Sunday, September 26, 2021
Home Akshaya Tritiya अक्षय तृतीया का महत्व, Akshaya Tritiya Ka Mahatwa,

अक्षय तृतीया का महत्व, Akshaya Tritiya Ka Mahatwa,

अक्षय तृतीया का महत्व, Akshaya Tritiya Ka Mahatwa,

हिन्दू धर्म शास्त्रों में अक्षय तृतीया का महत्व, Akshaya Tritiya Ka Mahatwa, बहुत ही अधिक बताया गया है।

  • “न क्षयति इति अक्षय” अर्थात जिसका कभी क्षय न हो उसे अक्षय कहते हैं और वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया, Akshaya Tritiya के नाम से जाना जाता है। इसी दिन भगवान परशुरामका जन्म होने के कारण इस दिन परशुराम जयंती parshuram jayanti मनाई जाती है।
  • अक्षय तृतीया, Akshaya Tritiya के दिन गंगा-स्नान करने एवं भगवान श्री कृष्ण को चंदन लगाने से है।
  • मान्यता है कि इस दिन जिनका परिणय-संस्कार होता है उनका सौभाग्य अखंड रहता है। इस दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान करने, श्री सूक्त के पाठ के साथ हवन करने का भी विधान है।

    शास्त्रों के अनुसार इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा करने से माँ अवश्य ही कृपा करती है जातक को अक्षय पुण्य के साथ उसका जीवन धन-धान्य से भर जाता है।
  • जो मनुष्य इस दिन गंगा स्नान/ पवित्र नदियों में स्नान करता है, उसे समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। यदि घर पर ही स्नान करना पड़े तो सूर्य उदय से पूर्व उठ कर एक बाल्टी में जल भर कर उस में गंगा जल मिला कर स्नान करना चाहिए । 

इस कारण से अक्षय तृतीया है का है अत्यधिक महत्त्व, हर हिन्दू को अवश्य ही जानना चाहिए

  • इस दिन भगवान श्रीकृष्ण / श्री विष्णु जी की पूजा , होम-हवन, जप, दान करने के बाद पितृतर्पण भी अवश्य ही करना चाहिए। इस दिन जल में तिल, अक्षत, गंगा जल, शहद, तुलसी डाल कर देवताओं और पितरो का तर्पण करने से पितृ अति प्रसन्न होते है, उनका आशीर्वाद मिलता है।
  • तिल अर्पण करते समय भाव रखना चाहिए कि ‘हम यह ईश्वर द्वारा सद्बुद्धि देने, कृपा के कारण ही कर पा रहे है। अर्थात तर्पण के समय साधक के मन में किसी भी तरह अहंकार नहीं आना चाहिए।
  • अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्‍णु के छठें अवतार कहे जाने वाले भगवान परशुराम जी का जन्‍म महर्षि जमदाग्नि और माता रेनुकादेवी के घर हुआ था। इसी कारण अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जी एवं भगवान विष्‍णु की उपासना की जाती है।
  • मान्यता है कि इस दिन राजा भागीरथ की घोर तपस्या के बाद मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरीत हुई थीं और राजा भागीरथ के सभी पूर्वजो को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी । इस दिन पवित्र गंगा में डूबकी लगाने से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
  • शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही माँ पार्वती ने देवी अन्नपूर्णा के रूप में अवतार लिया था तथा भगवान शिव ने उनसे भिक्षा प्राप्त की थी। इसी से प्रसन्न होकर देवी अन्नपूर्णा संपूर्ण ब्रह्मांड का भरण-पोषण करने लगी थी।
    मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव को भोग लगाने से उस जातक पर देवी अन्नपूर्णा की सदैव कृपा बनी रहती है।
  • अक्षय तृतीया के दिन मां अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी मनाया जाता है। इसीलिए इस दिन गरीब, असहायों को खाना खिलाने से बहुत पुण्य की प्राप्ति होती है।

अक्षय तृतीया पर मात्र 10 रुपये की इस खरीददारी से घर में सुख समृद्धि चुम्बक की तरह खींची चली आएगी,

  • अक्षय तृतीया के अवसर पर ही म‍हर्षि वेदव्‍यास जी ने महाभारत लिखना शुरू किया था। महाभारत को हिंदू धर्म शास्त्रों में पांचवें वेद के रूप में माना जाता है। महाभारत में ही श्रीमद्भागवत गीता भी समाहित है।
  • अक्षय तृतीया के दिन श्रीमद्भागवत गीता के 18 वें अध्‍याय का पाठ अवश्य ही करना चाहिए। इस दिन गीता के 18 वें अध्‍याय का पाठ करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • यह भी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही धर्मराज युधिष्ठर को ‘अक्षय पात्र’ की प्राप्ति भी हुई थी। ‘अक्षय पात्र’ की विशेषता यह थी कि इसमें भोजन कभी भी समाप्त नहीं होता था।
  • लेकिन महाभारत के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने 5 पांडवों की पत्नी द्रौपदी को पांडवों के अज्ञातवास के दौरान ‘अक्षय पात्र’ भेंट किया था। इस पात्र के माध्यम से जब भी जितनी मात्रा में भोजन चाहिए होता है वह चमत्कारिक ढंग से प्राप्त हो जाता था।
  • अक्षय तृतीया Akshaya Tritiya के दिन भगवान विष्णु को सत्तू का भोग लगाया जाता है और प्रसाद में इसे ही बांटा जाता है। इस दिन प्रत्येक मनुष्य सत्तू अवश्य खाना चाहिए।
  • आज के दिन भगवान विष्णु को मिश्री और भीगी हुई चने की दाल का भोग लगया जाता है ।
  • इस दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है।
  • इसी दिन श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं।
  • नर-नारायण ने भी इसी दिन अवतार लिया था।
  • श्री परशुरामजी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था।
  • हयग्रीव का अवतार भी इसी दिन हुआ था।
  • वृंदावन के श्री बांकेबिहारीजी के मंदिर में केवल इसी दिन श्रीविग्रह के चरण-दर्शन होते हैं अन्यथा पूरे वर्ष वस्त्रों से ढंके रहते हैं।
  • शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीय के दिन ही भगवान कृष्ण और सुदामा का मिलन हुआ था और सुदामा का भाग्य बदल गया था।

