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रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurth,

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रक्षा बंधन 2020, raksha bandhan 2020,

हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan ) का पर्व बहन-भाई के पवित्र प्रेम के लिए मनाया जाता है । शास्त्रों के अनुसार राखी, रक्षा बंधन के शुभ मुहूर्त ( raksha bandhan ka shubh muhurth, ) में ही बांधनी चाहिए । इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र / राखी बांधकर उनके कल्याण, उन्नति की कामना करती है और भाई हर हाल में आजीवन अपनी बहन की रक्षा , उसके सुख-सौभाग्य के लिए वचन देते है ।
मान्यता है कि यह रक्षासूत्र भाइयों को इतनी शक्ति देता है कि वह हर परिस्तिथि का मुकाबला करके विजय प्राप्त कर सके।

रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त, raksha bandhan ka shubh muhurth,

  • 3 अगस्त सोमवार को सावन माह की पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष 2020 को रक्षाबंधन के दिन सर्वार्थ सिद्धि और आयुष्मान दीर्घायु का शुभ संयोग भी बन रहा है। ऐसा शुभ संयोग 29 साल बाद आया है।
  • इस साल रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान योग के साथ ही सूर्य शनि के समसप्तक योग, सोमवती पूर्णिमा, मकर का चंद्रमा श्रवण नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग भी बन रहा है।
    इसके पहले 1991 में ऐसा मुहूर्त बना था।
  • शास्त्रों के अनुसार बहनो को अपने भाइयों को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को भद्रा रहित शुभ मुहूर्त में राखी बाँधनी चाहिए इसलिए यह जानना अति आवश्यक है कि किस शुभ मुहूर्त में राखी कब बांधी जाए।
  • सोमवार को राहु काल सुबह 7.30 बजे से 9 बजे तक है। अतः इस समय राखी भूल कर भी नहीं बांधनी चाहिए। लेकिन अच्छी बात यह है कि राहु काल और भद्रा का समय साथ साथ है,सुबह 9 बजे राहु काल और 9.29 पर भद्रा का समय समाप्त हो जायेगा अर्थात यह दोनों समय एक साथ ही बीत जायेंगे । इसके बाद 9.31 से बहने अपने भाइयों को राखी बांध सकती है ।
  • 3 अगस्त को सुबह 9.29 तक भद्रा है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा के समय किसी भी दशा में बहनो को अपने भाइयों को राखी नहीं बांधनी चाहिए। कहते है कि रावण को उसकी बहन ने भद्रा काल में राखी बांध दी थी इसलिए रावण का विनाश हो गया था ।
    अत: बहने अपने भाइयों को राखी सुबह 9 बजकर 30 मिनट के बाद राखी बांधे । इस दिन भद्रा के बाद पूरे दिन शुभ समय है ।

2020 का रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त

  • रक्षाबंधन का सुबह का शुभ मुहूर्त
    09.31 से 10.23 मिनट तक
  • रक्षा बंधन दोपहर का मुहूर्त-
    01:45 से 04:23 तक।
  • रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त-
    07:01 सांय से 09:11 रात्रि तक।

  •  आखिर क्यों नहीं बाँधी जाती है भद्रा में राखी :-
  •  शास्त्रों में भद्रा को अति उत्पाती माना गया है, भद्रा का स्वभाव उग्र कहा गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही परम पिता भगवान ब्रह्मा ने उन्हें पंचाग के एक प्रमुख अंग विष्टी करण में स्थान दिया है।
  • शास्त्रों के अनुसार जब भद्रा किसी पर्व काल में स्पर्श करती है तो जब तक वह रहती है उसे श्रद्धावास माना जाता है। और उस काल में बुद्दिमान व्यक्ति कोई भी शुभ कार्य नहीं करते है ।
  •  रावण बहुत ज्ञानी था लेकिन उससे भी एक ग़लती हो गयी थी कहते है कि रावण की बहन स्रूपनखा ने अपने भाई रावण को भद्रा काल में राखी बांधी थी, जिसके कारण परम शक्तिशाली होने पर भी रावण का वंश सहित विनाश हो गया था । इस कारण भद्रा के समय में राखी बांधने को मना किया जाता है।
  • अगर किसी व्यक्ति को किसी भी परिस्थितिवश भद्रा-काल में ही रक्षा बंधन का कार्य करना हों, तो भद्रा के मुख को छोड्कर भद्रा के पुच्छ काल में रक्षा – बंधन का कार्य किया जा सकता है ।
  • शास्त्रों के अनुसार में भद्रा के पुच्छ काल में कार्य करने से कोई भी हानि नहीं होती है कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है, परन्तु भद्रा के पुच्छ काल समय का प्रयोग शुभ कार्यों के लिये विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।

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