Sunday, January 24, 2021
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माघ पूर्णिमा, Magh Purnima,

माघ पूर्णिमा, Magh Purnima,

हमारे शास्त्रों में माघ में स्नान एवं व्रत की बड़ी महिमा बताई गई है उनमें भी माघ मास की पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा, Magh Purnima को बहुत महत्व दिया गया है। माघ मास की पूर्णिमा में तीर्थस्थलों में स्नान परम फलदायी माना गया है ।
माघ पूर्णिमा, Magh Purnima पर किए गए दान-धर्म और स्नान का विशेष महत्व होता है। हिन्दू पंचांग के मुताबिक ग्यारहवें महीने अर्थात माघ के महीने में धर्म-कर्म, स्नान, दान का विशेष महत्व है।

शास्त्रों के अनुसार कर्क राशि में चंद्रमा और मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होता है तब माघ पूर्णिमा, Magh Purnima का अति पवित्र योग बनता है। इस योग में स्नान के करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है।

वर्ष 2021 में माघ पूर्णिमा, Magh Purnima का पर्व 27 फ़रवरी शनिवार के दिन मनाया जायेगा ।

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माघ पूर्णिमा का महत्व, magh purnima ka mahatva,

ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा Magh Purnima पर खुद भगवान श्री विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इसके सन्दर्भ में यह भी मान्यता है कि माघ पूर्णिमा Magh Purnima तिथि में भगवान नारायण क्षीर सागर में विराजते हैं तथा गंगा जी क्षीर सागर का ही रूप है। अत: इस पावन समय में गंगाजल के स्पर्शमात्र से भी समस्त पापों का नाश हो जाता है।
कहते है इस दिन सूर्योदय से पूर्व जल में भगवान विष्णु का तेज रहता है जो हर तरह के पाप का नाश करता है। 

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने वाले जातक को धन, यश सुख-सौभाग्य, सुयोग्य संतान कि प्राप्ति होती है ।

पद्मपुराण के अनुसार भगवान विष्णु व्रत, उपवास, दान से भी उतने प्रसन्न नहीं होते, जितना अधिक प्रसन्न वह माघ मास में स्नान करने से होते हैं। माघ पूर्णिमा Magh Purnima के दिन स्नान करने वाले पर भगवान श्री विष्णु कि सदैव असीम कृपा रहती है। जातक को धन, यश  सुख-सौभाग्य, सुयोग्य संतान कि प्राप्ति होती है ।

शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व किसी प्रयाग में गंगा नदी / पवित्र नदी या घर में जल में गंगा जल डालकर स्नान करने से जो पुण्य मिलता है वह इस पृथ्वी पर 10 हज़ार अश्वमेघ यज्ञो के पुण्य से भी अधिक होता है।

शास्त्रो में कहा भी गया है कि ….
“मासपर्यन्त स्नानासम्भवे तु त्रयहमेकाहं वा स्नायात्‌ ” ।। –
अर्थात् जो मनुष्य स्वर्गलोक में स्थान पाना चाहते हैं, उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर तीर्थ स्नान अवश्य ही करना चाहिए।

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ज्योतिषों के अनुसार माघ मास स्वयं भगवान विष्णु का स्वरूप  है। कहते है कि यदि मनुष्य पूरे माघ माह में नियमपूर्वक स्नान ना कर पाया हो या उसने दान पुण्य नहीं किया हो तो भी माघी पूर्णिमा के दिन तीर्थ में स्नान करने, दान देने से संपूर्ण माघ मास के स्नान का पूर्ण फल प्राप्त होता है। 

इस पूर्णिमा Purnima के दिन किया गया महास्नान से समस्त रोगों और कष्टों का नाश होता है। माघ की पूर्णिमा के दिन स्नान दान और पुण्य का हजारों गुणा अधिक फल मिलता है।

 इस दिन स्नान, दान करते समय ओम नमः भगवते वासुदेवाय नमः का जाप अवश्य ही करते रहना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन तीर्थ, पवित्र नदी, समुद्र आदि में प्रातः स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य देकर, जप-तप करने के पश्चात सुपात्र को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान देने से सभी दैहिक, दैविक एवं भौतिक तापों से अवश्य ही मुक्ति मिलती है।

यदि तीर्थ, नदी में स्नान करना संभव ना हो पा रहा हो तो घर पर ही ब्रह्म मुहूर्त अथवा सूर्योदय से पहले जल में गंगा जल, आंवले का जूस / पाउडर और तुलसीदल डालकर अवश्य ही स्नान करना चाहिए । 

मान्यताओं के अनुसार जो तारों के छुपने से अर्थात ब्रह्म मुहूर्त पूर्व स्नान करते हैं, उन्हें अति उत्तम फल की प्राप्ति होती है।
तारों के छुपने के बाद किन्तु सूर्योदय से पूर्व के स्नान से मध्यम फल मिलता है।
किन्तु जो सूर्योदय के बाद स्नान करते हैं, वे उत्तम फल की प्राप्ति से वंचित रह जाते हैं।
अत: इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना ही श्रेयकर है ।

