Monday, August 3, 2020
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मौनी अमावस्या | मौनी अमावस्या का महत्त्व

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मौनी अमावस्या

हिन्दू धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्त्व है। माघ माह की शुक्ल पक्षकी अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता हैं। इस दिन मौन रहकर यमुना /गंगा किसी पवित्र नदी , जलाशय अथवा घर में जल में तिल और गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए। माघ मास की अमावस्या और पूर्णिमा दोनों ही तिथियाँ पर्व कही गयी हैं। लेकिन माघ मास के स्नान का सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण पर्व मौनी अमावस्या के स्नान का माना गया है,
जानिए मौनी अमावस्या, Mauni amavasya,मौनी अमावस्या का महत्त्व, Mauni Amavasya ka Mahtv ।

‘मौनी’ का अर्थ मुनि है। इसलिए इस दिन इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को या स्नान से पहले मौन रहने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। यदि यह अमावस्या सोमवार के दिन हो तो इसका महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

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माघ मास को भी कार्तिक मास के समान पुण्य मास कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार सागर मंथन से धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उस अमृत कलश को प्राप्त करने के लिए देवों व असुरों के बीच हुई खींचातानी से अमृत की कुछ बूंदें छलक कर प्रयाग, हरिद्वार नासिक व उज्जैन में जा गिरि थी। इसी लिए इन स्थानों पर कुंभ का पर्व मनाया जाता है। इसमें प्रयाग में लगने वाले कुम्भ में सवसे श्रेष्ठ स्नान माघी अमावस्या का ही कहा गया है।

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मान्यतानुसार माघ में पड़ने वाली मौनी अमावस्या के दिन पवित्र संगम तीर्थ में तैंतीस कोटी देवताओं का निवास होता है इसलिए माघ अमावस्या पर संगम में स्नान से अमृत स्नान का पुण्य मिलता है। मौनी अमावस्या के दिन प्रातः गंगा नदी / पवित्र नदी या घर में जल में गंगा जल डाल कर स्नान करने से पितृदोष से, गृहक्लेश से मुक्ति मिलती है, सभी तरह के संकटो एवं दुर्घटना से रक्षा होती है।
इसीलिए इलाहबाद मे गंगा के तट पर इस भक्त जन एक मास तक कुटी बनाकर कल्प वास करके पुण्य अर्जित करते हैं।

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मान्यता यह है कि मौनी अमावस्या के दिन हिन्दुओं की सबसे पवित्र नदी गंगा मैया का जल अमृत बन जाता है। शास्त्रों में कहा गया है सत युग में जो पुण्य तप से मिलता है, द्वापर युग में हरि भक्ति से, त्रेता युग में ज्ञान से, कलियुग में दान से पुण्य मिलता है, वहीँ माघ मास में संगम स्नान वह भी मौनी अमावस्या का स्नान हर युग में अन्नंत पुण्यदायी होगा।

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मान्यता यह भी है कि यदि कोई मौन ना रह पाए तो वह अपने मन मस्तिष्क में किसी भी प्रकार का मैल न आने देने, किसी को भी कोई कटुवचन न कहे , तब भी मौनी अमावस्या का पूर्ण पुण्य प्राप्त होगा है।

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एक मान्यता ऐसी भी है कि इस दिन मनु ऋषि का भी जन्म हुआ था जिसके कारण भी इस दिन को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है।

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शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन किये गए उपाय अति शीघ्र सफल होते है और मौनी अमावस्या के दिन तो इन उपायों का और भी महत्त्व है।

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मौनी अमावस्या के दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व जल में काले तिल और गंगाजल डाल कर स्नान करने से बहुत अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है कुंडली के ग्रह शुभ फल देने लगते है।

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मौनी अमावस्या के दिन प्रात: जल में दूध, काले तिल, अक्षत और सफ़ेद पुष्प डाल कर पितरो का तर्पण करने से पितरो सो स्वर्ग में स्थान मिलता है, पितरो का पूर्ण आशीर्वाद मिलता है।

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मौनी अमावस्या के दिन पितरो के निमित एक ब्राह्मण को अपने घर में भोजन कराएं। इससे पितृ प्रसन्न होते है, जीवन के सभी संकट दूर होते है, पितरो के शुभाशीष से जातक को किसी भी चीज़ का आभाव नहीं होता है।

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मौनी अमावस्या पर सुबह स्नान आदि करने के बाद शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर कच्चा दूध या पंचामृत से अभिषेक करते हुए चांदी से निर्मित नाग-नागिन की पूजा करें फिर इसे सफेद पुष्प के साथ बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इससे कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से निश्चित ही राहत मिलती है।

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मौनी अमावस्या के दिन शिव परिवार, माँ लक्ष्मी जी को चावल की खीर का भोग लगाने से धन-सम्पत्ति के भण्डार भरते है। खीर पितरो को भी अति प्रिय है अत: इस दिन पितरो के निमित भी इस खीर को किसी दोने में डालकर पीपल के वृक्ष के नीचे अवश्य ही रखवाएं।

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इस दिन किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक, भगवान शंकर की आरधना करने से निश्चय ही सभी मनोरथ पूर्ण होगी ।

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मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, घी, कम्बल, चावल, वस्त्रादि किसी गरीब ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान देने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है।

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मौनी अमावस्या के दिन प्रात: पीपल के वृक्ष पर जल में दूध, काले तिल, गुड़ मिलाकर चढ़ाएं और 7 परिक्रमा करें एवं सांय काल प्रदोष काल में पीपल के वृक्ष के नीचे कड़वे तेल / तिल के तेल का दीपक जलाएं। इससे कुंडली की ग्रह बाधाओं का निवारण होता है।

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मौनी अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद लगातार भगवान का नाम लेते हुए आटे की गोलियां बनाएं। इसके बाद समीप के किसी भी तालाब या नदी में जाकर मछलियों को यह आटे की गोलियां खिला दें। इस उपाय से जीवन की अनेको परेशानियों का अंत हो सकता है।

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मौनी अमावस्या के दिन चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से पापो का नाश होता है पुण्य बढ़ते है। समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

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मौनी अमावस्या के दिन सांय काल घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। उसमें बत्ती में रूई के स्थान पर लाल रंग के कलावे / मोली / धागे का प्रयोग करें, साथ ही उस दीपक में थोड़ी-सी केसर भी अवश्य डाल दें। ऐसा करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती है , उस घर में सुख समृद्धि की कोई भी कमी नहीं होती है।

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मौनी अमावस्या के दिन किसी सूखे कुएं या गहरे गड्ढे में में दूध डाले , इससे सेहत ठीक रहती है, रोग निकट भी नहीं आते है।

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मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन किसी भूखे को भोजन कराने से जो पुण्य मिलता है वह पुण्य जन्म जन्मांतर तक अक्षय होता है, अत: इस दिन किसी भूखे को भोजन अवश्य ही करवाएं या किसी गरीब असहाय की मदद अवश्य करें।

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अगर किसी जातक को बहुत मानसिक परेशानियाँ रहती है तो वह मौनी अमावस्या के दिन दूध में अपनी छाया देखकर उस दूध को किसी दोने में डालकर काले कुत्ते को पिलाएं। इससे सभी तरह की मानसिक परेशानियां अवश्य ही दूर होती है।

Published By : Memory Museum
Updated On : 2020-01-01 01:55:55 PM

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