अक्षय तृतीया के दिन दान द्वारा अर्जित पुण्य लिखने में तो स्वयं चित्रगुप्त भी असमर्थ है। जानिए अक्षय तृतीया के दिन क्या दान करें

  • ब्रह्मा जी के पुत्र श्री अक्षय कुमार का आज ही के दिन अवतरण हुआ था ।
  • आज ही के दिन कुबेर देव को अतुल ऐश्वर्य की प्राप्ति हुई थी वह देवताओं के कोषाध्यक्ष बने थे ।
  • इस दिन गंगा-स्नान /नदी सरोवर में स्नान करने तथा भगवान श्री कृष्ण को चंदन लगाने का विशेष महत्व है।
  • अक्षय तृतीया Akshaya Tritiya के दिन ही गणेश जी ने भगवान व्यास के साथ इसी दिन से महाभारत लिखना शुरू किया था।
  • इस दिन महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए विशेष अनुष्ठान किये जाते है। इस दिन श्री सूक्त , लक्ष्मी सहस्त्रनाम का पाठ करने से माँ लक्ष्मी यथाशीघ्र प्रसन्न होती है, जातक धन-धान्य से परिपूर्ण हो ऐश्वर्य को प्राप्त करता है।
  • शास्त्रों के अनुसार आज अक्षय तृतीय के दिन ही महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था ।
  • शुभ व पूजनीय कार्य इस दिन होते हैं, जिनसे प्राणियों (मनुष्यों) का जीवन धन्य हो जाता है।
  • भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि यह तिथि परम पुण्यमय है। इस दिन दोपहर से पूर्व स्नान, जप, तप, होम, स्वाध्याय, पितृ-तर्पण तथा दान आदि करने वाला महाभाग अक्षय पुण्यफल का भागी होता है।
  • इस दिन भगवान बद्रीनाथ को अक्षय (साबुत ) चावल चढ़ाने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
  • इस दिन अपने सामर्थ के अनुसार अपने माता पिता ,बड़े बुजुर्ग और अपने गुरु को उपहार देकर उनका आशीर्वाद अवश्य ही लेना चाहिए , उनके साथ कुछ समय भी बिताना चाहिए ।
    इस दिन मिला हुआ आशीर्वाद वरदान साबित होता है , और जीवन में सच्चे ह्रदय से मिले आशीर्वाद का कोई भी मोल नहीं है ।

जानिए क्या है अक्षय तृतीया Akshaya Tritiya का महत्व, akshaya tritiya ka mahtv, अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है, akshay tritiya kyu manayen jate hai, अक्षय तृतीया के दिन क्या करें, akshaya tritiya ke din kya karen

अक्षय तृतीया Akshaya Tritiya पर यह ना करें,
Akshay tritya par yah na Karen,

  • भविष्य पुराण में बताया गया है कि अक्षय तृतीया के दिन व्यक्ति जो भी काम करता है उसका परिणाम इस जन्म में ही नहीं बल्कि कई-कई जन्मों तक प्राप्त होता है।

इसलिए अक्षय तृतीया के दिन कुछ भी करने से पहले यह सोच लें कि आप जो कर रहे हैं उसका परिणाम क्या होगा।

  • अक्षय तृतीया के दिन लालच के कारण किसी को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं,क्रोध या हिंसा करते है किसी का तिरस्कार करते है या काम वासना से पीड़ित होकर कोई गलत काम करते है तो इसका कष्टकारी परिणाम भी आपको कई जन्मों तक भुगतना पड़ता है।

ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष, वास्तु विशेषज्ञ )

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

शनि अमावस्या, shani amavasya,

शनि अमावस्या, shani amavasya,जब शनिवार के दिन अमावस्या ( Amavasya ) का समय हो जिस कारण इसे शनि...

5 मिनट में गोरा होने का उपाय, 5 minute me gora hone ke upay,

झुर्रियां हटाने के उपाय, Jhurriyan hatane ke upay,5 मिनट में गोरा होने का उपाय, 5 minute me gora...

Ekadashi ke upay, एकादशी के उपाय,

Ekadashi ke upay, एकादशी के उपाय,एकादशी ( Ekadashi )...

दुर्गा वीसा यंत्र, Durga Visha Yantra,

दुर्गा वीसा यंत्र, Durga Visha Yantra,हे माँ शेरोवाली आप अपने भक्तो की सभी दिशाओं से रक्षा करते हुए...
Translate »