Wednesday, July 24, 2024
HomeGrahan, ग्रहणchandr grahan ke upay, चंदग्रहण के उपाय, चंद्रग्रहण 2023,

chandr grahan ke upay, चंदग्रहण के उपाय, चंद्रग्रहण 2023,

chandr grahan ke upay, चंदग्रहण के उपाय,

हिन्दू धर्म में चंद्र ग्रहण, chandr grahan को प्रमुख खगोलीय, ज्योतिषीय घटना माना जाता है और ग्रहण का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। ग्रहण काल में किये गए चंद्रग्रहण के उपाय, chandr grahan ke upay, जप, तप, ध्यान, दान आदि का समान्य दिनों से लाखो गुना पुण्य मिलता है, पापो का नाश होता है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में हर मनुष्य को पुण्य अवश्य ही अर्जित करना चाहिए।

हमारे ऋषि मुनियों, ज्योतिषियों ने कई ऐसे उपाय बताये है जिन्हे करने से चंद्रग्रहण, chandra grahan, सूर्यग्रहण का कोई भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, सर्व कार्य सिद्ध होते है।

इस वर्ष 2023 में शरद पूर्णिमा के दिन 28 अक्टूबर को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लग रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा जिसक कारण इस ग्रहण का सूतक काल मान्य होगा।

चंद्र ग्रहण विश्व में 28 अक्टूबर की रात 11 बजकर 32 मिनट से शुरू होगा और देर रात 3 बजकर 36 मिनट पर तक रहेगा अर्थात कुल 4 घंटे 4 मिनट तक रहेगा I

पंचांग के अनुसार यह चंद्र ग्रहण भारत में 28 अक्तूबर की रात 01 बजकर 06 मिनट से शुरू होगा जो रात के 2 बजकर 22 मिनट पर तक रहेगा । इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल चंद्र ग्रहण के 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाएगा।

इस तरह से 28 अक्तूबर को शाम 4 बजे से सूतक लग जाएगा जो ग्रहण के अंत तक रहेगा।

30 साल बाद शरद पूर्णिमा पर लग रहे इस चंद्र ग्रहण के दिन गजकेसरी योग का भी निर्माण हो रहा है।

साल 2023 का आखिरी चंद्र ग्रहण भारत के अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, मंगोलिया, भूटान, चीन, ईरान, रूस, यूक्रेन, कजाकिस्तान, इराक, तुर्की, सऊदी अरब, सूडान, अल्जीरिया, जर्मनी, पोलैंड, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, इटली, फ्रांस, नॉर्वे, ब्रिटेन, स्पेन, स्वीडन, मलेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान और इंडोनेशिया में भी दिखाई पड़ेगा ।

वर्ष 2023 का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई 2023 को बुध पूर्णिमा के दिन लगा था लेकिन यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया था।

वर्ष 2023 का पहला चंद्र ग्रहण भारत में 05 मई को रात्रि 8 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर और रात्रि 01 बजकर 1 मिनट पर समाप्त हुआ था I

यह साल का पहला चंद्र ग्रहण उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो तब ये तीनों एक सीधी लाइन में कुछ देर के लिए आ जाते हैं तो इसे चंद्र ग्रहण कहते हैं। लेकिन जब चंद्रमा पर पृथ्वी की परछाई सीधी न पड़े तो इसे उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं।

अवश्य पढ़ें :-  अगर धन की लगातार परेशानी रहती है, धन नहीं रुकता हो, सर पर कर्ज चढ़ा तो अवश्य करें ये उपाय

चंद्रग्रहण, chandr grahan,

मत्स्य पुराण और नारद पुराण में ग्रहण काल से संबंधित कई अहम जानकारियां दी गई हैं।

* चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा वाले दिन लगते हैं।
* सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या वाले दिन लगते हैं।
* सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण से हमेशा दो सप्ताह पूर्व या बाद में लगता है।
* चंद्र ग्रहण की सर्वाधिक अवधि 3 घंटा 40 मिनट तक की हो सकती है।
* सूर्य ग्रहण की सर्वाधिक अवधि 7 मिनट 40 सैकेंड हो सकती है…आदि ।