मान्यताओं के अनुसार  इन दिनों सभी देवता पृथ्वी पर आकर प्रयाग में स्नान-दान करने के साथ साथ मनुष्य रूप धारण करके भजन-सत्संग आदि करते हैं और माघ पूर्णिमा Magh Purnima के दिन सभी देवी-देवता अंतिम बार स्नान करके अपने लोकों को प्रस्थान करते हैं। अत: हर मनुष्य को इस दिन अनिवार्य रूप से स्नान करना चाहिए । 

माघ माह में स्नान का सबसे अधिक महत्व प्रयाग के संगम तीर्थ का माना जाता है । निर्णय सिंधु में कहा गया है कि माघ मास के दौरान मनुष्य को कम से कम एक बार तो पवित्र नदी में स्नान करना ही चाहिए। चाहे पूरे माह नदी में स्नान के योग न बन सकें लेकिन माघ पूर्णिमा Magh Purnima को किसी भी पवित्र नदी में स्नान से स्वर्गलोक का उत्तराधिकारी बना जा सकता है।

माघ पूर्णिमा Magh Purnima के अवसर पर भगवान सत्यनारायण जी की कथा करने का विशेष महत्त्व है । इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में केले के फल, पत्ते, पंचामृत, सुपारी, पान, शहद, मिष्ठान,  तिल, मोली, रोली, कुमकुम, दूर्वा का उपयोग किया जाता है। भगवान सत्यनारायण की पूजा के लिए दूध, शहद, गंगाजल, तुलसी पत्ता, मेवा मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है।

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इस दिन आटे को भून उसमें चीनी मिलाकर चूरमे का प्रसाद बनाया जाता है और भगवान को इसका भोग लगता है। सत्यनारायण की कथा के बाद उनका पूजन / गायन होता है। और अंत में आरती के बाद प्रसाद और चरणामर्त बाँटा जाता है। इस तरह भगवान की आराधना से भगवान श्री विष्णु और माँ लक्ष्मी की असीम कृपा की प्राप्ति होती है । 

इस दिन भगवान शंकर की पूजा विशेष फलदायी होती है । इस दिन शिवलिंग पर शहद चढ़ाते हुए गंगा जल व दूध मिले पवित्र जल से स्नान कराएं ।इस शहद स्नान के बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर चंदन, फूल, शमी पत्र , बिल्वपत्र, अक्षत व मिठाई का भोग लगाकर भगवान शिव की धूप, दीप व कर्पूर से आरती करें। इससे भगवान भोले नाथ की कृपा से सभी प्रकार के संकट/कष्ट दूर हो जाते है । परिवार में निरोगिता एवं सदस्यों को दीर्घ आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है ।


इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा आराधना भी अत्यंत पुण्य प्रदान करने वाली कही गयी है । शास्त्रों के अनुसार माघ माह में भगवान श्री कृष्ण की भक्ति से हर्ष, सुख न समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।
माघ पूर्णिमा Magh Purnima के दिन प्रात: भगवान श्रीकृष्ण को गंगाजल और पंचामृत स्नान कराकर उन्हें गंध, सुगंधित फूल, अक्षत, मीठा पान, पीले फल, नारियल और पीले वस्त्र चढ़ाएं । भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। तत्पश्चात सुगंधित धूप और दीप प्रज्जवलित कर श्री कृष्ण के मंत्रों ऊँ नमो भगवते नन्दपुत्राय ।। ऊँ नमो भगवते गोविन्दाय ।। अथवा ऊँ कृष्णाय गोविन्दाय नमो नम: ।। से उनकी आराधना करें ।


उत्तर भारत में प्रयाग में प्रतिवर्ष माघ मेला Magh Mela लगता है। इनमें हजारों, लाखों भक्त गंगा-यमुना के संगम स्थल पर माघ मास में पूरे तीस दिनों तक (पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक) कल्पवास करते है। और यहाँ पर पूरे माह नियम से नित्य प्रात: स्नान करके जप तप और दान करते हुए पुण्य प्राप्त करते है ।

ऐसी मान्यता है कि इस मास में जरूरतमंदों को सर्दी से बचने योग्य वस्तुओं, जैसे- ऊनी वस्त्र, कंबल, आग तापने के लिए लकडी तिल और घी आदि का दान करने से अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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माघ पूर्णिमा के दिन Magh Purnima Ke Din सुवर्ण, तिल, कम्बल, पुस्तकें, पंचांग, वस्त्र, घी, अन्न आदि के दान से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है । मत्स्य पुराण के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा Purnima में जो भी व्यक्ति सुपात्र ब्राह्मण को दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।

माघ मास में काले तिलों से हवन और पितरों का तर्पण करना चाहिए। इस दिन तिल के दान का विशेष महत्त्व माना गया है। माघ पूर्णिमा का दिन मृत पुर्वजो के लिए पुण्य स्नान करने का आख़िरी दिन हैं। इस दिन पितरों का तिल से तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।  


इसका महात्म्य के विषय में भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिïर को बताया था कि इस दिन स्नान-दान, पितरों के तर्पण व सूर्य देव को अर्ध्य देने तथा गर्म वस्त्रों का दान करने से व्यक्ति बैकुण्ठ में जाता है।

 इसी तिथि को भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण-त्याग किया था। इस दिन उनके निमित्त स्नान-दान तथा माधव पूजा करने से सब पाप नष्ट होते हैं और पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है।

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Published By : Memory Museum
Updated On : 2021-01-22 08:35:00 PM

पं० कृष्णकुमार शास्त्री

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