठवां मुहूर्त होता है और यह मघ्याह्न ( दोपहर लगभग 12 बजे ) के समय आता है। और इसके 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद में (अर्थात 48 मिनट) इसका प्रारम्भ और अंत माना जाता है।अर्थात 11.36 से 12.24 तक |
कहते है कि अभिजित मुहूर्त में सूर्य नारायण मध्य में होते है इस समय चक्रपाणि भगवान् अपने चक्र से समस्त विघ्न दोषों का सर्वनाश कर देते हैं। अत: अभिजित मुहूर्त में सभी शुभ कार्य किये जा सकते है। यह अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। लेकिंन इस बात का ध्यान अवश्य रखे कि बुधवार के दिन अभिजित मुहूर्त को निषेध बताया गया है। अर्थात इस दिन अभिजित मुहूर्त होने पर भी कोई शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करें। क्योंकि अभिजित काल दिन का मघ्याह्न समय होता है और बुधवार भी वारों में मघ्य में ही आता है।
हमारे शास्त्रों में गुलीक काल में शुभ कार्य करने कि सलाह दी गयी है ।गुलीक काल में किये गए प्रत्येक कार्य में सफलता कि सर्वाधिक सम्भावना होती है हम यहाँ पर प्रतिदिन के गुलीक काल का विवरण दे रहे है-
गुलीक काल (शुभ समय) Gulik Kaal ( Shubh Samay )
रविवार -अपराह्न- 3 से 4.30 बजे तक
सोमवार – अपराह्न- 1.30 से 3 बजे तक
मंगलवार – अपराह्न- 12 से 1.30 बजे तक
बुधवार – प्रातः 10.30 से 12 बजे तक
गुरुवार – प्रातः 9 से 10.30 बजे तक
शुक्रवार – प्रातः 7.30 से 9 बजे तक
शनिवार – प्रातः 6 से 7.30 बजे तक
इसके अतिरिक्त यदि दिनों के हिसाब से शुभ अशुभ कार्य करने हो तो उसकी जानकारी निम्नवत है ….
रविवार को स्थिर कार्य, बीज बोना, घर बनाना, शांति कर्म, बगीचा लगाना आदि कार्य हमेशा सिद्ध होते हैं।
सोमवार को वाहन लाना, यात्रा करना सिद्ध होते हैं।
मंगलवार को मरण, अग्नि का कार्य, हथियार का कार्य ठीक रहते हैं।
बुधवार को अग्निहोत्र, शुभाशुभ कार्य ठीक हैं।
गुरुवार को बाजार का कार्य, स्त्री संभोग, शास्त्र का ज्ञान, आभूषण बनवाना, दुकान का काम, चित्रकारी, गाना-बजाना आदि कला के कार्य सिद्ध होते हैं।
शनिवार को जादू-टोना, हथियार से वार करना, पशुओं को ट्रेंड करना ठीक है।
याद रहे जिस दिन-भद्रा-हो, उस दिन शुभ कार्य नहीं करने चाहिए ।
किसी भी नये कार्य को आरंभ करने के लिए ऐसे दिनों से बचना चाहिए, जिनमें सूर्य नयी राशि में प्रवेश करता है। 14 जनवरी और 14 फरवरी ऐसी ही तारीखें होती हैं और हर माह की संक्रांति को भी नया कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
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