Sunday, October 2, 2022
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Nag Panchami, नाग पंचमी, Nag Panchami 2022,

Nag Panchami, नाग पंचमी, नाग पंचमी 2022,

सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है।  इस वर्ष 2022 को नाग पंचमी का पर्व 2 अगस्त मंगलवार के दिन मनाया जाएगा।

पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता (Nag Devta) हैं, नाग पंचमी (Nag Panchami) का पर्व नागों की पूजा के लिए मनाया जाता है। 

भारतीय संस्कृति में नागों को देवता मानते हुए उनका पूजन किया जाता है। नाग पंचमी के दिन नाग दर्शन का विशेष महत्व है।

भगवान भोलेनाथ जी ने नाग को अपने गले में धारण किया हुआ हैं, विघ्नहर्ता गणेश जी ने नाग को जनेऊ के रूप में धारण किया है, वहीं भगवान श्री विष्‍णु जी शेषनाग की शैय्या पर सोते हैं।

साँप सामान्यतया किसी को बिना कारण नहीं काटता है । वह अपने को परेशान करने वाले को या छेड़ने वालों को ही डंसता है। भारत देश एक कृषि प्रधान देश है, हमारे देश की एक बहुत बड़ी जनसँख्या कृषि कार्य में लगी हुई है।

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सांप हमारे खेतों का रक्षण करता है, वह फसल को नुकसान पहुँचाने वाले जीव-जंतु, चूहे आदि का नाश करके हमारे खेतों की फसल को बचाता है। इसलिए सांपो को क्षेत्रपाल भी कहते हैं। साँप को सुगंध बहुत ही प्रिय है। साँप चंपा के पौधे से लिपटकर रहते है एवं चंदन के वृक्ष उनका निवास स्थान है।

नागपंचमी के दिन Nagpanchami ke din धरती को खोदना मना है। इस दिन भगवान शंकर एवं नागों की पूजा Nagon ki puja में सफेद कमल रखा जाता है।

* नाग पंचमी के दिन (Nag Panchami ke Din) पूजन के लिए सेंवई, चावल आदि ताजा भोजन बनाना चाहिए। लेकिन भारत के कुछ भागों में नागपंचमी (Nag Panchami) से एक दिन भोजन बना कर रख लेते है और नागपंचमी nag panchami के दिन बासी खाना ही खाया जाता है।


* भारत के बहुत से हिस्सो में प्राचीन मान्यताओं के अनुसार लोग नाग पंचमी के दिन (Nag Panchami Ke Din) दीवाल पर गेरू पोतकर उसके ऊपर कच्चे दूध में कोयला घिसकर उससे घर जैसा बनाकर उसमें अनेक नागदेवों की तस्वीर बनाते हैं।


* कुछ जगहों पर सोने, चांदी, लकड़ी व मिट्टी की कलम से हल्दी व चंदन की स्याही से या गोबर से घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ पांच फन वाले नागदेवता की तस्वीर को अंकित करके उसे पूजते हैं।

नाग देवता का मन्त्र :-

ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्।।

* नाग पंचमी के दिन नागो के अति पवित्र और पुण्यदायक नामो…
1. अनंत (शेषनाग ), 2. वासुकि, 3. तक्षक, 4. कर्कोटक, 5. पद्म, 6. महापद्म, 7. शंख, 8. कुलिक, 9. धृतराष्ट्र और 10. कालिया
का उच्चारण करने से सम्पूर्ण वर्ष की पंचमी की पूजा का फल मिल जाता है ।

* नाग पंचमी के दिन नागो के पौराणिक नाम “अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटल, पिंगल” का कम से कम 11 बार उच्चारण या एक माला का जाप अवश्य ही करें।

* नाग पंचमी के दिन सुई धागे का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

* नाग पंचमी के दिन लोहे के बर्तनों में खाना बनाने और खाने की भी मनाही है ।

tripathi-ji
कुंडली एवं वास्तु विशेषज्ञ
पंडित पंडित ज्ञानेंद्र त्रिपाठी जी
Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

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