Saturday, May 18, 2024
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रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurth, raksha bandhan 2023,

रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurth,

रक्षा बंधन 2023, raksha bandhan 2023,

वर्ष 2023 में रक्षा बंधन का पर्व 30 / 31 अगस्त, बुधवार/ गुरुवार को सावन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा। हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan ) का पर्व बहन-भाई के पवित्र प्रेम के लिए मनाया जाता है । शास्त्रों के अनुसार राखी, रक्षा बंधन के शुभ मुहूर्त ( raksha bandhan ka shubh muhurth, ) में ही बांधनी चाहिए ।

इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र / राखी बांधकर उनके कल्याण, उन्नति की कामना करती है और भाई हर हाल में आजीवन अपनी बहन की रक्षा , उसके सुख-सौभाग्य के लिए वचन देते है ।

मान्यता है कि यह रक्षासूत्र भाइयों को इतनी शक्ति देता है कि वह हर परिस्तिथि का मुकाबला करके विजय प्राप्त कर सके।

रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurth,

इस साल 2023 को सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि बुधवार 30 अगस्त को सुबह 10 बजकर 58 मिनट पर प्रारंभ हो रही है जो 31 अगस्त को सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगी।

पूर्णिमा के साथ ही भद्रा 30 अगस्त को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से शुरू हो जाएगी जो रात 09 बजकर 01 मिनट तक रहेगी ।

भद्रा के समय में भाइयों को राखी किसी भी दशा में नहीं बांधनी चाहिए, शास्त्रों के अनुसार भद्रा में भाइयों को राखी बांधने से भाइयो का अनिष्ट होता है ।

ऐसे में रक्षाबंधन का शुभ समय भद्रा के पश्चात बुधवार 30 अगस्त को रात 09 बजकर 01 मिनट से गुरुवार 31 अगस्त को सुबह 07 बजकर 05 मिनट तक रहेगा ।

लेकिन इन दोनों ही दिनों में उपरोक्त समय पर रक्षाबंधन का पर्व मानना मुश्किल होगा इसलिए यदि बहने अपनी राखी / रक्षा सूत्र रात को 9 बजकर 1 मिनट के बाद से अगले दिन सुबह 7 बजकर 5 मिनट के बीच में घर के मंदिर में भगवान गणपति अथवा किसी भी देवता की मूर्ति के समक्ष रख दे और

गुरुवार 31 अगस्त को चूँकि इस दिन उदया तिथि मे पूर्णिमा का मान है इसलिए इस दिन राहुकाल दोपहर 2 बजे से दोपहर 3.30 के समय को छोड़कर बहने सूर्योदय से पूरे दिन अपने भाइयों को राखी बांध सकती है ।

इस तरह से मनाएं रक्षा बंधन का पर्व, भाइयों को मिलेगा निरोगिता, दीर्घ आयु, सुख समृद्धि का वरदान 

वस्तुत: इस वर्ष रक्षा बंधन पर्व अर्थात श्रावणी पूर्णिमा तिथि दिनांक 30 अगस्त में प्रातः काल 10:58 से लगभग रात्रि 09:01 तक भद्रा व्याप्त होने के कारण इस अवधि में रक्षाबंधन का कार्य कदापि नहीं करना चाहिए।

क्योंकि शास्त्र मत है कि — “भद्रायाम द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा, श्रावणी नृपति हंति ग्रामम दहति फाल्गुनी। ” अर्थात भद्रा व्याप्त होने पर श्रावणी (रक्षाबंधन) तथा फाल्गुनी (होलिकादाह) आदि विशेष रूप से त्याग देना चाहिए।

तब ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर क्या किया जाए ? इसके लिए भी शास्त्र ही समाधान प्रस्तुत करते है की– “तत्सत्वे तु रात्रावपि कुर्यादिति निर्णयामृते” अर्थात यदि कभी ऐसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाए तो ये दोनो कार्य (रक्षाबंधन वा होलिकादाह) रात्रिकाल में भद्रा की समाप्ति के बाद भी करना शास्त्र सम्मत है।
(देखे निर्णयसिंधु का द्वितीय परिच्छेद पृष्ठ संख्या 248)

ध्यान दे आजकल कुछ विद्वानों का मत आया है की इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व अगले दिन उदयातिथि प्रमाण मानकर अर्थात 31 अगस्त को सम्पूर्ण दिन मनाया जाए तो तो यह भी शास्त्र सम्मत नही है ।

