Wednesday, April 24, 2024
Homediwali, dipawaliभाई दूज कैसे मनाएं, Bhai dooj kaise manayen, भाई दूज 2023,

भाई दूज कैसे मनाएं, Bhai dooj kaise manayen, भाई दूज 2023,

भाई दूज कैसे मनाएं, Bhai dooj kaise manayen,

गोवर्धन पूजा के अगले दिन भाई दूज या यम दीतिया मनाई जाती है । यह पांच दिवसीय दीपावली के पर्वो में अंतिम पर्व होता है। भाई दूज हिन्दुओं का बहुत ही प्रमुख पर्व है यह जानना अति आवश्यक है कि शास्त्रों के अनुसार भाई दूज कैसे मनाएं, Bhai dooj kaise manayen, ।

इस दिन प्रत्येक पुरुष को अपनी बहिन के घर भोजन करना चाहिए, अगर सगी बहन न हो तो रिश्ते की किसी भी बहन के यहाँ भोजन करना चाहिए।

इस दिन प्रत्येक व्यक्ति यदि विवाहित है तो अपनी पत्नी सहित अपने बहन के यहाँ जाये प्रेम से भोजन करें उसके बाद यथाशक्ति  अपनी बहन को भेंट दें और तिलक कराएँ तो उसके सौभाग्य में वृद्धि होती है।

इस दिन सभी बहनों को अपने भाइयों को शुभ महूर्त में तिलक लगाकर उनके दीर्घायु की कामना करनी चाहिए ।

जानिए, भाई दूज कैसे मनाएं, Bhai dooj kaise manayen, भाई दूज 2023, Bhai dooj 2023, भाई दूज का महत्व, Bhai Dooj Ka Mahatva,

इस दिन के लिए स्वयं यमराज ने कहा है की “जो व्यक्ति आज के दिन यमुना में स्नान करके बहन के घर पूर्ण श्रद्धा से अपने तिलक करवाएंगे अपनी बहन को पूर्णतया संतुष्ट करेंगे उसके हाथ से बनाया भोजन प्रेम पूर्वक करेंगे वे कभी भी अकाल मर्त्यु को प्राप्त करके मेरे दरवाजे को नहीं देखेंगे ।”

अवश्य पढ़ें :- जानिए वास्तु शास्त्र के अनुसार कैसा रहना चाहिए आपका बाथरूम, अवश्य जानिए बाथरूम के वास्तु टिप्स

 यमराज जी कहते है की इस  दिन किसी भी पुरुष को अपने घर में किसी भी दशा में भोजन नहीं करना चाहिए ।

श्री सूर्य भगवान ने तो यहाँ तक कहा है की जो मनुष्य यम दीतिया के दिन बहन के हाथ का भोजन नहीं करता है उसके साल भर के सभी पुण्य नष्ट हो जाते है

आविवाहित  बहन के होने पर उसी बहन के हाथों का ही बना भोजन करना चाहिए ।

सनतकुमार संहिता में कहा गया है की जो स्त्री कार्तिक शुक्ल पक्ष की दीतिया को अपने भाई को आदरपूर्वक बुलाकर सुरुचि पूर्वक भोजन कराती है तथा भोजन के बाद उसे पान खिलाती है वह सदा सुहागन रहती है, साथ ही ऐसी बहन के भाई को भी दीर्घ आयु की प्रप्ति होती है

इस लिए इस दिन बहन के हाथों से पान जरुर खान चाहिए ।

दिवाली पर माँ लक्ष्मी को लगाएं इन चीज़ो का भोग, सुख – समृद्धि की नहीं होगी कभी कमी, अवश्य जानिए माता लक्ष्मी के प्रिय भोग

अवश्य पढ़ें :- गुस्सा बहुत आता है, बिलकुल भी नियंत्रण नहीं रहता है तो गुस्सा दूर करने के लिए अवश्य करें ये उपाय


ऐसी मान्यता है कि भाईदूज के दिन बहन और भाई के प्रेम को देखकर धर्मराज यम प्रसन्न होते हैं।

ऐसी मान्यता भी है कि इसी दिन पूरे ब्रह्मांड का हिसाब किताब रखने वाले भगवान चित्रगुप्त का जन्म हुआ था। इसीलिए इस दिन कलम दवात की पूजा का भी बहुत महत्व है।

*भाई दूज शुभ मुहूर्त, Bhai Dooj Ka Shubh Muhurth*

वर्ष 2023 में दीपावली का पर्व 12 नवम्बर रविवार को मनाया जायेगा, लेकिन अमावस्या तिथि 13 नवम्बर दोपहर 2.58 तक होने के कारण गोवर्धन पूजा का पर्व 14 नवम्बर को और भाई दूज का पर्व उदया तिथि के अनुसार 15 नवम्बर बुधवार को मनाया जायेगा ।