Chandr grahan ke upay, चंदग्रहण के उपाय,

जानिए चंद्रग्रहण के उपाय, chandra grahan ke upay,चंद्रग्रहण पर किस मन्त्र का करे जाप, chandra grahan par kis mantr ka karen jaap, चंद्रग्रहण पर क्या करे दान, chandra grahan par kya karen dan

हमारे धर्म और ज्योतिष के अनुसार चन्द्रग्रहण Chandra Grahan का प्रभाव अलग अलग राशियों में अलग अलग प्रभाव होता है । वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी पूर्णिमा के दिन समुद्र ज्वार आता ही है। समुद्री हलचल होती ही है जिसके परिणाम स्वरूप प्राकृतिक आपदाएँ आने की प्रबल संभावनाएँ भी होती हैं।
बहुत से मनुष्यों में भी बेचैनी, घबराहट , चिड़चिड़ाहट बढ़ जाती है लोग जल्दी क्रोधित हो जाते है ।

अवश्य पढ़ें :- घर पर कैसा भी हो वास्तु दोष अवश्य करें ये उपाय, जानिए वास्तु दोष निवारण के अचूक उपाय

चंद्र ग्रहण के दिन अपने जीवन की समस्त अस्थिरताओं को दूर करने के लिए एक आसान सा उपाय अवश्य ही करें ।

चंद्र ग्रहण के दिन किसी भी शिव मंदिर में जाकर सबसे पहले “श्री शिवाये नमस्तुभ्यं” मन्त्त्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर पंचामृत अथवा मीठा कच्चा दूध चढ़ाकर फिर सादा जल चढ़ाएं तत्पश्चात शिवलिंग पर गन्ने का रस या आंवले का रस चढ़ाकर एक बार फिर से सादा जल चढ़ाएं।

यह बहुत ही रामबाण उपाय है। इस उपाय को करने से भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा प्राप्त होगी, निश्चय ही समस्त संकट दूर होंगे । ऐसा करने से चन्द्रमा मजबूत होगा कुंडली में काल सर्प दोष, पितृ दोष दूर होगा ।

शास्त्रों के अनुसार चन्द्रग्रहण Chandra Grahan के समय किये जाने वाले जाप, दान और स्नान का लाखो गुना फल मिलता है और कुंडली के दोष भी कटते है ।

चंद्रग्रहण काल के समय अर्जित किया गया पुण्य अक्षय होता है । धार्मिक लोग इस समय का बहुत ही बेताबी से इंतज़ार करते है और इसका निश्चित ही लाभ उठाते है । इस समय में किया गया दान, जप, ध्यान का फल पूरे वर्ष में किये गए पुण्य से बहुत ही ज्यादा होता है ।

भगवान वेदव्यास जी ने कहा है कि – सामान्य दिन से चंद्र ग्रहणमें किया गया मानसिक जप , तप, ध्यान, दान आदि एक लाख गुना और सूर्य चंद्र ग्रहणमें दस लाख गुना फलदायी होता है।
और यदि यह गंगा नदी के किनारे किया जाय तो चंद्र ग्रहणमें एक करोड़ गुना और सूर्यचंद्रग्रहणमें दस करोड़ गुना फलदायी होता है।

चन्द्रग्रहण Chandra Grahan के काल के दौरान व्यक्तियों को यथा संभव घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण के दर्शन करने चाहिए यदि चंद्र ग्रहण देखना हो तो जल में चंद्र ग्रहण के प्रतिबिम्ब देख सकते है । गर्भवती महिलाओं को तो ग्रहण का दर्शन बिलकुल ही त्याज्य है।

चन्द्रग्रहण Chandra Grahan को ज्योतिष के लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। चन्द्र ग्रहण के समय चन्द्र देव की पूजा करने का विधान है।
मत्स्य पुराण में कहा गया है कि ग्रहण वाले दिन / ग्रहण काल के दौरान सभी व्यक्तियों को श्वेत पुष्पों और चन्दन आदि से भगवान चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए।

चंद्रमा के शुभ प्रभाव प्राप्त करने हेतु चंद्रमा के वैदिक मंत्र का बिना किसी धार्मिक पुस्तक, मूर्ति को छुए बिना ज्यादा से ज्यादा जप करना चाहिए।.

”ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः “

”ऊँ सों सोमाय नमः “

मंत्रोच्चारण करने से ग्रहण के समय वातावरण में छायी नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, घर में शुभ शक्तियों का वास होता है ।

चंद्रग्रहण Chandra Grahan के सूतक और चंद्रग्रहणकाल में स्नान, दान, जप, तप, पूजा पाठ, मन्त्र, तीर्थ स्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कार्यो का करना बहुत लाभकारी रहता है। धर्म सिन्धु के अनुसार, चंद्रग्रहणमोक्ष के उपरान्त पूजा पाठ, हवन, स्नान, छाया-दान, स्वर्ण-दान, तुला-दान, गाय-दान, मन्त्र जाप आदि श्रेयस्कर होते हैं।
चंद्रग्रहणके समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है।

चन्द्रग्रहण Chandra Grahan होने पर “ॐ नम: शिवाय” मन्त्र का जप परम फलदाई है, चंद्रग्रहण Chandra Grahan के समय इस मन्त्र का जप करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

चन्द्र ग्रहण के दोषों को दूर करने, शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए भगवान भोलेनाथ की आराधना से बढ़कर कुछ भी नहीं है। शिव पुराण में एक मंत्र दिया गया है, नित्य इसकी एक माला का जाप करने से जातक पर शंकर जी की असीम कृपा बनी रहती है।

शिव पुराण में दिया गया अमोघ मंत्र,
“श्री शिवाए नमस्तुभ्यम”

ग्रहण काल में इस मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें।

शनि की साढ़े साती या ढईया का प्रभाव होने पर अधिक से अधिक ” ॐ शं शनिचराये नम:” शनि मंत्र का जाप करें, हनुमान जी के मन्त्र एवं हनुमान चालीसा का भी पाठ करें।

चंद्र ग्रहणके समय ग्रहों का अशुभ फल समाप्त करने और विशेष मंत्र सिद्धि के लिये नवग्रह मन्त्र , गायत्री मन्त्र एवं महामृत्युंजय आदि शुभ मंत्रों का जाप करें।

चंद्रग्रहण Chandra Grahan के समय व्यक्ति को वास्तु देवता के मंत्र “ॐ वास्तु पुरुषाय नम:” का अधिक जाप करना चाहिए। इस उपाय से वास्तु पुरुष की कृपा मिलती है और घर के वास्तुदोष दूर होते है।

मान्यता है कि किसी भी ग्रहण के दौरान सूर्य ग्रहण में सूर्य की किरणे, और चंद्र ग्रहण में चन्द्रमा की रश्मियाँ पृथ्वी पर अपना नकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं, जिसका प्रभाव पूरे वायुमण्डल में पड़ता है मनुष्य तो मनुष्य हमारे आपके घर, प्रतिष्ठान पर भी ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से घर को बचाने के लिए ग्रहण से एक दिन पहले घर के मुख्य द्वार पर सिंदूर में घी मिलाकर ॐ या स्वास्तिक का चिह्न बनाये ।

बाजार में गमलो को रंगने के लिए, रंगोली बनाने के लिए गेरू मिलता है, ग्रहण से पहले घर के मुख्य द्वार के पास , घर की छत पर एवं घर के आँगन में गेरु के टुकड़े बिखेर दें, और ग्रहण के बाद इसे झाड़ू से बटोर कर घर के बाहर फेंक दे। इस उपाय से घर पर ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है ।

चंद्रग्रहण मोक्ष होने पर सोलह प्रकार के दान, जैसे अन्न, जल, वस्त्र, फल, दूध, मीठा, स्वर्ण, चंद्रमा से संबंधित सफेद वस्तुएं जैसे मोती, चांदी, सफेद कपड़ा, चावल, मिश्री, शंख, कपूर, श्वेत चंदन, सफेद फूल, पलाश की लकड़ी, दही, चावल, घी, चीनी आदि का दान जो भी संभव हो सभी मनुष्यों को अवश्य ही करना चाहिए।

लेकिन जिन व्यक्ति का चन्द्रमा उच्च का हो उन्हें सफ़ेद वस्तुओं का दान बिलकुल भी नहीं करना चाहिए । वह अन्न, वस्त्र, फल, पीली लाल मिठाई आदि का दान कर सकते है ।

pandit-ji
ज्योतिषाचार्य डॉ० अमित कुमार द्धिवेदी
कुण्डली, हस्त रेखा, वास्तु
एवं प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ

दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो , आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।

Pandit Ji
Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Translate »