Saturday, December 5, 2020
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शरद पूर्णिमा, Sharad Purnima,

हिन्दु पंचांग के अनुसार हर मास की 15वीं तिथि है जिस दिन चंद्रमा आकाश में पूरा होता है पूर्णिमा purnima कहलाती है। वैसे तो हर माह में ही पूर्णिमा आती है लेकिन शरद पूर्णिमा Sharad Purnima का महत्व उन सभी से बहुत अधिक है।
आश्विन मास की पूर्णिमा Purnima को शरद पूर्णिमा Sharad Purnima कहा जाता हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों में भी इस पूर्णिमा Purnima का विशेष महत्व बताया गया है। वर्ष 2020 में शरद पूर्णिमा 30अक्तूबर दिन शुक्रवार को है ।

इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 30 तारीख को सांय 05 बजकर 45 मिनट से लग रही है, 31 तारीख को शरद पूर्णिमा तिथि पूरे दिन और रात के 08 बजकर 18 मिनट तक है ।

शरद पूर्णिमा, Sharad Purnima,

शरद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ : 30 अक्टूबर को सांय 05 बजकर 45 मिनट से
शरद पूर्णिमा तिथि समाप्त: 31 अक्टूबर को रात 08 बजकर 18 मिनट तक

कहा जाता है कि धन की देवी माता लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा sharad purnima के दिन हुआ था। इसलिए देश के कई हिस्सों में लोग शरद पूर्णिमा Sharad Purnima को पूर्ण श्रद्धा से माँ लक्ष्मी का पूजन करते है।
इस दिन प्रात: स्नान करके माँ लक्ष्मी को कमल का फूल एवं मिष्ठान अर्पण करके उनकी पूजा आराधना अवश्य ही करनी चाहिए जिससे उनका आशीर्वाद जीवन भर बना रहे । शरद पूर्णिमा के दिन सभी मनुष्यों को ध्यान, मन और विधि-विधान के साथ मां लक्ष्मी और भगवान श्री विष्णु की पूजा अवश्य जी करनी चाहिए ।

रास पूर्णिमा / कामुदी पूर्णिमा, Ras Purnima / Kamuda Purnima,

द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ तब मां लक्ष्मी राधा रूप में अवतरित हुई । शरद पूर्णिमा Sharad Purnima की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने बंसी बजाकर गोपियों को अपने पास बुलाया था और उनके साथ रास रचाया था इसीलिए शरद पूर्णिमा Sharad Purnima को ‘रास पूर्णिमा’ या ‘कामुदी महोत्सव’ भी कहा जाता है । अतः शरद पूर्णिमा Sharad Purnima की रात्रि का विशेष महत्व है ।

शरद पूर्णिमा के दिन सम्पूर्ण सृष्टि कृष्ण मय हो जाती है। इस दिन चंद्र देव अपनी सम्पूर्ण कलाओं से भरे इस रात में सभी को तृप्त करने में जुट जाते हैं। आज राधा-कृष्ण दोनों महारास खेलने में मग्न हो जाते हैं।

कृष्ण को अपना पति बनाने के लिए सभी गोपियाँ ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री माता कात्यायनी से प्रार्थना करती है। शरद पूर्णिमा की रात हुई तो चंद्रमा ने पूर्ण दर्शन दिए तो श्री कृष्ण जी ने अपनी बाँसुरी की मधुर तान छेड़ दी उस प्रेम रूपी रास के रस में भीगने की देवी-देवताओं में होड़ लग गयी। विरह में डूबी गोपियों भगवान श्री कृष्ण की बाँसुरी की तान में अपना सुध-बुध खोती चली गयी, आनंद से सरोबोर समय मानो ठहर गया था । शरद पूर्णिमा में अद्भुत थी कृष्णलीला । गोपियां अपने को धन्य मान रही हैं कि वो कान्हा के साथ थी और देवता गोपियों के भाग्य को देखकर आहें भर रहे थे ।

