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अक्षय तृतीया २०२०

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अक्षय तृतीया

“न क्षयः इति अक्षयः —–अर्थात जिसका क्षय ना हो वह है अक्षय”।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमास और सौरमास के अनुसार तिथियों का घटना-बढ़ना, क्षय होना होता ही है, लेकिन तृतीया तिथि का कभी भी क्षय नहीं होता। तृतीया तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता पार्वती जी हैं।

मान्यता है कि यदि किसी को किसी भी अच्छे कार्य के लिए कोई शुभ मुहुर्त नहीं मिल पा रहा हो उसके कार्यों में लगातार अड़चने आती है, व्यापार में घाटा होता है तो उनके लिए कोई भी नई शुरुआत करने के लिए शुभ कार्य, लाभ का कार्य करने का अक्षय तृतीया Akshaya Tritiya का दिन बेहद शुभ माना जाता है। ।

यह दिन नया चांद आने के तीसरे दिन आता है ,इसलिए इसे तृतीया कहते हैं। पौराणिक कथा और ग्रंथों की मानें तो इस दिन आप जो भी शुभ कार्य करते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इस खास दिन को अक्षय तृतीया कहा जाता है। अक्षय तृतीया नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों को दान करने का महापर्व है। हिंदू कैलंडर में अक्षय तृतीया को एक शुभ दिन के तौर पर गिना जाता है।

अक्षय तृतीया वह शक्तिशाली समय है जिसमें मनुष्य को स्थायी धन-संपदा को प्रदान करने की शक्तियाँ निहित हैं। वर्ष में एक बार बैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को आने वाले इस विशेष दिन में कुछ आसान उपायों से राजसी सत्ता व समस्त सांसारिक सुखो को निश्चय ही प्राप्त किया जा सकता है।

अक्षय तृतीय के दिन ग्रहों का एक विशेष संयोग बनता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही अपनी उच्च राशि में होते है, ऐसा खास संयोग साल में सिर्फ एक दिन आज ही के दिन बनता है। इस पवित्र दिन सूर्य, मेष में और चंद्रमा वृषभ में होता है।

इस दिन सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति एकजुट होकर चलते हैं, जो हर तरह के काम के लिए शुभ मुहूर्त माना जाता है। यही वजह है कि लोग इस दिन को किसी नए सामान की खरीदारी और इन्वेस्टमेंट के लिए अच्छा मानते हैं। खरीदने के साथ ही कोई चीज दान करना भी इस दिन पुण्य बटोरने व समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है। इसे आखा तीज भी कहते हैं। इस दिन घर में हवन पूजा और पितरों को श्राद्ध देना भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

अक्षय तृतीया Akshaya Tritiya का पर्व वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार 2020 में अक्षया तृतीया का पर्व 26 अप्रैल को मनाया जायेगा ।

अक्षय तृतीया पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त – 05:42 से 12:16

तृतीया तिथि प्रारंभ: 11:50 बजे (25 अप्रैल 2020)

तृतीया तिथि समापन: 13:21 बजे (26 अप्रैल 2020)


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सर्वार्थ सिद्धि योग किसी शुभ कार्य को करने का बहुत ही शुभ मुहूर्त होता है। अक्षया तृतीया के दिन पड़ने वाले इस मुहूर्त में शुक्र अस्त, पंचक, भद्रा आदि पर विचार करने की जरूरत नहीं होती है।

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अक्षया तृतीया को सोने, चाँदी के आभूषण, वाहन, भूमि, मकान, आदि खरीदने किसी नए निवेश, पूजा पाठ और दान का विशेष लाभ मिलेगा। अक्षय तृतीया के दिन गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार का भी विशेष महत्त्व है। इस दिन विवाह के फेरे लेने के लिए रात 2: 02 से 3.55 बजे तक का समय उत्तम है।

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पुराणों के अनुसार अक्षय तृतीया पर दान-धर्म करने वाले व्यक्ति को वैकुंठ धाम में जगह मिलती है। इसीलिए इस दिन को दान का महापर्व भी माना जाता है।
इस दिन नए कार्य शुरू करने के लिए इस तिथि को शुभ माना गया है। भगवान विष्णु को सत्तू का भोग लगाया जाता है और प्रसाद में इसे ही बांटा जाता है।

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इस शुभ दिन के दौरान दानपुण्य का तो अक्षय फल मिलेगा ही। भूमि, भवन, वाहन ,सोने चांदी , बर्तन और कपड़े की खरीदारी भी शुभ फलदायी साबित होगी। 

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इस दिन अपने सामर्थ के अनुसार अपने माता पिता ,बड़े बुजुर्ग और अपने गुरु को उपहार देकर उनका आशीर्वाद अवश्य ही लेना चाहिए । इस दिन मिला हुआ आशीर्वाद वरदान साबित होता है । 

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इस दिन सुबह भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा  के बाद ब्राह्मणों को जल से भरे घडे़, पंखे, खड़ाऊं,  खरबूजा, छाता आदि का दान करना चाहिए। इस दिन गरीबों को भोजन, शरबत, दूध पिलाना चाहिए।

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माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान परलोक में सुख और आनंद प्रदान करता है।

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मनुष्य इस दिन किए गए दान पुण्य से अगले जन्म में धनवान और सुखी होता है।

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अक्षय तृतीया के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है।

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इस दिन स्नान करके जौ का हवन, जौ का दान, सत्तू को खाने से मनुष्य के सब पापों का नाश होता है।

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इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति पर चंदन या इत्र का लेपन भी किया जाता है।

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महिलाएं इस दिन शिव मंदिर जाकर गले में लाल धागा और माथे पर सिंदूर लगाकर पति की लंबी उम्र के लिए दुआ मांगती हैं।

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माना जाता है कि कोई व्यक्ति लंबे वक्त से बीमार चल रहा है, तो उसके तकिए के नीचे नीम की पत्तियां रखकर उन्हें इस दिन शिव मंदिर में चढ़ाने से लाभ मिलता है।

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माना जाता है कि इस दिन त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। इस युग की आयु 12,96,000 साल रही।

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इसी युग में भगवान श्री वामन, भगवान श्री परशुराम एवं भगवान श्री राम ने अवतार लिया।

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इसी विलक्षण योग में बद्रीनाथ के पट खुलते हैं। इस दिन पूर्ण बलि स्वार्थ सिद्ध योग रहता है।

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इस दिन सोने- चांदी की खरीद और दान- पुण्य सबसे अधिक शुभ फल देने वाला होता है।

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पाण्डुलिपियों और शास्त्रों में उल्लेख है कि पर्व के दिन भगवान श्रीकृष्ण चरण दर्शन करने से बद्रीनाथ धाम के दर्शनों का पूरा फल श्रद्धालु को मिलता है।

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कहा जाता है कि इस खास दिन पर आप जितना दान-पुण्य करते हैं, आपको उससे कई गुना ज्यादा आपको रिटर्न मिलता है।

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कहा जाता है कि अपने धन को बढ़ाने का यह एक शुभ दिन है और इसी बात में यकीन करते हुए सोना खरीदने का प्रचलन शुरू हो गया, वरना शास्त्रों में इस दिन सोना खरीदने का कोई उल्लेख नहीं मिलता।

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एक पुरातन कथा तो यह भी है कि आज के ही दिन भगवान शिव से कुबेर को धन मिला था और इसी खास दिन भगवान शिव ने माता लक्ष्मी का धन की देवी का आशीर्वाद भी दिया था।

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