Tuesday, October 19, 2021
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राखी कैसे मनाएं, rakhi kaise manayen,

रक्षाबंधन कैसे मनाएं, Raksha Bandhan kaise manayen,

श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन / राखी ( Raksha Bandhan / राखी ) का पर्व ना केवल भारत में वरन विश्व के बहुत से हिस्सों में जहाँ भारतीय रहते है हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

यह जानना अवश्य जरुरी है कि रक्षाबंधन कैसे मनाएं, Raksha Bandhan kaise manayen, यह भाई-बहनों के स्नेह का पर्व हैं लेकिन हमारे देश में अलग-अलग स्थानों एवं परम्परा के अनुसार अनेको रूपों में भी रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan ) के पर्व को मनाया जाता हैं।

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* इस पर्व का संबंध रक्षा से भी है। जो भी जातक आपकी रक्षा करने वाला है उसके प्रति आभार और कृतज्ञता दर्शाने के लिए उसे रक्षासूत्र बांधा जा सकता है। रक्षा बंधन के दिन सुबह बहने स्नान करके सबसे पहले भगवान की पूजा करती है फिर एक थाल में रोली, अक्षत, कुमकुम रखकर उसमें दीप जलाकर उसमें भाइयों को पहनाने वाली रंग-बिरंगी राखियों को रखकर उसकी पूजा करती हैं|

* हर घर में बहनो को भाइयों को राखी बांधने से पहले सर्वप्रथम एक राखी को भगवान कृष्ण / विष्णु के चित्र पर अर्पित करनी चाहिए।
फिर बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाइयों को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाते हुए उनके माथे पर कुमकुम, रोली एवं अक्षत से तिलक करके भाई की दाहिनी कलाई पर रेशम से बनी राखी बांधती हैं और,
अपने हाथ से मिठाई खिलाकर भाई का मुंह मीठा कराती हैं साथ ही अपने भाई की निरोगिता, दीर्घ आयु, सुख समृद्धि एवं उन्नति की कामना करती है।

इस दिन हर मनुष्य को हनुमान जी को राखी अवश्य बांधनी चाहिए, इससे जीवन हर संकटों, बुरे समय से रक्षा होती है।

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* राखी / रक्षा सूत्र बांधते समय बहनों को अपने भाइयों के सौभाग्य हेतु निम्न मन्त्र का उच्चारण अवश्य ही करना चाहिए, तभी रक्षासूत्र प्रभावशाली बनता है । जब उसे मंत्रों के साथ बांधा जाए।
राखी बांधने का मंत्र :-

येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल!!’


इसका अर्थ है- अर्थात् जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को धर्म के बंधन में बांधा गया था, उसी रक्षासूत्र से मैं तुमको बाँधती हूं, यह तुम्हारी रक्षा करेगा । हे रक्षे! (राखी / रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो। हे रक्षे तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना, इनकी हर मुश्किल में रक्षा करना ।

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* राखी बंधवाने के बाद भाई भी बहन का मुँह मीठा करवाता है और अपनी बहन का सदैव हर परिस्तिथि में रक्षा करने का वचन देते हुए उसे यथा शक्ति उपहार व धन देता है।

* इस दिन बहने अपनी भाई की रूचि का भोजन बनाती है और भाई अपनी बहनो के हाथ का बना ही भोजन करते है। बहुत से स्थानो पर भोजन के पश्चात बहने भाइयों के सौभाग्य के लिए अपने हाथ से पान भी खिलाती है।

इस दिन चाहे बहन छोटी हो या बड़ी उसे अपने भाई के सर और पीठ पर हाथ फेर कर उसे आशीर्वाद अवश्य ही देना चाहिए ।

* भविष्य पुराण के अनुसार रक्षाबंधन ( RakshaBandhan ) के पर्व को विधि-विधान पूर्वक मनाने से बहनो और भाइयों को किसी भी वस्तु नहीं रहता है घर में सुख समृद्धि का वास रहता है ।
भविष्य पुराण में बहनो द्वारा भाइयों को बांधे जाने वाले रक्षा सूत्र के बारे में कहा गया है कि –

सर्व रोग पशमनं सर्वाशुभ विनाशनम।
सुंकृत्कृते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत।।

अर्थात इस पवित्र पर्व पर धारण करने वाला रक्षा सूत्र उस जातक के समस्त रोगों एवं अशुभ कार्यों को नष्ट कर देता है तथा इसके धारण करने से मनुष्य पूरे वर्ष भर के लिए रक्षित हो जाता है। अत: इस रक्षा सूत्र को अवश्य ही धारण करना चाहिए ।

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* जिन भाइयों की कोई बहन ना हो तो उन्हें किसी को अपनी मुहँबोली बहन बना कर उससे रक्षाबंधन के दिन अपनी दाहिनी कलाई पर राखी बँधवानी चाहिए अथवा किसी भी पण्डित , पुरोहित से राखी अवश्य बंधवानी चाहिए।

* शास्त्रों के अनुसार सावन माह की पूर्णिमा के दिन जो जातक अपनी बहन / मुंहबोली बहन / पुरोहित से राखी बंधवाता है उसकी सभी संकटो से अवश्य ही रक्षा होती है ।

* इस दिन राखी बँधवाने के बाद अपनी सामर्थ्यानुसार अपनी बहन / पुरोहित को उपहार देकर उन्हें संतुष्ट अनिवार्य रूप से करना चाहिए ।

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