शरद पूर्णिमा के दिन भगवान कृष्ण गोपियों के संग धीरे-धीरे नृत्य, अठखेलियाँ कर रहे थे । क्या गोपियाँ, क्या देवता, सम्पूर्ण प्रकृति ही मदहोश हो गयी थी। भगवान विष्णु जी कृष्ण के रूप में सचमुच प्रकट हो गए थे। इसलिए कहते है शरद पूर्णिमा में ईश्वरीय शांति, प्रेम और आरोग्य सर्वत्र छाया रहता है।

कोजागरी पूर्णिमा, kojagiri purnima,

हिन्दु शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा Sharad Purnima की मध्य रात्रि के बाद मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर बैठकर धरती पर आती हैं। और यह देखती हैं कि उनका कौन भक्त रात में जागकर उनकी भक्ति कर रहा है। इसलिए शरद पूर्णिमा की रात Sharad Purnima ki raat को ‘कोजागरा’ kojagra अर्थात कोजागरी पूर्णिमा, kojagiri purnima भी कहा जाता है। कोजागरा Kojagra का अर्थ है कौन जाग रहा है।

कहते है कि जो जातक इस रात में जागकर मां लक्ष्मी की पूजा Maa laxmi ki puja अर्चना करते हैं मां लक्ष्मी की उन पर अवश्य ही कृपा होती है। ज्योतिषीयों के अनुसार भी जो इस रात को जागकर माता लक्ष्मी Mata Laxmi की उपासना करता है उसको मनवाँछित लाभ की प्राप्ति होती है और यदि उसकी कुण्डली में धन योग नहीं भी हो तब भी माता उन्हें धन-धान्य से अवश्य ही संपन्न कर देती हैं। उसके जीवन से निर्धनता का नाश होता है,
इसलिए धन की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति को इस दिन रात को जागकर अवश्य ही माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए ।

लक्ष्मी बीज मंत्र :- “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः”॥

श्री महालक्ष्मी मन्त्र : – “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:”॥

शरद पूर्णिमा Sharad Purnima की रात्रि में चन्द्रमा की चाँदनी का लाभ अवश्य ही उठाना चाहिए इससे वर्ष भर स्वस्थ बने रहते है, मन प्रसन्न रहता है।

मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कुमार कार्तिकेय का जन्म भी शरद पूर्णिमा के दिन ही हुआ था। इसलिए इसे कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है। कार्तिकेय जी की उपासना करने से कोर्ट-कचहरी, जमीन-जायदाद, वाद-विवाद आदि में सफलता मिलती है, राजनीती में श्रेष्ठ सफलता के लिए भी कार्तिकेय जी की आराधना परम फलदाई है। शरद पूर्णिमा Sharad Purnima के दिन कार्तिकेय जी के मन्त्र का जाप अवश्य ही करे।

“ॐ श्री स्कन्दाय नमः”।।

“ओम तत्पुरुषाय विधमहे:, महा सैन्या धीमहि , तन्नो स्कन्दा प्रचोद्यात:”।।

पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में इस दिन कुमारी कन्याएं प्रातः स्नान करके पूर्ण विधि विधान से भगवान सूर्य और चन्द्रमा की पूजा करती हैं। जिससे उन्हें योग्य एवं मनचाहा पति प्राप्त हो।

हिन्दु धर्म शास्त्रों में मान्यता है कि माँ लक्ष्मी को खीर बहुत प्रिय है इसलिए हर पूर्णिमा को माता को खीर का भोग लगाने से कुंडली में धन का प्रबल योग बनता है। लेकिन शरद पूर्णिमा Sharad Purnima के दिन माँ लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने का और भी विशेष महत्व है।

शरद पूर्णिमा Sharad Purnima को दूध और चावल की खीर बनायें और उसमें चीनी की जगह मिश्री को डालें । इस खीर में अपनी सामर्थ्य के अनुसार मेवा भी डाले, विशेषकर केसर तो अवश्य ही डालें ।

खीर बनाने के बाद इसमें कुछ देर के लिए चाँदी एवं सोने की कोई भी वस्तु डाल देनी चाहिए जिससे खीर में लौह, स्वर्ण एवं रजत के गुण भी आ जाते है जो शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक है ।

