Tuesday, April 20, 2021
Home Hindi मुहूर्त गंडमूल नक्षत्र

गंडमूल नक्षत्र

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 27 नक्षत्रों में से छ: नक्षत्र ऎसे होते हैं जिन्हें गंडमूल नक्षत्र कहा जाता है. यह नक्षत्र दो राशियों की संधि पर होते हैं, एक नक्षत्र के साथ ही राशि समाप्त होती है और दूसरे नक्षत्र के आरंभ के साथ ही दूसरी राशि आरंभ होती है।

संधिकाल को सदैव ही अशुभ और कष्टकारक माना जाता रहा है। जैसे ऋतुओं के संधिकाल में रोगों की उत्पत्ति होती है। दिन एवं रात्रि के संधिकाल में केवल प्रभु की आराधना की जाती है। घर की दहलीज पर भी कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता हैं…यही कारण है कि बालक के जन्म लेते ही सर्वाधिक चिंता माता-पिता को बालक के जन्म-नक्षत्र के बारे में होती है।

बालक जैसे ही संसार में जन्म लेता है। वैसे ही उसके जन्म नक्षत्र के बारे में अवश्य जान लेना चाहते हैं कि कहीं बालक गंडमूल नक्षत्र में तो नहीं है? यदि गंडमूल में है तो घोर मूल में तो नहीं है? क्योंकि अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूला तथा रेवती नक्षत्रों में उत्पन्न बालक का मुंह देखना पिता के लिए हानिकारक होता है। इस प्रकार के संधि कालों में शुभ कार्य, विवाह व यात्रा आदि वर्जित माने जाते हैं।
बुध व केतु के नक्षत्रों को गंडमूल नक्षत्रों में शामिल किया गया है. मीन-मेष, कर्क-सिंह, वृश्चिक-धनु राशियों में गंडमूल नक्षत्र होता है.

Kalash One Imageरेवती, अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा तथा मूल नक्षत्र को गंडमूल नक्षत्र माना जाता है. इन नक्षत्रों में से किसी एक में भी शिशु के जन्म लेने पर बच्चा माता, पिता, स्वयं अथवा अन्य किसी रिश्तेदार पर भारी पड़ता है, ऐसा माना गया है।
इसके लिए बच्चे के जन्म के 27वें दिन शांति पूजा का विधान है जिससे उस गंडमूल नक्षत्र के किसी भी दुषप्रभाव को शांत किया जा सके
हर बुद्धिमान ज्योतिषी /व्यक्ति गंड मूल की स्तिथि में हर हाल में उसकी शांति कराने की ही सलाह देते है।
गंड मूल की पूजा एक तकनीकी पूजा होती है। जन्म नक्षत्र के अनुसार देवता का पूजन करने से अशुभ फलों में कमी तथा शुभ फलों की प्राप्ति होती है ।

Kalash One Imageयदि कोई बच्चा अश्विनी, मघा, मूल नक्षत्र में जन्मा हैं तो उसके लिए गणेश जी का पूजन करना चाहिए ।
इस नक्षत्र में जन्में बच्चे के लिए माह के किसी भी एक गुरुवार या बुधवार को हरे रंग के वस्त्र, लहसुनिया आदि वस्तु का दान करना उत्तम रहता है। किसी मंदिर में झंडा फहराने से भी लाभ मिलता है ।


Kalash One Imageयदि कोई बच्चा आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र में जन्मा हैं तो आपके लिए बुध का पूजन करना फलदायी रहता है ।
इस नक्षत्र में जन्में बच्चे के लिए माह के किसी भी एक बुधवार को हरी सब्जी, हरा धनिया, आँवले, पन्ना, कांसे के बर्तन, आदि वस्तुओं का दान करना विशेष फलदायी माना गया है।



दोस्तों यह साईट बिलकुल निशुल्क है। यदि आपको इस साईट से कुछ भी लाभ प्राप्त हुआ हो , आपको इस साईट के कंटेंट पसंद आते हो तो मदद स्वरुप आप इस साईट को प्रति दिन ना केवल खुद ज्यादा से ज्यादा विजिट करे वरन अपने सम्पर्कियों को भी इस साईट के बारे में अवश्य बताएं …..धन्यवाद ।

Pandit Jihttps://www.memorymuseum.net
MemoryMuseum is one of the oldest and trusted sources to get devotional information in India. You can also find various tools to stay connected with Indian culture and traditions like Ram Shalaka, Panchang, Swapnphal, and Ayurveda.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

दिवाली पूजा, diwali pooja,

दिवाली पूजा, diwali pooja,दिवाली पूजा, diwali pooja, में विशेष रूप से माँ लक्ष्मी...

लकवे के अचूक उपाय

पक्षाघात के उपायPakshaghat ke upayजब हमारी मांसपेशियाँ कार्य करने में पूर्णतः असमर्थ हों जाती है उस स्थिति को...

बसंत पंचमी के उपाय, basant panchmi ke upay,

बसंत पंचमी के उपाय, basant panchmi ke upay,वसंत पंचमी Basant Panchmi माघ महीने की शुक्लपक्ष...

Dhanteras ke prayog, धनतेरस के प्रयोग,

Dhanteras ke prayog, धनतेरस के प्रयोग,"धनतेरस Dhanteras धन के देव कुबेर, आयुर्वेद...
Translate »