Monday, September 27, 2021
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सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai,

सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai,

सूर्य ग्रहण ( Surya grahan ) के अदभुत खगोलीय घटना है जो प्राय: प्रति वर्ष पूरी दुनिया में होती ही है, हमारे ज्योतिषियों को यह पता होता है कि सूर्य ग्रहण कब होता है, sury grahan kab hota hai । कई बार कोई सूर्यग्रहण ( Suryagrahan ) विश्व के किसी हिस्से में दिखाई देता है कई बार किसी और जगह।

सूर्य ग्रहण Surya grahan सदैव अमावस्या को ही होता है। पृथ्वी अपनी कक्षा में सूरज की परिक्रमा करती है और चन्द्रमा भी अपनी कक्षा में ही पृथ्वी की परिक्रमा करता है। जब चन्द्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो सूर्य चन्द्रमा के पीछे कुछ समय के लिए छुप जाता है ढक जाता है, चन्द्रमा सूरज का आंशिक या सारा प्रकाश रोक लेता है जिससे धरती पर कुछ समय के लिए हल्का अंधकार फैल जाता है इसे ही सूर्य ग्रहण Surya grahan कहते है।

समान्यता सूर्य ग्रहण तीन तरह के होते है आंशिक सूर्य ग्रहण, पूर्ण सूर्य ग्रहण तथा वलयाकार सूर्य ग्रहण ।

1. जब चन्द्रमा, सूरज के थोड़े से हिस्से को ही ढ़कता है, अर्थात पृथ्वी से सूर्य का कुछ ही भाग दिखाई नहीं देता है तो उसे खण्ड- सूर्य ग्रहण या आंशिक सूर्य ग्रहण कहते है।

2. लेकिन जब कभी चन्द्रमा सूरज को पूरी तरह से ढँक लेता है, तो वह पूर्ण- सूर्य ग्रहण कहलाता हैं। पूर्ण-सूर्य ग्रहण पृथ्वी के बहुत कम हिस्से में ही दिखता है, ज़्यादा से ज़्यादा 250 किलोमीटरक्षेत्रमें। इस क्षेत्र के बाहर केवल आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिखाई देता है।

पूर्ण-ग्रहण के समय सूरज के सामने से चन्द्रमा को गुजरने में सिर्फ दो घण्टे लगते हैं तथा चन्द्रमा सूरज को पूरी तरह से, अधिक से अधिक, सात मिनट तक ही ढँक पाता है। इन कुछ मिनटों के लिए आसमान में अंधकार सा हो जाता है।

3. वलयाकार सूर्य ग्रहण में जब पृथ्वी के काफ़ी दूर रहते हुए चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है अर्थात सूर्य को चन्द्रमा इस प्रकार ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता वरन सूर्य का बाहरी भाग प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता हुआ दिखाई देता है। तो कंगन के आकार में बने इस सूर्यग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते है।

हमारे ऋषि मुनियों , ज्योतिषियों ने अति प्राचीन काल से ही ग्रहण की बिलकुल सटीक गणना करना प्रारम्भ कर दी थी।

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सूर्य ग्रहण कब है, Sury Grahan Kab Hai

10 जून गुरुवार को साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा । सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में होगा। तीनों ग्रह एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होंगे। साल का पहला ग्रहण जो चंद्र ग्रहण था 26 मई को लगा था।
10 जून को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन ग्रहण के साथ शनि जयंती का भी योग बन रहा है। यह सूर्यग्रहण वृष राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगेगा।

शनि जयंती पर सूर्य ग्रहण का यह योग करीब 148 साल बाद बना है। इससे पहले 26 मई 1873 को शनि जयंती के दिन सूर्य ग्रहण हुआ था।

साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में बहुत ही कम जगह में नजर आएगा। यह सूर्य ग्रहण अंतिम समय में बेहद थोड़ी देर के लिए लद्दाख की उत्तर सीमाओं और अरुणाचल प्रदेश की दिबांग वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से शाम को तकरीबन 5 बजकर 52 मिनट पर दिखाई देगा।

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यह सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार दोपहर 1:42 बजे शुरू होकर शाम 6:41 बजे तक चलेगा। नासा के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कनाडा, ग्रीनलैंड और रूस के कई हिस्सों में ग्रहण दिखाई देगा। लेकिन अमरीका, ब्रिटेन, यूरोप के देशों में आंशिक ग्रहण ही दिखाई देगा।

10 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा अर्थात यह ‘रिंग ऑफ फायर’ की तरह दिखाई देगा, ऐसा इसलिए होगा क्योंकि इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी पर पहुंचने वाली सूर्य की पर्याप्त किरणों को रोक देगा। ऐसे में पृथ्वी से सूर्य का नजारा कुछ समय के लिए किसी चमकती अंगूठी की तरह नजर आएगा।

यह 2021 का पहला सूर्य ग्रहण है और इसके बाद 4 दिसंबर को ही दूसरा सूर्य ग्रहण पड़ेगा।

हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में नज़र नहीं आएगा लेकिन ग्रहण काल में कुछ सावधानियाँ अवश्य ही रखनी चाहिए, ग्रहण काल में भूल कर भी शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।
ज्‍योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण विश्व के किसी भी कोने में क्यों ना हो ग्रहण काल में जप तप का अक्षय पुण्य मिलता है ।

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इस साल 2021 चार ग्रहण लगेगें : इस साल में दो चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण लगने हैं।

पहला चंद्र ग्रहण 26 मई को बैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को लगा था। वह चंद्र ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण था।

10 जून दिन गुरुवार को साल का दूसरा ग्रहण जो सूर्य ग्रहण है लगना है। यह सूर्य ग्रहण ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती के दिन लगेगा । यह सूर्य ग्रहण दोपहर 1:43 बजे से शाम 6:41 बजे तक रहेगा।

19 नवंबर को साल का तीसरा ग्रहण जो चंद्र ग्रहण है लगेगा यह देश के असम और अरुणाचल प्रदेश व पूर्वाेत्तर भाग में समापन के दौरान दिखेगा। शाम 5:38 बजे से शाम 6: 31 बजे के बीच नजर आएगा। सूतक काल नहीं होगा।

इस साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण चार दिसंबर को लगेगा। दोपहर 2:43 बजे से शाम 5:41 बजे के बीच ग्रहण काल होने की संभावना है। यह सूर्य ग्रहण भी भारत में नहीं दिखेगा।

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पं मुक्ति नारायण पाण्डेय

( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

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