क्योंकि निर्णयसिंधु ग्रंथ में ही लिखा है कि — “इदम प्रतिपद्युतायाम न कार्यम, नंदायाम दर्शने रक्षा बलिदानम दशाशु च, भद्रायाम गोकुलक्रीड़ा देशनाशाय जायते” (मदनरत्न, ब्रह्म वैवर्त पुराण)।

अर्थात नंदा तिथि (प्रतिपदा) युक्त पूर्णिमा अथवा प्रतिपदा तिथि में रक्षाबंधन आदि कार्यों को कभी नहीं करना चाहिए इससे सम्पूर्ण देश की हानि होती है।

शास्त्रों के अनुसार भद्रा के समय में भाइयों को रक्षा सूत्र बांधना उत्पातकारी बताया गया है, मान्यता है कि रावण ने भी एक बार भद्रा के समय में अपनी बहन से रक्षा सूत्र बंधवाया तो एक वर्ष के भीतर ही उसके कुल का सर्वनाश हो गया ।

ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि भद्रा शनिदेव की बहन है, जिसे ब्रम्हा जी ने श्राप दिया था कि अगर भद्रा में कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य किया जायेगा उसका परिणाम अशुभ ही होगा इसी कारण से भद्रा में राखी नहीं बांधने की सलाह दी जाती है।

31 अगस्त को पूर्णिमा तिथि त्रिमुहूर्तव्यापिनी नही है मात्र प्रातः 07:05 तक ही है इसके बाद प्रतिपदा लग जा रही अतः 31 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व प्रात: 7.05 तक मनाना उचित है।

उपरोक्त शास्त्रमत को देखते हुए हम सभी को रक्षा बंधन का पर्व 30 अगस्त दिन बुधवार को भद्रा उपरान्त रात्रि 09:01 से अगले दिन 07: 05 AM तक मनाना सर्वाधिक श्रेष्ठ वा शास्त्र सम्मत रहेगा।

इसके अतिरिक्त यदि इस अवधि में जो कोई रक्षाबंधन नही कर सके तो 31 अगस्त गुरुवार को राहुकाल दोपहर 2 बजे से दोपहर 3.30 के समय को छोड़कर बहने सूर्योदय से पूरे दिन अपने भाइयों को राखी बांध सकती है I

लेकिन *अच्छा होगा कि बहने अपनी राखी मुहूर्त के समय घर में मंदिर में गणेश जी, विष्णु जी, श्री कृष्ण जी के सम्मुख रख दें और अगले दिन 31 अगस्त को दिन में अपने भाइयों को बांधे I।*

रक्षा बंधन के दिन राखी बांधते समय बहने बोले यह मन्त्र, भाइयों की सदैव होगी हर संकटो से होगी रक्षा 

2023 का रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त

रक्षा बंधन पर्व – बुधवार 30 / गुरुवार 31 अगस्त 2023,

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: – बुधवार 30 अगस्त 2023 को 10:58 AM से

पूर्णिमा तिथि का समापन: – गुरुवार 31 अगस्त 2023, 07:05 AM

  •  शास्त्रों में भद्रा को अति उत्पाती माना गया है, भद्रा का स्वभाव उग्र कहा गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही परम पिता भगवान ब्रह्मा ने उन्हें पंचाग के एक प्रमुख अंग विष्टी करण में स्थान दिया है।
  • शास्त्रों के अनुसार जब भद्रा किसी पर्व काल में स्पर्श करती है तो जब तक वह रहती है उसे श्रद्धावास माना जाता है। और उस काल में बुद्दिमान व्यक्ति कोई भी शुभ कार्य नहीं करते है ।
  •  रावण बहुत ज्ञानी था लेकिन उससे भी एक ग़लती हो गयी थी कहते है कि रावण की बहन स्रूपनखा ने अपने भाई रावण को भद्रा काल में राखी बांधी थी, जिसके कारण परम शक्तिशाली होने पर भी रावण का वंश सहित विनाश हो गया था । इस कारण भद्रा के समय में राखी बांधने को मना किया जाता है।
  • अगर किसी व्यक्ति को किसी भी परिस्थितिवश भद्रा-काल में ही रक्षा बंधन का कार्य करना हों, तो भद्रा के मुख को छोड्कर भद्रा के पुच्छ काल में रक्षा – बंधन का कार्य किया जा सकता है ।
  • शास्त्रों के अनुसार में भद्रा के पुच्छ काल में कार्य करने से कोई भी हानि नहीं होती है कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है, परन्तु भद्रा के पुच्छ काल समय का प्रयोग शुभ कार्यों के लिये विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।

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