Sunday, October 2, 2022
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Hanuman jayanti, हनुमान जयंती, Hanuman Jayanti 2022,

Hanuman jayanti, हनुमान जयंती,

Hanuman Jyanti, हनुमान जयंती / हनुमान जन्मोत्सव, Hanuman janmotsav, हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है जो चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। अर्थात इस दिन पवन पुत्र हनुमानजी का जन्म माना जाता है।

माना जाता है की सुबह 4 बजे उन्होंने वानरराज केसरी और देवी अंजना के यहां माँ अंजना के कोख से जन्म लिया था । वे भगवान् शिव के 11 वें अवतार थे।

वर्ष 2022 में हनुमान जयन्ती, Hanuman Jyanti, 16 अप्रैल को शनिवार के दिन को मनाई जाएगी। हनुमान जी की रामभक्ति समूचे विश्च में विख्यात है।

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शास्त्रानुसार समुद्रमंथन के पश्चात भगवान शिव जी ने भगवान विष्णु का मोहिनी रूप देखने की इच्छा प्रकट की, जो उन्होनें समुद्र मंथन में देवताओँ और असुरोँ को दिखाया था। भगवान शिव विष्णु जी का उनका वह आकर्षक रूप देखकर काम के वश में उन्होंने अपना वीर्यपात कर दिया।
उसी समय वायुदेव ने भगवान शिव जी के बीज को वानर राजा केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया।

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और इस तरह अंजना जी के गर्भ से वानर रूप में हनुमान जी का जन्म त्रेतायुग के अन्तिम चरण में चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में सुबह 4 बजे हुआ था,
इसीलिए इस दिन को Hanuman Jyanti, हनुमान जयंती, के रूप में मनाया जाता है।

एक मान्यता के अनुसार इंद्र के राज्य में विराजमान वायुदेव ने ही माता अंजनी के गर्भ में हनुमानजी को भेजा था, इस कारण उन्हें वायुपुत्र एवं पवनपुत्र भी कहा जाता है।

ब्रह्मांडपुराण में हनुमान जी के पिता वानर राज केसरी और हनुमान जी के भाइयों के बारे में बताया गया है। इसमें हनुमान जी के पिता केसरी जी के कुल 6 पुत्र बताए गए हैं और सभी में बजरंगबली को सबसे बड़ा बताया गया है।

हनुमान जी के पांच भाइयों के नाम इस तरह हैं – मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान। इस ग्रंथ में इन सभी की संतानों का उल्‍लेख भी में क‍िया गया है।

कई शास्त्रों में महाभारत काल में पांडु पुत्र बलशाली भीम को भी हनुमान जी का ही भाई बताया गया है। चूँकि हनुमानजी पवन पुत्र है। और कुंती ने भी पवनदेव के माध्यम से ही भीम को जन्म दिया था। इसीलिए भीम हनुमान जी भाई माने जाते है।

वैसे तो हनुमान जी ब्रह्मचारी माने गए है विश्व में हर मंदिर में यह अकेले ही विराजमान है लेकिन सत्य यह है कि इनका विवाह भी हुआ था। इनका विवाह सूर्य देव की पुत्री सुवर्चला से हुआ था लेकिन फिर भी यह ब्रह्मचारी ही थे, उनका अपनी पत्नी के साथ कभी भी कोई सम्बन्ध नहीं रहा है।

ब्रह्मांडपुराण में हनुमान जी के पुत्र का वर्णन भी है जिसका नाम मकरध्वज बताया गया है।

इस का वर्णन बाल्मीकि रामायण में किया गया है उसके अनुसार जब अहिरावण धोखे से राम जी और उनके भाई लक्ष्मण जी का अपहरण कर उन्हें पाताल पुरी ले गया था, तब राम-लक्ष्मण जी को छुड़ाने के लिए हनुमान जी पाताल नगरी पहुंचे वहीँ हनुमान जी का सामना पाताल नगरी के द्वार पर अपने पुत्र मकरध्वज से होता है। जो पातालपुरी का द्वारपाल था और देखने में बिल्कुल वानर जैसा था।

मकरध्वज ने हनुमान जी को अपना परिचय देते हुए कहा कि मैं हनुमान पुत्र मकरध्वज हूं और इस पाताल नगरी का द्वारपाल हूं। इस पर हनुमान जी को क्रोध और अचम्भा दोनों ही आता है ।

क्योंकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे और कभी भी अपनी पत्नी से नहीं मिले नहीं थे तब वह पिता कैसे बने ? उनका पुत्र कैसे हुआ ? तब मकरध्वज उनको बताते है कि हनुमान जी जब लंका दहन कर रहे थे तब लंका नगरी में लगी आग की तेज ज्वाला की आंच से हनुमान जी को पसीना आने लगा।

उनके पूंछ में जो आग लगी थी उसआग को बुझाने के लिए हनुमान जी जब समुद्र में पहुंचे तब एक मछली ने अपने मुंह में उनके शरीर से टपकी पसीने की बूंद को ले लिया।

इससे वह मछली गर्भवती हो गयी और उसने एक वानर रूपी मानव अर्थात मुझे जन्म दिया। बाद में रावण के भाई अहिरावण ने मुझे पाताल लोक का द्वारपाल बना दिया।

बजरंग बलि को हनुमान नाम अपनी ठोड़ी के आकार के कारण मिला । संस्कृत में हनुमान का मतलब होता है बिगड़ी हुई ठोड़ी। इसी लिए पवनपुत्र हनुमान भी कहलायें जाते है।

राम भक्त हनुमान दुर्गा माँ के सेवक भी माने गए हैं। हनुमानजी माँ दुर्गा के आगे-आगे चलते हैं और भैरवजी उनके पीछे-पीछे। इसीलिए माँ दुर्गा के देश में जितने भी मंदिर है वहां उनके आसपास हनुमानजी और भैरवजी का मंदिर जरूर होते हैं।

वैसे तो हनुमान जी ने सूर्यदेव और नारदजी के अलावा बहुत से लोगो से शिक्षा ली थी लेकिन हनुमानजी मातंग ऋषि के शिष्य माने जाते थे। शास्त्रों के अनुसार मातंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमानजी का जन्म हुआ था। ऐसी मान्यता है श्रीलंका के जंगलों में मंतग ऋषि के वंशज आदिववासी से हनुमान जी प्रत्येक 41 साल बाद मिलने आते है।

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हनुमान जी को सिंदूर बहुत प्रिय है। हनुमान जी की कृपा पाने, किसी भी संकट से छुटकारा पाने के लिए हनुमान जंयती के दिन बजरंगबली को सिंदूर का चोला अवश्य चढ़ाएं। इससे बजरंगबली की कृपा से समस्त कार्यो में सफलता मिलती है। इस उपाय से शनि देव के प्रकोप में भी कमी आती है।

हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी को तुलसी और गुलाब की माला अर्पित करें, इस उपाय को करने से शनि – राहु – मंगल आदि ग्रहो के प्रकोप में भी कमी आती है।

हनुमान जयंती के दिन हनुमान मंदिर में लाल ध्वजा और पानी वाला नारियल अर्पित करें, ऐसा करने से सभी कार्य बनने लगते है कैरियर चमकने लगता है ।

आज के दिन मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके लाल पेड़े / बूंदी / या लड्डुओं का प्रशाद चढ़ाएं ।

हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से पूरे वर्ष के चोला चढ़ाने का फल मिल जाता है, इस लिए आज हनुमान जी को अवश्य ही चोला चढ़ाएं।

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