Saturday, December 5, 2020
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Swastik ka arth, स्वास्तिक का अर्थ,

Swastik ka arth, स्वास्तिक का अर्थ,

क्या आप जानते है Swastik ka arth, स्वास्तिक का अर्थ क्या है ? हमेशा पंडित जी लोग या हम लोग स्वयं किसी भी पूजा, शुभ कार्यों में पूजन की थाली में, अपनी तिजोरी अथवा मंदिर या किसी साफ स्थान में मंगलस्वरूप श्रीगणपति का लाल रंग से स्वास्तिक-चिह्न Swastik Chinh बनाकर उसके अगल-बगल में दो-दो खड़ी रेखाएँ बनते हैं। कभी आपने सोचा है कि वह क्या है ??????? जानिए क्या है स्वास्तिक का अर्थ, janiye kya hai swastik ka arth,

स्वास्तिक के चिन्ह को मंगल प्रतीक माना जाता है। मान्यता है स्वास्तिक-चिह्न बनाने से कार्य सफल होता है। स्वास्तिक शब्द को ‘सु’ और ‘अस्ति’ से मिलकर बना है। ‘सु’ का अर्थ है ‘शुभ’ और ‘अस्ति’ का अर्थ है ‘होना’। अर्थात स्वास्तिक का मौलिक अर्थ है ‘शुभ हो’, ‘कल्याण हो’।

अमरकोश में स्वस्तिक का अर्थ आशीर्वाद, मंगल या पुण्यकार्य करना लिखा है, अर्थात सभी दिशाओं में सबका कल्याण हो। ‘वाल्मीकि रामायण’ में भी स्वस्तिक का उल्लेख मिलता है।

शास्त्रों के अनुसार यह पवित्र स्वास्तिक-चिह्न Swastik chinh भगवान श्रीगणपति का स्वरूप है और दो-दो रेखाएँ उनकी पत्नी ‘सिद्धि’ ‘बुद्धि’ एवं पुत्र ‘लाभ’ और ‘क्षेम’ हैं।
इस तरह से मंगलस्वरूप स्वस्तिक mangal swarup Chinh का चिह्न बना कर हम पूरे गणपति परिवार Ganpati Pariwar का आह्वान, उनकी आराधना कर लेते है।

इस मंगल चिन्ह के माध्यम से हम उन्हें अपने घर कारोबार, अपने जीवन में आमन्त्रित करते है, उनसे अपने यहाँ स्थाई रूप से निवास करने का निवेदन करते है।
शास्त्रो में मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य में गणपति जी और उनके परिवार का स्मरण करने से कार्यों में निश्चय ही शुभ सफलता प्राप्त होती है ।

स्वास्तिक के निशान के सम्बन्ध में और भी कई मान्यताएं है ।

कुछ ऋषि मुनि यह मानते है कि स्वास्तिक की यह रेखाएं चार दिशाओं – पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण की ओर इशारा करती हैं।

लेकिन हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह रेखाएं चार वेदों – ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और सामवेद का प्रतीक हैं।

कुछ यह भी मानते हैं कि यह चार रेखाएं सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा के चार सिरों को दर्शाती हैं।

स्वास्तिक की चार रेखाएं एक घड़ी की दिशा में चलती हैं, जो संसार के सही दिशा में चलने का प्रतीक है।

भारत के आलावा विश्व के बहुत से देशों में भी स्वस्तिक का प्रचलन किसी न किसी रूप में मिलता है।

घर के ईशान कोने में हल्दी से स्वस्तिक Swastik बनाने से घर में सुख – शान्ति Shukh Shanti बनी रहती है, परिवार के सदस्यों में सहयोग बनता है |

घर के पूजा घर में स्वास्तिक swastik बना कर उसके ऊपर अक्षत या सप्तधान रखकर उसपर दीपक रख कर नित्य जलाने से सभी मनोकामनाएँ शीघ्र ही पूर्ण होती है | अगर पूजा घर में कपड़ा बिछा है और उस पर स्वास्तिक बनाना संभव नहीं है तो वहां पर स्वास्तिक का स्टीकर लगा दे |

मान्यता है कि घर के बाहर की तरफ मुख्य द्वार दे दोनों ओर सिंदूर में घी मिलाकर स्वास्तिक बनाने से उस घर में सदैव शुभ शक्तियों का वास होता है , उस घर परिवार पर टोने टोटको का असर नहीं होता है|

घर, कारोबार के के धन स्थान / तिजोरी पर स्वास्तिक swastik का निशान बनाने और नित्य उसे धूप दिखाकर पूजा करने से तिजोरी सदैव धन से भरी रहती है |

तो अब से किसी भी शुभ कार्यों में यह स्वस्तिक swastik का मंगलचिन्ह बनवाना बिल्कुल भी ना भूले और इस चिन्ह को बनाते समय और फिर नित्य भगवान श्री गणेश जी के परिवार के सदस्यों का भी अवश्य ही स्मरण करे ।

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
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