Sunday, October 17, 2021
Home Hindi वास्तुशास्त्र पूर्व दिशा के घर का वास्तु, purav disha ke ghar ka vastu,

पूर्व दिशा के घर का वास्तु, purav disha ke ghar ka vastu,

पूर्व दिशा के घर का वास्तु, purav disha ke ghar ka vastu,

जिस घर / भूखण्ड का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की तरफ हो वह पूर्व दिशा के घर, purav disha ke ghar कहे जाते है। पूर्व दिशा, के घर / भूखण्ड उस में निवास करने वालो के लिए अति उत्तम माने जाते है।

पूर्व दिशा भगवान सूर्य की मानी जाती है। इस दिशा के स्वामी देवराज इन्द्र हैं। पूर्व दिशा के घर का वास्तु, purav disha ke ghar ka vastu, अगर ठीक हो तो वहां पर निवास करने वाले जीवन में बहुत ऊंचाइयों को प्राप्त करते है ।

पूर्व दिशा के भवन में सूर्योदय के समय सबसे पहले सूर्य की किरणे प्रवेश करती है। इसका शुभ प्रभाव भवन स्वामी एवं उसकी संतानो पर विशेष रूप से रहता है।

पूर्व दिशा के घर, purav disha ke ghar, भूखंड बुद्धिजीवियों वर्ग जैसे अर्थात शिक्षकों, लेखकों, छात्रों, दार्शनिकों, अध्यापको आदि के लिए विशेष रूप से उत्तम माने जाते है।

पूर्व दिशा के भवन में पूर्व दिशा को सबसे अधिक खुला रखना चाहिए। इससे सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। लेकिन ऐसे भूखण्ड पर निर्माण करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का सदैव ध्यान रखना चाहिए, वरना स्वास्थ्य, धन हानि एवं विवाद- मुकदमेबाजी का भय बना रहता है,

इन उपायों से जानलेवा कोरोना वाइरस रहेगा दूर, कोरोना का जड़ से होगा सफाया,

जानिए, पूर्व दिशा के घर का वास्तु, purav disha ke ghar ka vastu, पूर्व दिशा का वास्तु, purav disha ka vastu, पूर्वोन्मुखी वास्तु, Purab Mukhi vastu, भूखण्ड का वास्तु, Bhukhand ka vastu ।

पूर्व दिशा के वास्तु टिप्स, purav disha ke vastu tips,

* पूर्व दिशा के भवन में मुख्य द्वार पूर्व अथवा ईशान कोण में होना सर्वोत्तम रहता है।
इस तरह के भवन में भूले से भी मुख्य द्वार आग्नेय कोण में ना बनवाएं इस दिशा में द्वार होने से मकान में चोरी, वाद विवाद एवं न्यायलय से परेशानी का डर होता है ।

* पूर्व मुखी भवन में मुख्यद्वार के अतिरिक्त अन्य द्वार भी पूर्व, उत्तर या ईशान की ओर ज्यादा से ज्यादा बनाने चाहिए ।भवन में खिड़कियाँ भी ज्यादा से ज्यादा इस दिशा की ओर होनी चाहिए इससे भवन के निवासियों का स्वास्थ्य ठीक रहता है ।

* पूर्व मुखी भवन में मुख्य द्वार के बाहर ऊपर की ओर सूर्य का चित्र या प्रतिमा अवश्य ही लगानी चाहिए इससे सदैव शुभता की प्राप्ति होती है ।

* इस दिशा के भवन में पूर्व व उत्तर दिशा में स्थान छोड़कर निर्माण करें।
भवन का पूर्वी, उत्तरी एवं ईशान में ज्यादा स्थान रिक्त होना चाहिए इससे वहाँ के रहने वालो को धन संपत्ति, उत्तम स्वास्थ्य का लाभ मिलता है । उस भवन में सन्तान अच्छी समझदार एवं आज्ञाकारी होती है ।

मधुमेह से है परेशानी तुरंत करें ये उपाय, मधुमेह से मिलेगा छुटकारा,

* पूर्व मुखी भवन के उत्तर, पूर्व में कम से कम सामान ही रखने चाहिए और ईशान कोण में तो मंदिर बनाना अति उत्तम रहता है।
इसके विपरीत दक्षिण, नैत्रत्य दिशा के वाले भाग में कक्ष बनाकर वहां पर भारी सामान रखना श्रेयकर होता है।

* इस भवन में पूर्व और उत्तर का निर्माण दक्षिण और पश्चिम के निर्माण से सदैव नीचा रहना चाहिए ।
अर्थात दक्षिण और पश्चिम सदैव ऊँचा रहना चाहिए । इससे वंश वृद्धि होती है घर में हर उल्लास के वातावरण के साथ सदैव पॉजिटिव ऊर्जा रहती है ।
लेकिन इसका उलटा होने पर अर्थात पूर्व और उत्तर के निर्माण के ऊँचे और दक्षिण और पश्चिम के निर्माण के नीचे होने पर धन, स्वास्थ्य की हानि होती है । संतान अस्वस्थ और मंदबुद्धि हो सकती है ।