वर्ष 2023 में भाई दूज का पर्व 14 नवम्बर मंगलवार को मनाया जाय या 15 नवम्बर बुधवार को इसको लेकर बहुत भ्रांतियां है।

वर्ष 2023 में अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 14 नवम्बर को दोपहर 02 बजकर 38 मिनट से आरंभ होगी जो अगले दिन 15 नवम्बर को दोपहर 1 बजकर 49 मिनट तक रहेगी ।

15 नवम्बर को उदयातिथि में द्वितीया तिथि होने के कारण इस दिन ही भाई दूज का पर्व मनाना श्रेयकर रहेगा ।

*15 नवम्बर का भाई दूज का शुभ मुहूर्त, 15 November ka Bhai Dooj Ka Shubh Muhurth*

बुधवार 15 नवम्बर को भाई दूज का शुभ पूजा : 10 बजकर 35 मिनट से 12 बजकर 05 मिनट तक

लाभ की चौघड़िया में सुबह 6 बजकर 43 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक बहन से टीक लगवाने का पहला शुभ मुहूर्त है ।

अमृत की चौघड़िया में सुबह 8 बजकर 4 मिनट से 9 बजकर 4 मिनट तक, बहन से टीक लगवाने का दूसरा शुभ मुहूर्त है ।

शुभ की चौघड़िया में सुबह 10 बजकर 35 मिनट से 12 बजकर 05 मिनट तक, बहन से टीक लगवाने का तीसरा शुभ मुहूर्त।

चर की चौघड़िया में दोपहर 3 बजे से शाम 4.30 बजे तक,

लाभ की चौघड़िया में शाम 4.30 से शाम 6 बजे तक

बुधवार को दोपहर 12.00 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक राहुकाल है, राहुकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।


इस दिन बहनें घर के आंगन को गोबर से लीप कर अपने भाइयों को लकड़ी की चौकी / स्टूल / कुर्सी पर बैठाकर उसके माथे पर रोली का  तिलक लगाकर उसपर खील या अक्षत लगाती है, टीका लगवाते समय भाइयों का मुंह पूरब दिशा की तरफ होना चाहिए। 

कहीं कहीं पर भाइयों की आरती उतारने, उनके दाहिने हाथ  में कलावा बांधने की भी परंपरा है। बहन मंत्र पढ़ते हुए अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर अपने हाथ से उन्हें मीठा खिलाती है। 

लिंग पूरण में वर्णित है की जो कन्या / स्त्री इस दिन अपने भाई का पूजन करके उसको तिलक नहीं लगाती है उसका सम्मान नहीं करती है वह सात जन्म तक बिना भाई के ही रहती है ।

यदि इस दिन बहन के घर जाना सम्भव ना हो तो किसी नदी भी के तट पर या गाय माता को अपनी बहिन मानकर उसके समीप भोजन करना पुण्यदायक रहता है।

शास्त्रों के अनुसार भाई दूज / यम द्वितीया के दिन जो भाई-बहन यमुना नदी या किसी भी नदी में स्नान करते हैं उन्हें यमराज का भय नहीं होता है, नरक के दर्शन नहीं होते है।

*भाई दूज का मंत्र:*


गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को।
सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें, फूले-फलें।। 


शास्त्रों के अनुसार तिलक लगवाकर भाई को अपनी बहन को वस्त्र, आभूषण या दक्षिणा देकर प्रसन्न करना चाहिए और बहन के चरण स्पर्श कर उससे आशीर्वाद लेना चाहिए। बहन छोटी हो या बड़ी उसके चरण स्पर्श करके उसका आशीर्वाद अवश्य ही लेना चाहिए। 

इस दिन बहने संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर अपने घर के बाहर रखती हैं।  

ऐसी मान्यता है कि यह करने से सौभाग्य प्राप्त होता है। इस दिन सांय काल यमराज को दीपक समर्पित करते हुए आसमान में चील उड़ता दिखाई देना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बहनें अपनी भाई की लंबी आयु की जो कामना करती है उसे चील यमराज के पास जाकर उन्हें सुनाते है।

इसी दिन सायं काल घर को दीपकों से सजाकर 5 दिवसीय दीपावली के पर्व का समापन हो जाता है

This image has an empty alt attribute; its file name is Pandit-Mukti-Narayan-Pandey-Ji-1.jpeg

ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )

Pandit Ji
Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Translate »