Monday, September 13, 2021
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शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो, उस दिन से नव संवत्सर, nav samvatsar, आरंभ होता है।

चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा के दिन से भारतीय नववर्ष अर्थात हिन्दु नव संवत्सर Hindi nav samvatsar की शुरुआत मानी जाती है । धार्मिक ग्रंथो में इस दिन को बहुत पुण्यदायक , शुभ एवं महत्वपूर्ण माना गया है ।

‘चैत्रे मासि जगद ब्रह्मा ससर्ज प्रथमे अहनि,
शुक्ल पक्षे समग्रेतु तदा सूर्योदये सति’

 ब्रह्म पुराण में लिखे इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पास के सूर्योदय पर सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन से नव संवतसर, nav samvatsar, प्रारम्भ होता है ।
चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा, 13 अप्रैल मंगलवार के दिन विक्रम संवत 2078 का आरंभ हो जाएगा ।

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इस वर्ष नए हिंदू नव संवत् nav samvat के नाम पर कुछ संशय है। कुछ ज्योतिषचार्य नव संवत्सर का नाम आनंद तो कुछ में राक्षस बता रहे है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल 60 संवत्सरों का उल्लेख प्राप्त होता है। चूँकि संवत्सर 2077 का नाम प्रमादी था इसके अनुसार आने वाले संवत्सर 2078 का नाम आनंद होगा लेकिन आनंद का लोप बताते हुए कुछ ज्योतिषचार्य  नवसंवत्सर 2078 का नाम राक्षस बता रहे हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 2078 संवत्सर का नाम आनंद होगा, इस संवत से जैसा की इसका नाम ही है जीवन में आनंद ही आनद होगा। इस संवत के शुभ प्रभाण से महामारी का प्रकोप भी शीघ्र ही कम हो जाएगा. इस संवत्सर के स्वामी भाग देवता जी हैं,  इनके शुभ आगमन से जनता के बीच खुशियां आती हैं, यह श्री शालीवाहन शकसंवत 1943 भी है ।

दूसरी ओर निर्णय सिंधू  के अनुसार, संवत 2078 राक्षस नाम से जाना जाएगा,  निर्णय सिंधू के अनुसार ये सवंत 89वां संवत है और इसे अपूर्ण संवत कहा जाएगा। अब चूँकि प्रमादि संवत्सर अपना पूरा वर्ष व्यतीत नहीं कर पा रहा है, इसलिए 90वें वर्ष में पड़ने वाला संवत्सर अर्थात  अगला संवत्सर विलुप्त हो जाएगा इसी लिए यह 2078 का संवत्सर आनंद की जगह राक्षस कहलायेगा।
इसके अनुसार जैसा कि नाम है राक्षस संवत होने के कारण इस साल जनता को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है

शास्त्रों के अनुसार नए वर्ष के प्रथम दिन के स्वामी को उस वर्ष का स्वामी मानते हैं। चूँकि 2021 में हिन्दू नव वर्ष मंगलवार के दिन से प्रारम्भ  हो रहा है, अतः नए सम्वत् 2078 के स्वामी मंगलदेव जी होंगे।

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चूँकि राजा, मंत्री और वर्षा इन तीनों का अधिकार मंगल देव के पास है,  इसके अनुसार 2078 संवत वर्ष में बहुत ज्यादा गर्मी पड़ने की सम्भावना है, तथा बारिश कुछ कम ही होगी। लेकिन मंगल देव के प्रभाव से लोगो में हर्ष और ऊर्जा का संचार होगा ।

मंगल का स्वभाव क्रूर है और युद्ध के देवता भी है,  इसलिए इस संवत वर्ष दुर्घटना, हिंसा, भूकंप, आगजनी की भी संभावना अधिक है। इस साल  राजनीतिक अस्थिरता भी देखने को मिलेगी, साथ ही  प्राकृतिक आपदाएं भी अधिक आएंगी।

नया विक्रम संवत 2078 वृषभ लग्न और रेवती नक्षत्र में प्रारम्भ होगा। इस बार अमावस्या और नव संवत्सर के दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही मीन राशि में ठीक एक ही अंश पर विधमान रहेंगे, अर्थात नया चंद्रमा मीन राशि में उदय होगा।

शास्त्रो में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को एक स्वयं सिद्ध अमृत तिथि माना गया है । यह दिन इतना शुभ माना गया है कि शास्त्रो में उल्लेखित है कि यदि  इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत की जाए या कोई संकल्प लिया जाए तो उसमें अवश्य ही सफलता मिलती है।

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 12, 2021 को 08:00 AM बजे से

प्रतिपदा तिथि समाप्त – अप्रैल 13, 2021 को 10:16 AM बजे तक

महाराष्ट्र में हिन्दू नववर्ष या नव-सवंत्सर के आरंभ के दिन को गुड़ी पड़वा के रूप में पूर्ण हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

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नव संवतसर का बहुत ही धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है।

चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा के दिन ही लगभग एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 119  साल पहले भगवान ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि का सृजन किया था।

 शास्त्रो के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का राज्याभिषेक भी इसी शुभ दिन किया गया था ।

इसी दिन से माँ दुर्गा के श्रद्धा, भक्ति और शक्ति के नौ दिन के नवरात्रो की शुरुआत होती है।

चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा अर्थात नव संवत्सर के दिन ही सम्राट विक्रमादित्य ने 2076 साल पहले अपना राज्य स्थापित कर विक्रम संवत की शुरुआत की थी।

 नव संवत्सर के दिन ही विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने भी हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में अपना श्रेष्ठ राज्य स्थापित किया था। इसी दिन से शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ भी माना जाता है ।  

 सिंध प्रांत के प्रसिद्घ समाज सुधारक और सिंधीयो के पराम् पूजनीय वरुणावतार संत झूलेलाल इसी दिन अवतरित हुए थे ।

इस शुभ दिन सिख धर्म के द्वितीय गुरु श्री अंगददेव का जन्म दिवस भी माना जाता है।

 शुभ हिन्दु नव संवत्सर के दिन ही समाज को नयी राह दिखाने के लिए प्रसिद्द समाज सुधारक और विचारक स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी।

 5122 वर्ष पूर्व युगाब्द संवत्सर के प्रथम दिन ही युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी हुआ था।

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