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गणेश यन्त्र | गणेश मंत्र | Ganesh mantra

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गणेश मंत्र
Ganesh Mantra

मन्त्र –ॐ गण गणपतये नम: ।।

मन्त्र –वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा ।

मन्त्र –शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥

गणेश गायत्री मन्त्र –“ऊँ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि,
तन्नो दन्ती: प्रचोदयात्”॥

गणेश कुबेर मंत्र –“ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा”॥

इस गणेश कुबेर मन्त्र Kuber Mantra का नित्य जाप करने से किसी तरह का आर्थिक संकट नहीं आता है, आय के नए नए स्रोत्र खुलते है, भाग्य प्रबल होता है, किसी भी तरह का कर्ज नहीं रहता है ।

लक्ष्मी विनायक मंत्र — “ॐ श्रीं सौम्याय सौभाग्याय गं गणपतये
वर वरद सर्वजनं मे वशमानाय स्वाहा”॥

गणपति जी के इस गणेश मन्त्र Ganesh Mantra का जप करने से कारोबार में वृद्धि होती है, आर्थिक पक्ष मजबूत होता है, सुख – सौभाग्य की प्राप्ति होती है ।

“ॐ वक्रतुंडाय हुम्”॥

गणेश जी Ganesh Ji का व्यक्तित्व उनकी महिमा सचमुच बहुत ही अनूठी है। परम ज्ञानी, शीघ्र प्रसन्न होने वाले और विघ्नहर्ता श्री गणेश Shri Ganesh का वाहन मूषक है।

इनकी दो पत्नियां ऋद्धि-सिद्धि हैं। इनकी पुत्री कलयुग में पूजनीय संतोषी माता हैं। किसी भी कार्य को करने से पूर्व इनकी अराधना जरुर की जाती है ताकि कार्य निर्विघ्न रूप से संपन्न हो जाये इसलिए इन्हें श्री गणेश Shri Ganesh भी कहते हैं।

गणपति को ‘दूर्वा’ और ‘मोदक’ बहुत ही ज्यादा प्रिय हैं। भगवान श्री गणेश Shri Ganesh स्वयं मंगल ग्रह हैं इसलिए इनके भक्तों का इस विश्व में कौन अमंगल कर सकता है|

इनकी भक्ति करने से साधक की हर बाधा का निवारण और उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है उसे विद्या,ज्ञान तथा पुत्र की प्राप्ति होती है और समस्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

भगवान गजानन को आदि ज्योतिषी भी कहा गया हैं। इसका उल्लेख स्कंद पुराण में आया है। प्रभु शिवजी की आज्ञा से वह एक ज्योतिषी रूप में काशी नगरी के प्रत्येक घर में जाकर इन्होने लोगो का भविष्य बताया था इसलिए ज्योतिष कार्यों में उनका स्मरण एवं उल्लेख परम आवश्यक है। इनकी भक्ति करने से साधक को जीवन में किसी भी चीज़ का आभाव नहीं रहता है उसे जीवन के सभी सुख एवं सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है ।


भगवान एकदंत के अति पूज्य चौदह नाम
भगवान श्री गणेश Bhgawaan Shri Ganesh बुद्धि के देवता कहे जाते है । हिन्दू धर्म के अनुसार सवर्प्रथम इनकी ही पूजा की जाती है। जो भी जातक प्रभु गजानन के चौदह पवित्र नामो का प्रतिदिन एक बार भी नाम लेता है उसे मनवांछित फलों की अवश्य ही प्राप्ति होती है। भगवान एकदंत के अति पूज्य चौदह नाम नीचे दिए गए है।

  1. 1. विनायक
  2. 2. गजानन
  3. 3. गणेश
  4. 4. लंबोदर
  5. 5. एकदंत
  6. 6. वक्रतुंड
  7. 7. विघ्नराज
  8. 8. भालचंद्र
  9. 9. गणाधिप
  10. 10. विकट
  11. 11. हेरंब
  12. 12. कृष्णपिंगाक्ष
  13. 13. आखुरघ
  14. 14. गौरीपुत्र।

जो व्यक्ति भगवान श्री गणेश Bhagwaan Shri Ganesh की प्रति दिन इन 14 नामों का उच्चारण करके पूजा अर्चना करता है, उसे इस लोक में हर प्रकार की सुख सम्रद्धि प्राप्त होती है, उसे किसी भी प्रकार का संकट छू भी नहीं पाता है ।


जीवन में कई बार ऐसा भी समय आता है जब व्यक्ति बहुत परिश्रम करता है, धर्म में भी उसकी आस्था होती है, कोई बुरे कार्य भी नहीं करता है फिर भी उसे उचित फलप्राण नहीं होते है, जीवन में लगातार संघर्ष बना रहता है , ऐसे समय में हम यंत्रों और पूजा पाठ का सहारा लेते है । मनुष्य की हर परेशानी के हल के लिए, हर इच्छा की पूर्ति के लिए अलग – अलग यंत्रों की सहायता ली जाती है । किसी भी मनुष्य के लिए इस तमाम यंत्रों की स्वयं स्थापना और शास्त्रानुसार रखरखाव कर पाना नामुमकिन सा है । लेकिन अब विश्व में पहली बार इस साईट में अनेकों दुर्लभ सिद्ध यंत्रों की प्राण प्रतिष्ठा की गयी है । इस साईट पर दिए गए सभी यंत्रों को योग्य ब्राह्मणों द्वारा शास्त्रानुसार पूर्ण विधि विधानुसार इस तरह से जप, यज्ञ, द्वारा सिद्ध करके प्राण प्रतिष्ठित किया गया है जिससे सभी व्यक्तियों को ( चाहे वह किसी भी धर्म को मानने वाले हो) निश्चित ही अभीष्ट लाभ की प्राप्ति हो । तो अब आप भी इन अत्यंत दुर्लभ यंत्रों का अवश्य ही लाभ उठायें ।

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