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सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 15 जून 2026 का पंचांग,

सोमवार का पंचांग, Somwar Ka Panchang, 15 जून 2026 का पंचांग, 15 June 2026 ka Panchang,

मित्रो हम पिछले 16 सालो से निरंतर पंचांग बनाते और इसका प्रचार प्रसार करते आ रहे है,  अगर आप भी  पंचांग को नित्य पढ़ना चाहते है और आप चाहते है कि आपके और दुसरो के पास भी नित्य पंचांग पहुँचता जाय तो कृपया हमारे नंबर 9044862881 को अपने किसी ना किसी ग्रुप से अवश्य ही जोड़ ले ।

कृपया इसे अपना फर्ज / धर्म समझकर, आप इस मैसेज को देखने के बाद इस पोस्ट / पेज का लिंक आगे ज्यादा से ज्यादा लोगो को शेयर करके सहयोग करें , जिससे लोग इस पंचांग के प्रसार – प्रसार में अपना भी बहुमूल्य योगदान दे सकें । ईश्वर अच्छे लोगो का सदैव ही साथ देता है उन पर अपनी कृपा बरसता है ।

आप सभी पर ईश्वर की सदैव असीम कृपा रहे । धन्यवाद


Panchang, पंचाग, आज का पंचांग, aaj ka panchang, ( Panchang 2026, हिन्दू पंचाग, Hindu Panchang ) पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :-


1:- तिथि (Tithi)
2:- वार (Day)
3:- नक्षत्र (Nakshatra)
4:- योग (Yog)
5:- करण (Karan)

पंचाग (panchang) का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग (panchang) का श्रवण करते थे ।
जानिए, सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang।

सोमवार का पंचांग, Somvar Ka Panchang,

15 जून 2026 का पंचांग, 15 June 2026 ka Panchang,

महा मृत्युंजय मंत्रॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

  • दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।

    सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।

सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

*विक्रम संवत् – 2083,
* शक संवत – 1948,
*कलि संवत – 5128
*कलयुग – 5128 वर्ष
* अयन – उत्तरायण,
* ऋतु – ग्रीष्म ऋतु,
* मास – ज्येष्ठा माह, ( अधिक माह )
* पक्ष – कृष्ण पक्ष
*चंद्र बल – वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन ,

सोमवार को चन्द्रमा की होरा :-

प्रात: 5.22 AM से 6.32 AM तक

दोपहर 01.26 PM से 2.35 PM तक

रात्रि 8.44 PM से 9.47 PM तक

सोमवार को चन्द्रमा की होरा में अधिक से अधिक चन्द्र देव के मन्त्र का जाप करें। यात्रा, प्रेम, प्रसन्नता, कला सम्बन्धी कार्यो के लिए चन्द्रमा की होरा अति उत्तम मानी जाती है।


आप बहुत ही सौभाग्य शाली है यदि आपको यह पंचाग नित्य पढ़ने को मिलता है,भारत की लगभग 150 करोड़ की आबादी में 0.001 % अर्थात लगभग 15 हज़ार आदमी ही नित्य पंचांग पढ़ पाते है।

आप पर ईश्वर की असीम कृपा है जो आपको नित्य पंचांग पढ़ने का, अपने भाग्य को प्रबल करने का, पापो के प्रायश्चित करने का अवसर मिल रहा है,

दुनिया के सारे उपाय एक तरफ है, और नित्य पंचाग पढ़ने का पुण्य उससे भी कहीं अधिक है,

इसलिए नित्य स्नान आदि के पश्चात सबसे पहले यह पंचाग पढ़े, इस पंचांग को आगे शेयर भी करें और पुण्य कमाएं । पंचांग को पढ़ने से यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है ।

सोमवार के दिन चन्द्रमा की होरा में चंद्रदेव के मंत्रो का जाप करने से कुंडली में चंद्र देव मजबूत होते है, पूरे दिन शुभ फलो की प्राप्ति होती है ।

चन्द्रमा के मन्त्र

ॐ सों सोमाय नम:।

ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम: ।

  • तिथि (Tithi) – अमावस्या 08.23 AM तक तत्पश्चात प्रतिपदा,
  • तिथि का स्वामी – अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव जी और प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव जी है ।
     
