Monday, August 3, 2020
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बुधवार का पंचांग | Budhwar Ka Panchang


बुधवार का पंचांग, Budhwar Ka Panchang

Panchang, पंचाग, ( Panchang 2020, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang )

पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)।


बुधवार का पंचांग (Budhwar Ka Panchang)


बुधवार 29 जुलाई 2020 का पंचाग ( Panchang )

गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

* दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। इस दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

*विक्रम संवत् 2077 संवत्सर कीलक तदुपरि सौम्य
*शक संवत – 1942

*कलि संवत 5122

*अयन – दक्षिणायन
*ऋतु –  वर्षा ऋतु
*मास -श्रावण माह
*पक्ष – शुक्ल  पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ,

  • तिथि (Tithi)- दशमी  – 30  जुलाई 01:16 तक तदुपरांत एकादशी
  • तिथि का स्वामी – दशमी  तिथि की स्वामी यमराज जी है तथा एकादशी तिथि के स्वामी  भगवान विष्णु जी जी है

यमराज जी का समस्त रोगों को बाधाओं को दूर करने वाला मन्त्र :- “ॐ क्रौं ह्रीँ आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहकृते नम : “॥ दशमी तिथि के देवता यमराज जी हैं। यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है। इस दिन इनकी पूजा करने, इनसे अपने पापो के लिए क्षमा माँगने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं, निश्चित ही सभी रोगों से छुटकारा मिलता है,  नरक के दर्शन नहीं होते है अकाल मृत्यु के योग भी समाप्त हो जाते है। शास्त्रों में इस दिन यम के निमित्त घर के बाहर दीपदान का विधान कहा गया हैं। इस तिथि को धर्मिणी भी कहा गया है। समान्यता यह तिथि धर्म और धन प्रदान करने वाली मानी गयी है । दशमी तिथि में नया वाहन खरीदना शुभ माना गया है। इस तिथि को सरकार से संबंधी कार्यों का आरम्भ किया जा सकता है। दशमी को परवल नहीं खाना चाहिए।   

  • नक्षत्र (Nakshatra)- विशाखा  -08:33 तक तदुपरांत मघा
  • नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- विशाखा  नक्षत्र के देवता अधिष्ठाता है । तदुपरांत अनुराधा नक्षत्र के देवता पितर है ।
  • प्रथम करण : -तैतिल  – 08:25 तक
  • गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
  • दिशाशूल (Dishashool)- बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है । इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा/हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
  • राहुकाल (Rahukaal) : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक ।
  • सूर्योदय – प्रातः
  • सूर्यास्त – सायं
  • विशेष -दशमी को कलम्बी का सेवन नहीं करना चाहिए । बैंगन और नींबू नहीं खाना चाहिए ।
  • पर्व त्यौहार-
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

pandit-ji
आचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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Published By : Memory Museum
Updated On : 2020-04-28 10:21:55 PM

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2 COMMENTS

  1. क्या पंचांग जानने की सुविधा अग्रिम (पहली शाम को) संभव हो सकती है जिस से अगले दिन की दिनचर्या आपके सुझाव अनुसार शुरू करने के लिए आवश्यक सामग्री पहले से जुटाई का सके।
    वैसे भी ज्यादातर लोगों को नौकरी पेशे के लिए सुबह सवेरे ही घर से निकलना होता है, अतः यदि उन्हें अग्रिम जानकारी होगी तो वे कुछ क्रिया कलाप करके प्रस्थान करेंगे। यदि उन्हें पंचांग मिलेगा ही दोपहर में तो शायद ही कुछ संभव होगा।

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