Home गणेश उत्सव, Ganesh Utsav, Ganesh ji ke bare mein, गणेश जी के बारे में,

Ganesh ji ke bare mein, गणेश जी के बारे में,

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Ganesh ji ke bare mein, गणेश जी के बारे में,

गणेश जी के बारे में, Ganesh ji ke bare mein, आप कितना जानते है । हिंदु धंर्म शास्त्रो के अनुसार गणपति गणेश जी Ganesh ji आदि देव हैं जिनकी पूजा सबसे पहले की जाती है।
समस्त धार्मिक उत्सवों, मुण्डन, विवाहोत्सव आदि सभी शुभ अवसरों पर सभी कार्य निर्विघ्न सम्पन्न करने के लिए सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश जी Ganesh ji की पूजा ही की जाती है।

हिन्दू धर्म शास्त्रो के अनुसार जिस शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन के बिना होती है, उसका शुभफल मिलने की सम्भावना अत्यंत न्यून होती है ।

आइये हम आप को गणेश जी के बारे में, Ganesh ji ke bare mein, कुछ विशेष जानकारी देते है, जो शायद आप अभी तक नहीं जानते होंगे ।

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गणेश जी के रहस्य, Ganesh ji ke rahasy,

* गण का अर्थ होता है समूह और गणपति का अर्थ है उस समूह का अध्यक्ष। गणेश जी Ganesh ji का पूरा शरीर मानव का एवं सर हाथी का है।

* गणपति गणेश जी Ganesh ji विघ्नहर्ता अर्थात समस्त विघ्नों को दूर करने वाले एवं बुध्दि के देवता कहे जाते है।

* गणेश का अति सुन्दर शरीर अपने में कई गूढ़ और विशिष्ट अर्थ को संजोए हुए है।

* लम्बा उदर गणपति जी Ganpati Ji की असीमित सहन शक्ति का प्रतीक है।

* चार भुजाएं चारों दिशाओं में सर्वव्यापकता का धोतक हैं ।

* गणपति जी की छोटी-छोटी पैनी आंखें उनकी तीक्ष्ण दृष्टि,

* विघ्नहर्ता के बड़े-बड़े कान उनकी सुनने की अधिक शक्ति,

* और उनकी लम्बी सूंड तेज बुध्दि का प्रतीक है।

* गणेश जी का एक हाथ अभय की मुदा में उठा हुआ हाथ, जो संरक्षण का प्रतीक है – कि गणपति के भक्तो को घबराना नहीं चाहिए – क्योंकि गणपति सदैव अपने भक्तो के साथ है ।

गणेश जी Ganesh ji का दूसरा हाथ नीचे की तरफ है और हथेली बाहर की ओर है या इसमे लड्डू है – जो कहती है कि वह निरंतर हमें सुख समृद्धि Shukh Samriddhi दे रहे हैं।

* वह अपने दो हाथो में अंकुश और पाश को धारण किये हुए है । उनके एक हाथ में अंकुश जीवन में सजगता का प्रतीक है और और दूसरे हाथ में पाश जीवन में नियंत्रण को बताता है।

* गणेश जी Ganesh Ji का एक दाँत ही है जो कि एकाग्रचित होने को दर्शाता है इसलिए गणेश जी Ganesh Ji को एकदंत भी कहा जाता है। इसके पीछे एक कथा है।

माना जाता है कि एक बार परशुरामजी जी भगवान शिव Bhagwaan Shiv के दर्शन के लिए कैलाश पर्वत पर गए। उस समय भगवान भोले नाथ ध्यानमग्न थे अतः गणेश जी Ganesh Ji ने परशुरामजी को अंदर जाने से रोक दिया।

* तब क्रोधित हो कर परशुराम जी ने गणेश जी Ganesh Ji पर अपने फरसे से वार कर दिया। वह फरसा परशुराम जी को भगवान शिव ने ही दिया था, इसलिए उसका सम्मान रखने के लिए गणेश जी ने उस फरसे का वार अपने दांत पर झेल लिया, जिसके फलस्वरूप उनका एक दाँत टूट गया और वह एकदन्त कहलाये।

* गणेश जी Ganesh Ji चूहे की सवारी करते है । चूहा इस बात का प्रतीक है कि जो बंधन, जिस अज्ञानता में हम घिरे है, चूहा उसे कुतर कर, एक-एक परत को काट कर समाप्त कर देता है। चूहा हमें उस परम ज्ञान की ओर ले जाता है जिसका प्रतिनिधित्व गणेश करते हैं।

शास्त्रो में कई स्थानों में गणेश जी Ganesh Ji का वाहन सिंह,मयूर, मूषक और घोड़ा को बताया गया है ।

* सतयुग में भगवान गणेशजी का वाहन सिंह है और उनकी भुजाएं 10 हैं तथा इनका नाम विनायक है ।

* त्रेतायुग में भगवान विघ्नहर्ता का वाहन मयूर है, उनकी भुजाएं 6 हैं और रंग श्वेत कहा गया है इसीलिए इन्हें मयूरेश्वर के नाम से बुलाया गया है ।

* द्वापरयुग में श्री गजानन का वाहन मूषक है, उनकी भुजाएं 4 एवं रंग लाल हैं। इस लिए इस युग में गणेश जी Ganesh Ji गजानन नाम से प्रसिद्ध हैं ।

* कलियुग में गणपति जी Ganpati Ji का वाहन घोड़ा है, इनकी 2 भुजाएं और वर्ण धूम्रवर्ण है। इसीलिए कलयुग में उनका नाम धूम्रकेतु भी है।

* गणपति जी को रोली का तिलक लगाना चाहिए ।

* गणपति जी को लाल रंग के फूल अत्यंत प्रिय है ।

* भगवान गजानन दूर्वा और शमी पत्र चढ़ाने से अत्यन्त प्रसन्न होते है ।

* गणपति जी को बेसन के और मोदक के लड्डू बहुत ही पसंद हैं।

* ‘ॐ गं गणपतये नम:” मन्त्र का जाप करने से गणपति जी अपने भक्तो पर शीघ्र ही कृपालु होते है।

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