खीर को रात्रि 8 बजे तक बना कर साफ महीन कपडे से ढककर चन्द्रमा की चाँदनी में रखें, फिर रात्रि में या सुबह माँ लक्ष्मी को भोग लगाकर फिर स्वयं इस प्रशाद को ग्रहण करें । अगर रात में माँ को भोग लगाते है थोड़ी सी ही स्वयं भी खाएं, क्योंकि रात में मेवे की खीर पचाना आसान नहीं होगा ।

इस तरह से बनी खीर के सेवन से माँ लक्ष्मी की कृपा और निरोगिता प्राप्त होती है । घर परिवार के सदस्यों के बीच में प्रेम रहता है ।

माँ लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर फिर देवताओं के वैध अश्विनी कुमार से प्रार्थना करें की हे वैध राज हमारे शरीर की समस्त इन्द्रियों को पुष्ट करें, हमें सदैव स्वस्थ बनाये रखे, हमारा बल, वीर्य, तेज, ओज को बढ़ाइये। हमारे घर परिवार के सभी सदस्य आरोग्य और दीर्घ आयु को प्राप्त करें यह प्रार्थना करने के बाद खीर को ग्रहण करना चाहिए

ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा Sharad Purnima के दिन चंद्रमा की किरणों में विशेष अमृतमयी गुण भी होता हैं, जिससे बहुत सी बीमारियों का नाश हो जाता हैं। इसी कारण शरद पूर्णिमा Sharad Purnima की रात को लोग गाय के दूध की खीर बनाकर माता लक्ष्मी को भोग लगाकर उसे अपने घरों की छतों पर रखते हैं जिससे वह खीर चंद्रमा की किरणों के संपर्क में आ जाये और उसके बाद अगले दिन सुबह उसका सेवन किया जाता है।

इस खीर के सेवन से निरोगिता और दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है। इस दिन बहुत से भक्त खीर का प्रसाद भी वितरण करते है।

इस समय चंद्रमा की उपासना भी करनी चाहिए।

“ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:”

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नाम:

इस दिन तांबे के बरतन में देशी घी भरकर किसी ब्राह्मण को दान करने और साथ में दक्षिणा भी देने से बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है और धन लाभ की प्रबल सम्भावना बनती है। इस दिन ब्राह्मण को खीर, कपड़े आदि का दान भी करना बहुत शुभ रहता है ।

इस दिन श्रीसूक्त, लक्ष्मीसत्रोत का पाठ एवं हवन करना भी बेहद शुभ माना जाता है।

स्त्री को लक्ष्मी का रूप माना गया है अत: जो भी व्यक्ति इस दिन अपने घर की सभी स्त्रियों माँ, पत्नी, बहन, बेटी, भाभी, बुआ, मौसी, दादी आदि को प्रसन्न रखता है उनका आशीर्वाद लेता है, उनको यथाशक्ति उपहार देता है , माँ लक्ष्मी उस घर से कभी भी नहीं जाती है उस व्यक्ति को जीवन में किसी भी वस्तु का आभाव नहीं रहता है ।

इस दिन स्त्रियों का आशीर्वाद साक्षात माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद ही होता है, अत: उन्हें किसी भी दशा में नाराज़ नहीं करना चाहिए ।

शरद पूर्णिमा के दिन Sharad Purnima रात्रि में चन्द्रमा को एक टक ( बिना पलके झपकाये ) देखना चाहिए । इससे नेत्रों के विकार दूर होते है आँखों की रौशनी बढ़ती है ।

शरद पूर्णिमा Sharad Purnima के दिन रात को चन्द्रमा की चाँदनी में एक सुई में धागा अवश्य पिरोने का प्रयास, उस समय चन्द्रमा के प्रकाश के अतिरिक्त कोई भी और प्रकाश नहीं होना चाहिए। माना जाता है इस प्रयोग को करने से, अर्थात सुई में धागा सफलता पूर्वक पिरोने से वर्ष भर ऑंखें स्वस्थ रहती है ।

Published By : Memory Museum
Updated On : 2020-10-29 19:15:00 PM

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