Saturday, April 17, 2021
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सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai,

सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai,

सूर्य ग्रहण ( Surya grahan ) के अदभुत खगोलीय घटना है जो प्राय: प्रति वर्ष पूरी दुनिया में होती ही है, हमारे ज्योतिषियों को यह पता होता है कि सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai । कई बार कोई सूर्यग्रहण ( Suryagrahan ) विश्व के किसी हिस्से में दिखाई देता है कई बार किसी और जगह।

सूर्य ग्रहण Surya grahan सदैव अमावस्या को ही होता है। पृथ्वी अपनी कक्षा में सूरज की परिक्रमा करती है और चन्द्रमा भी अपनी कक्षा में ही पृथ्वी की परिक्रमा करता है। जब चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो सूर्य चन्द्रमा के पीछे कुछ समय के लिए छुप जाता है ढक जाता है, चन्द्रमा सूरज का आंशिक या सारा प्रकाश रोक लेता है जिससे धरती पर कुछ समय के लिए हल्का अंधकार फैल जाता है इसे ही सूर्य ग्रहण Surya grahan कहते है।

समान्यता सूर्य ग्रहण तीन तरह के होते है आंशिक सूर्य ग्रहण, पूर्ण सूर्य ग्रहण तथा वलयाकार सूर्य ग्रहण ।

1. जब चन्द्रमा, सूरज के थोड़े से हिस्से को ही ढ़कता है, अर्थात पृथ्वी से सूर्य का कुछ ही भाग दिखाई नहीं देता है तो उसे खण्ड- सूर्य ग्रहण या आंशिक सूर्य ग्रहण कहते है।

2. लेकिन जब कभी चन्द्रमा सूरज को पूरी तरह से ढँक लेता है, तो वह पूर्ण- सूर्य ग्रहण कहलाता हैं। पूर्ण-सूर्य ग्रहण पृथ्वी के बहुत कम हिस्से में ही दिखता है, ज़्यादा से ज़्यादा 250 किलोमीटरक्षेत्रमें। इस क्षेत्र के बाहर केवल आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिखाई देता है।
पूर्ण-ग्रहण के समय सूरज के सामने से चन्द्रमा को गुजरने में सिर्फ दो घण्टे लगते हैं तथा चन्द्रमा सूरज को पूरी तरह से, अधिक से अधिक, सात मिनट तक ही ढँक पाता है। इन कुछ मिनटों के लिए आसमान में अंधकार सा हो जाता है।

3. वलयाकार सूर्य ग्रहण में जब पृथ्वी के काफ़ी दूर रहते हुए चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात सूर्य को चन्द्रमा इस प्रकार ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता वरन सूर्य का बाहरी भाग प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता हुआ दिखाई देता है। तो कंगन के आकार में बने इस सूर्यग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते है।

हमारे ऋषि मुनियों , ज्योतिषियों ने अति प्राचीन काल से ही ग्रहण की बिलकुल सटीक गणना करना प्रारम्भ कर दी थी।

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सूर्य ग्रहण कब है, Sury Grahan Kab Hai

14 दिसंबर साल 2020 का अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा। यह खंडग्रास सूर्यग्रहण है, इस ग्रहण काल में सूर्य आंशिक रूप से ढका हुआ रहेगा। यह खंडग्रास सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार शाम 7.04 बजे से आरंभ होकर मध्य रात्रि 12.23 तक रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस सूर्य ग्रहण का असर भारत पर सीधा नहीं पड़ेगा।

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इस ग्रहण का मध्यकाल 09.45 बजे है वहीं, मोक्ष काल अर्थात ग्रहण की समाप्ति मध्य रात्री 12.23 बजे होगी। इस खंडग्रास सूर्य ग्रहण का असर प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, दक्षिणी अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका में पड़ेगा।
हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में नज़र नहीं आएगा लेकिन ग्रहण काल में कुछ सावधानियाँ अवश्य ही रखनी चाहिए, ग्रहण काल में भूल कर भी शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
ज्‍योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण विश्व के किसी भी कोने में क्यों ना हो ग्रहण काल में जप तप का अक्षय पुण्य मिलता है ।

वर्ष 2020 में पड़ने वाले ग्रहण, varsh 2020 men padne wale grahan,

पहला चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) :- वर्ष 2020 का पहला चंद्रग्रहण 10 जनवरी को लगा था, यह पूरे भारत में दिखाई दिया था ।

दूसरा चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) :- वर्ष 2020 का दूसरा चंद्र ग्रहण 5 जून को लगा था, यह चंद्रग्रहण भी पूरे भारत में देखा गया था।

तीसरा चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) :- वर्ष 2020 का तीसरा चंद्र ग्रहण 5 जुलाई को लगेगा । इस ग्रहण को भारत में देखा नहीं जा सकेगा क्योंकि जब यह चंद्रग्रहण होगा उस समय भारत में सूर्य देव उदय हो चुके होंगे।

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चौथा चंद्रग्रहण ( Chandra Grahan ) :- वर्ष 2020 का चौथा चंद्र ग्रहण 30 नवम्बर को लगेगा, इस ग्रहण को पूरे भारत में देखा जा सकेगा।

पहला सूर्यग्रहण ( surya grahan ) :- वर्ष 2020 का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून को लगेगा, यह सूर्य ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा।

दूसरा सूर्यग्रहण ( surya grahan ) :- वर्ष 2020 का दूसरा सूर्य ग्रहण है 14 दिसंबर को लगेगा, लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा ।

इस तरह वर्ष 2020 में जो 6 ग्रहण लगेंगे इसमें 4 ग्रहण भारत में नज़र आएंगे और दो ग्रहण भारत में नज़र नहीं आएंगे ।

पं मुक्ति नारायण पाण्डेय
( कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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