  •  अधिक मास की अमावस्या, सोमवती अमावस्या है, अधिक मास की अमावस्या 3 वर्ष में एक बार आती है और सोमवार को होने के कारण इसका महत्त्व और भी अधिक बढ़ गया है, अधिक माह में सोमवती अमावस्या का संयोग 30 वर्षो के बाद आया है । अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव को माना गया है ।
  • अमावस्या तिथि का प्रारम्भ रविवार 12.20 PM पर हुआ था तथा जिसका समापन आज सोमवार 08.23 AM पर होगा इसलिए उदया तिथि के अनुसार सोमवती अमावस्या का पर्व आज सोमवार 15 जून को मनाया जायेगा ।
  • इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का भी विशेष महत्व समझा जाता है। महाभारत में भीष्म पितामह ने धर्मराज युधिष्ठिर जी को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, सोमवती अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में स्नान करने, जल में गंगा जल डाल कर स्नान करने वाला मनुष्य स्वस्थ्य, समृद्धशाली होगा, उसे कोई भी दुःख नहीं सतायेंगे ।
  • पीपल के पेड़ पर पितरों का वास माना गया है। इस दिन प्रात: काल पीपल की सेवा करने, पीपल को दूध, काले तिल मिश्रित मीठे जल से सींचने, “ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः” मंत्र का जाप करते हुए पीपल की परिक्रमा करने से सहस्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है।
  • शास्त्रों के अनुसार में पीपल की छाया से, स्पर्श करने से और प्रदक्षिणा करने से समस्त पापों का नाश, अक्षय लक्ष्मी की प्राप्ति और आयु में वृद्धि होती है ।
  • सोमवती अमावस्या के दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल की 108 बार परिक्रमा करने, सोमवती अमावस्या की कथा पढ़ने से उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है । शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा कहा गया है, अश्वत्थ का अर्थ है पीपल का वृक्ष
  • मान्यता है की इस दिन जो स्त्री तुलसी जी व माता पार्वती पर सिन्दूर चढ़ाकर उसे अपनी माँग में लगाती है वह अखण्ड सौभाग्यवती बनी रहती है ।
  • जिन जातकों की जन्मपत्रिका में घातक कालसर्प दोष है, वे लोग यदि सोमवती अमवस्या पर चांदी के बने नाग-नागिन की विधिवत पूजा करके उन्हे शिवलिंग पर चढ़ाएं अथवा नदीं में प्रवाहित कर दें तो उन्हें निश्चित ही काल सर्प दोष में राहत मिलती है ।
  • अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, दान के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है । इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने पितरों की शांति के लिए उनका तर्पण करते हैं ।
  • आज पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए घर पर ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं उसे यथा शक्ति दान – दक्षिणा प्रदान करें ।
  • अमावस्या के दिन घर पर खीर अवश्य बनायें फिर उसमें थोड़ी सी खीर दोने पर निकाल कर पित्रों के निमित पीपल पर रख आएं ।
  • हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है ।
  • इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।
  • अमावस्या पर तुलसी के पत्ते या बिल्व पत्र बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। अमावस्या पर देवी-देवताओं को तुलसी के पत्ते और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

    सोमवती अमावस्या के दिन इस कथा को पढ़ने सुनने से मिलता है अक्षय पुण्य, पितरो की मिलती है असीम कृपा, अवश्य पढ़ें सोमवती अमावस्या की कथा

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नक्षत्र (Nakshatra) – मृगशिरा 19.08 PM तक तत्पश्चात आद्रा

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-       मृगशिरा नक्षत्र के देवता ‘चंद्र देव’ एवं नक्षत्र स्वामी: ‘मंगळ देव’ जी है ।

नक्षत्रों के गणना क्रम में मृगशिरा नक्षत्र का स्थान पांचवां है। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल होने के कारण इस नक्षत्र में जन्मे जातको पर मंगल का प्रभाव अधिक रहता है। यह नक्षत्र एक हिरण के सिर जैसा प्रतीत होता है।

इस नक्षत्र का आराध्य वृक्ष खैर तथा स्वाभाव शुभ माना जाता है। मृगशिरा नक्षत्र सितारा का लिंग तटस्थ है।

चन्द्रमा का असर होने के कारण इस राशि के जातक कल्पनाशील, भावुक, सौंदर्य प्रेमी, बुद्धिमान, परिश्रमी, उत्साहीऔर ज्ञानवान होते हैं।

लेकिन आप लोगो पर शक बहुत करते है, व्यापार में साझेदारी करने से इन्हे अधिकतर नुकसान ही उठाना पड़ता है । इस नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ हंसमुख, धनवान, जीवन साथी के प्रति समर्पित लेकिन उस पर हावी रहती है ।