* पूर्व मुखी भवन में ढाल सदैव पूर्व और उत्तर की ओर ही होनी चाहिए ।
अर्थात उत्तर और पूर्व सदैव दक्षिण और पश्चिम से नीचा होना चाहिए । इससे सुख सौभाग्य के साथ साथ धन, यश और निरोगिता की भी प्राप्ति होती है। घर के सदस्यों के मध्य प्रेम बना रहता है ।

* यदि भवन स्वामी पूर्व दिशा में चारदीवारी के समीप में अपने भवन में कोई निर्माण करता है तो उसे निर्माण की दीवार पूर्व में तीन चार फुट खाली स्थान छोड़कर बनानी चाहिए।

* यदि भवन में उत्तर दिशा में निर्माण कराना हो अथवा भवन का निर्माण उत्तर दिशा के भवन से मिला हो तो उस दीवार से लगभग 3 – 4 इंच छोड़कर एक नई 3 – 4 मोटी दीवार बनाने से बहुत लाभ मिलता है।लेकिन यह दीवार दक्षिण एवं पश्चिम की दीवार से नीची ही होनी चाहिए ।

इस उपाय से शरीर रहेगा निरोगी, शक्ति रहेगी भरपूर, बुढ़ापा पास भी नहीं आएगा, जानिए रोगनाशक दिव्य आहार

* यदि भवन के दक्षिण और पश्चिम में चारदीवारी अथवा दूसरे भूखण्ड से मिला हुआ निर्माण कार्य कराया जाता है तो वह बहुत ही लाभप्रद होता है । लेकिन याद रहे इस दिशा का निर्माण उत्तर और पूर्व से ऊँचा ही होना चाहिए।

* भवन में पूर्व दिशा में बने बरामदा और पोर्टिको की छत पूर्व की ओर ही झुकी होनी चाहिए, इससे भवन स्वामी को धन, यश और सफलता की प्राप्ति होती है।

* भवन में प्रयोग किये गए जल का निकास पूर्व, उत्तर अथवा ईशान की तरफ ही होना श्रेयकर होता है । इससे सुख समृद्धि एवं अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है ।
ध्यान रहे कि पानी की निकासी किसी भी दशा में दक्षिण, पश्चिम अथवा नैत्रत्य में नहीं होनी चाहिए अन्यथा इसके गंभीर परिणाम हो सकते है ।

* भवन में पूर्व दिशा में बने बरामदा और पोर्टिको की छत पूर्व की ओर ही झुकी होनी चाहिए, इससे भवन स्वामी को धन, यश और सफलता की प्राप्ति होती है।

* यदि भवन एक मंजिल से ज्यादा का बनाना हो तो उसकी प्रत्येक मंजिल पर पूर्व, उत्तर एवं ईशान का भाग रिक्त अवश्य ही छोड़ना चाहिए । यदि पूरे भवन में ही निर्माण किया जाना हो तो इन दिशाओं में प्रत्येक मंजिल पर कम से कम दो फिट की बालकनी अवश्य ही बनवानी चाहिए ।

अवश्य पढ़ें :- घर के बैडरूम में अगर है यह दोष तो दाम्पत्य जीवन में आएगी परेशानियाँ, जानिए बैडरूम के वास्तु टिप्स

* भवन के पूर्वी भाग में कूड़ा कचरा, कोई टीले , मलबा इत्यादि नहीं होना चाहिए , अन्यथा धन, यश की हानि होती है और संतान का स्वास्थ्य भी ख़राब रहता है ।
अत: इस दिशा को सदैव साफ ही कराते रहना चाहिए ।
लेकिन यह यदि भवन की ऊँचाई से दोगुने से भी ज्यादा दूरी पर हो तो कोई दोष नहीं होता है ।

सुनील परदल
वास्तु विशेषज्ञ

पूर्व दिशा, purav disha, पूर्व दिशा के घर का वास्तु, purav disha ke ghar ka vastu, पूर्व दिशा का वास्तु, purav disha ka vastu, पूर्व दिशा के वास्तु टिप्स, purav disha ka vastu, पूर्व दिशा का वास्तु कैसा हो, purav disha ka vastu kaisa ho, पूर्व दिशा का वास्तु कैसा होना चाहिए, purav disha ka vastu kaisa hona chahiye,

Published By : Memory Museum
Updated On : 2021-06-04 06:00:55 PM

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

पीपल के उपाय, Pipal ke Upay,

पीपल के उपाय, Pipal ke Upay,हिन्दू धर्म में पीपल के पेड़ का बड़ा महत्व है, मान्यता...

हनुमान जयंती के उपाय

हनुमान जयंती 2020 Hanuman Jayanti 2020प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जयंती Hanuman jayanti,...

सर्दियों में खान पान, sardiyon men khan paan,

सर्दियों में खान पान, sardiyon men khan paan,6. बाजरा:- कुछ अनाज ऐसे है जो सर्दी में शरीर को...

रेस्टोरेंट का वास्तु, restaurant ka vastu,

रेस्टोरेंट का वास्तु, restaurant ka vastu,वर्तमान समय में घर से बाहर खाने का बहुत चलन हो गया...
Translate »