मृगशिरा नक्षत्र के लिए भाग्यशाली संख्या 9, भाग्यशाली रंग, चमकीला भूरा, कत्थई रंग,  भाग्यशाली दिन मंगलवार तथा गुरुवार का माना जाता है ।

मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे जातको को तथा जिस दिन यह नक्षत्र हो उस दिन सभी को “ॐ चन्द्रमसे नम:” मन्त्र की एक माला का जाप करना चाहिए ।

मॄगशिरा नक्षत्र के जातको को माँ पार्वती की आराधना अत्यंत शुभ फलदाई है ।  मॄगशिरा नक्षत्र के दिन चावल और दही के दान से भी इस नक्षत्र के अशुभ फलो को दूर किया जा सकता है ।

सोमवती अमावस्या के दिन इस उपाय को करने से समस्त जन्मो के पापो का होता है नाश, जानिए सोमवती अमावस्या के उपाय

  अगर पश्चिम मुख का है आपका घर तो ऐसा रहना चाहिए आपके घर का वास्तु, जानिए पश्चिम दिशा के अचूक वास्तु टिप्स 


  • योग – शूल 08.56 AM तक तत्पश्चात गण्ड

  • योग केस्वामी:-  शूल योग के स्वामी सर्प एवं स्वभाव हानिकारक है ।
  • प्रथम करण : – नाग 08.23 AM तक
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-  नाग करण के स्वामी नागदेव और स्वभाव क्रूर है ।

    अवश्य पढ़ें :- कुंडली में केतु अशुभ हो तो आत्मबल की होती है कमी, भय लगना, बुरे सपने आना, डिप्रेशन का होता है शिकार, केतु के शुभ फलो के लिए करे ये उपाय
  • द्वितीय करण : – किस्तुघ्न 18.26 PM तक तत्पश्चात बव
  • करण के स्वामी, स्वभाव :-   किस्तुघ्न करण के स्वामी मरुत और स्वभाव क्रूर है ।
  • ब्रह्म मुहूर्त : 4.02 AM से 4.43 AM तक
  • विजय मुहूर्त : 14.41 PM से 15.37 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त : 19.19 PM से 19.39 PM तक
  • अमृत काल :- 11.28 PM से 12.32 AM मंगलवार 16 जून तक
  • शिव वास :- माँ गौरी के साथ 08.23 AM तक तत्पश्चात शमशान में

    जब भगवान शंकर  गौरी मइय्या के साथ होते हैं, तो उस समय रुद्र अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार शंकर जी के देवी गौरी के साथ रहने के समय किये गए  रूद्रअभिषेक से घर कारोबार में सुख-समृद्धि आती है, स्थाई लक्ष्मी का वास होता है ।

    शिव वास  :  श्मशान में   जब भगवान शिव का श्मशान में वास होता हैं, तो रुद्र अभिषेक आदि  करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ जी का  श्मशान में वास के दौरान अभिषेक करने से मृत्यु समान  परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • अग्निवास : आकाश 08.23 AM तक तत्पश्चात पृथ्वी

    अग्निवास जब आकाश में होता है तो उस समय हवन आदि करना अशुभ माना जाता है, इस समय हवन करने से हानि होती है ।

    अग्निवास जब पृथ्वी पर होता है तो बहुत ही शुभ माना जाता है । शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी पर अग्निवास होने पर हवन आदि करने से सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है, मनवांछित लाभ मिलता है ।
  • विशेष – अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति, चतुर्दशी,  श्राद्ध और व्रत के दिन काँसे के बर्तन में भोजन करना, तिल का तेल का सेवन करना, सहवास करना निषिद्ध है। 
  • अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते, बिल्व पत्र या किसी भी तरफ के फूल पत्तो को बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। 
  • पर्व त्यौहार- सोमवती अमावस्या
  • मुहूर्त (Muhurt) –

“हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो “।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

अपने धर्म, अपनी संस्कृति अपने नैतिक मूल्यों के प्रचार, प्रसार के लिए तन – मन – धन से अपना बहुमूल्य सहयोग करें । आप हमें अपनी इच्छा – सामर्थ्य के अनुसार सहयोग राशि 6306516037 पर Google Pay कर सकते है ।
आप पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे ।

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ज्योतिषाचार्य मुक्ति नारायण पाण्डेय
( हस्त रेखा, कुंडली, ज्योतिष विशेषज्ञ )


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